एप्पल का लाल आईफ़ोन चीन में लाल क्यों नहीं

एप्पल का अगला आईफ़ोन लाल रंग का हो सकता है, पर वह चीन में लाल नहीं होगा.

आईफ़ोन 7 और 7प्लस 40 से ज़्यादा देशों में बिकने जा रहे हैं. पर चीन ने इसका अंदाज़ थोड़ा अलग है.

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रेड क्या है?

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रेड एक चैरिटी संस्था है, जिसका मक़सद एड्स रोकना है. इसकी स्थापना यूटू बैंड के संगीतकार बोनो और सामाजिक कार्यकर्ता बॉबी श्रीवर ने की थी.

यह अपने कार्यक्रमों से उगाहे पैसे ग्लोबल फंड फ़ॉर एचआईवी/एड्स को देता है. इसमें सबसे ज़्यादा दान देने वाली कंपनी एप्पल है.

एप्पल के इस ख़ास संस्करण के फ़ोन से मिले पैसे का एक हिस्सा अफ़्रीका में चल रहे राहत कार्यों में खर्च किया जाएगा.

एड्स/एचआईवी

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लेकिन कंपनी के चीनी भाषा की साइट पर यह लिखा हुआ नहीं है.

चीन के अलग-अलग इलाक़ों में दिखने वाली साइट पर एप्पल की ब्रांडिंग अलग-अलग तरीक़े से की गई है.

कुछ लोगों का कहना है कि इसकी वजह शायद यह है कि सरकार लोगों की संवेदनशीलता को देखते हुए इस पर नियंत्रण रखना चाहती है.

चीन में अभी भी एड्स और एचआईवी जैसे मुद्दों पर खुल कर बात नहीं की जाती है.

चीन में एड्स का पहला मामला 1989 में ही सामने आया था और यह 2000 तक देश के लगभग हर हिस्से तक पहुँच गया था.

दलाई लामा

रेड के इंस्टाग्राम पर साल की शुरुआत में दलाई लामा की तस्वीर थी. पर चीन सरकार उन्हें ख़तरनाक अलगाववादी मानती है. इसके बाद कुछ लोगों ने ट्रॉल करना शुरू कर दिया.

बीते साल एपल की ऑनलाइन फ़िल्म और पुस्तक सेवा चीन में बंद कर दी गई. एप्पल को चीन ऐप स्टोर से न्यूयॉर्क टाइम्स अख़बार भी हटाना पड़ा था.

इसके बावजूद समझा जाता है कि चीन में आईफ़ोन अच्छा व्यवसाय कर लेगी, क्योंकि वहां लाल रंग को शुभ माना जाता है.

एप्पल के मुख्य कार्यकारी टिम कुक कई बार चीन का दौरा कर चुके हैं. वे इस साल वहां शोध और विकास केंद्र भी शुरू करने जा रहे हैं.

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