अबू धाबी: फांसी से 10 भारतीयों को 'बचाने वाले' ओबेरॉय को जानें

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अबू धाबी की अल अइन अदालत ने वहां मौत की सज़ा पाने वाले 10 भारतीय युवकों की सज़ा माफ़ करने के बदले ब्लड मनी जमा करवाने की मंज़ूरी दी है.

भारत के पंजाब से अबू धाबी जाकर काम करने इन लड़कों को 2015 में एक झड़प के दौरान एक पाकिस्तानी युवक की हत्या का दोषी पाया गया था. इन्हें मौत की सज़ा सुनाई गई थी.

क्या होती है ब्लड मनी?

दसअसल, शरीया क़ानून में अगर हत्या के दोषी और पीड़ित के परिवार के बीच सुलह हो जाए और अगर पीड़ित परिवार माफ़ी देने को राज़ी हो जाए तो फांसी माफ़ करने के लिए अदालत में अपील की जा सकती है.

हालांकि इसमें कई बार मुआवज़ा भी दिया जाता है, इसे ब्लड मनी कहते हैं. भारतीय पंजाब के इन युवकों को माफ़ी दी जाए या नहीं ये फ़ैसला अदालत को करना है, लेकिन इन नौजवानों के लिए आज़ादी की उम्मीद बंधी है.

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Image caption फ़रहान की हत्या के आरोपी 10 पंजाबी युवको को मौत की सज़ा

वो जिसने की 10 भारतीय युवकों की मदद

इनकी सज़ा माफ़ी के बदले ब्लड मनी देने का काम भारतीय मूल के एसपीएस ओबेरॉय कर रहे हैं जो दुबई के एक उद्योगपति हैं. ओबेरॉय 'सरबत दा भला' नाम के एनजीओ के अध्यक्ष हैं जो इस तरह के मामलों में फंसे लोगों की मदद करते हैं.

नीले और काले रंग की जेल की पोशाक में अदालत आए इन पंजाबी युवकों के चेहरों पर कुछ राहत साफ़ दिखाई दे रही थी, लेकिन उनकी नज़रें उन्हें बचाने के लिए आगे आए एसपीएस ओबेरॉय पर टिकी थीं.

एसपीएस ओबेरॉय ने जानकारी देते हुए बताया, "26 अक्टूबर को जिन 10 युवाओं को मौत की सज़ा दी गई थी, उस मामले में हम समझौता करने में कामयाब हुए.''

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Image caption एसपीएस ओबेरॉय की पहल पर फ़रहान के पिता ने ह्त्या के दोषियों को माफ़ किया

कोर्ट में जमा किए समझौते के काग़ज़

पाकिस्तानी मोहम्मद रियाज़ झगड़े में मारे गए थे. फ़रहान मोहम्मद रियाज़ के पिता हैं जो सज़ा पाने वाले युवकों को माफ़ करने के लिए अपने परिवार और कुछ दोस्तों के साथ पेशावर से अबू धाबी की कोर्ट पहुंचे.

उन्होने समझौते के काग़ज़ात कोर्ट में जमा कराए. कोर्ट ने आगे की कार्यवाही के लिए 12 अप्रैल 2017 की तारीख़ दी है.

मोहम्मद रियाज़ कहते हैं, ''मैंने अपने बेटे को खोया ये मेरी बदक़िस्मती थी. अगर मैं इन लड़कों को माफ़ नहीं करता तो क्या होता? मैं युवा पीढ़ी से अपील करता हूं कि वो ऐसे झगड़े ना करे, अपने काम से काम रखे और अपने देश और माता-पिता का नाम रोशन करें.''

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युवा पीढ़ी को संदेश देते हुए रियाज़ ने कहा ''मैंने उन 10 लोगों को माफ़ कर दिया और उनकी ज़िंदगी अल्लाह ने बचाई है, मेरा तो सिर्फ़ नाम है. यहां आने वाले हर एक व्यक्ति के साथ 10 लोगों की ज़िंदगियां जु़ड़ी होती हैं, उनके माता-पिता, बीवी और बच्चों की.''

ओबेरॉय ने बताया, ''मोहम्मद रियाज़ को तीन दिन पहले पाकिस्तान से बुलाया गया था. हमने उन्हें वीज़ा और टिकट भेजे और उनके यहां रहने का इंतज़ाम किया. हमने किसी तरह मोहम्मद रियाज़ को मनाया और उन्हें शरिया कोर्ट के क़ानून के मुताबिक़ हमने दो लाख देहरम ब्लड मनी अदालत में जमा करवाई.''

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Image caption एनजीओ सरबत दा भला अरब में मौत की सज़ा पाने युवकों की मदद करता है

ओबेरॉय ने ये भी बताया कि उन्होने जज के सामने अपने परिवार की ओर से सभी 10 युवकों को माफ़ करने की बात कही.

ओबरॉय ने मौत की सज़ा से कई युवकों को बचाया

ओबेरॉय ने अपने एनजीओ सरबत दा भला के बारे में जानकारी देते हुए कहा 2006 से 2010 के बीच 123 युवकों को मौत की सज़ा और 40 साल तक जेल की सज़ा सुनाई गई थी. जो मामले शारजाह, दुबई, अबु धाबी के थे उन्हें हमने अपने हाथों में ले लिया और इन मुक़दमों को लड़ा.

क्योंकि जिन युवाओं को सज़ा दी गई थी वो आर्थिक तौर पर कमज़ोर हैं. यहां तक कि वो अपने लिए वक़ील भी नहीं कर सकते और ब्लड मनी भी नहीं दे सकते. सरबत का भला चैरिटी संस्था का ट्रस्ट इनकी मदद करता है.

अब तक हमने 88 युवकों को फांसी से बचाया है और वो सब अब अपने घर जा चुके हैं. ये युवक पंजाब, हरियाणा, महाराष्ट्र और हैदराबाद के थे. पांच युवक तो पाकिस्तान के थे और पांच बांगलादेश के थे.

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