हीरों के कारण मूल निवासियों का वजूद ख़तरे में

  • 27 मार्च 2017
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ब्राज़ील के कुछ मूल निवासियों के सामने अपनी ज़मीन और उसके साथ ही अपनी पहचान खोने का ख़तरा है.

वहां के नियमों के मुताबिक़, मूल निवासियों के इलाक़े में किसी तरह की खनन गतिविधि नहीं की जा सकती.

पर वहां साल 1999 से ही हीरों का खनन चल रहा है.

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सिंता लार्गा के एक आध्यात्मिक नेता ने कहा, "हमारी ज़मीन हमारी आत्मा है."

वे कहते हैं, "ज़मीन के बिना एक मूल निवासी व्यक्ति आत्मा के बिना किसी आदमी की तरह है."

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Image caption रूज़वेल्ट मूल निवासी क्षेत्र

मूल निवासियों का यह समूह रूज़वेल्ट मूल इलाक़े में है. यह रोनडोनिया और मातो ग्रॉसो राज्यों के बीच है.

वहां ग्रोता द सोसेगो में दस किलोमीटर लंबे और दो किलोमीटर चौड़े इलाक़े से जंगल पूरी तरह साफ़ किया जा चुका है.

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मूल निवासियों के अधिकारों पर काम करने वाले लोगों का कहना है कि वास्तव में कहीं ज़्यादा बड़े इलाक़े में जंगल की कटाई की गई है.

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एक मोटे अनुमान के मुताबिक़, यहां से सालाना 3.20 करोड़ डॉलर मूल्य के हीरे निकाले जाते हैं. यह पूरा खनन ग़ैर क़ानूनी है.

ब्राज़ील के जियोलॉजिकल सर्वे का अनुमान है कि यहां से 20 करोड़ डॉलर मूल्य के हीरे निकाले जा सकते हैं.

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प्राकृतिक संपदा से भरा हुआ इलाक़ा सिर्फ़ लाजेज़ ही नहीं है.

अनुमान है कि रूज़वेल्ट मूल निवासी रिजर्व क्षेत्र में दुनिया के सबसे अधिक हीरे हो सकते हैं.

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सिंता लार्गा के मूल निवासियों के एक नेता ने कहा, "समस्या यह है कि सरकार हमारी कोई मदद नहीं करती है."

वे आगे कहते हैं, "हमारे पास दवाएं नहीं हैं, परिवहन के साधन नहीं हैं और ना ही कोई अवसर है."

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ग़ैरक़ानूनी खनन के काम में लगे लोगों ने इलाके में कुछ सेवाएं शुरू कीं.

उनकी कोशिश है कि वे सिंता लार्गा के लोगों को खनन के लिए राजी करा सकें.

इसके पहले भी सिंता लार्गा का संपदा लोगों के लिए मुसीबत ही लेकर आई है.

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साल 1963 में सिंता लार्गा के रबड़ के बगीचे पर हवाई जहाज़ से डायनामाइट गिराया गया. इससे पूरा गांव मिट गया.

इसे इलेवेंथ पैरेलल के जनसंहार के रूप में जाना जाता है.

किसी समय इस इलाक़े में मूल निवासियों की तादाद 5,000 थी. यह साल 2012 में घट कर 1,758 तक सिमट गई.

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सिंता लार्गा के लोगों का कहना है कि जिंदा बचे रहने के लिए हीरों का खनन ज़रूरी है.

उन्हें ब्राज़ील सरकार से थोड़ी मदद मिलती है. उन्हें साल 2014 में सिर्फ़ 33,000 डॉलर ही मिले थे.

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मूल निवासियों की संस्था फ़्यूनाई के पूर्व क्षेत्रीय कोऑर्डिनेटर ब्रूनो लीमा ए सिल्वा कहते हैं कि ड्रग्स, शराब, हिंसा और वेश्यावृत्ति का सबसे ज़्यादा असर सिंता लार्गा पर ही पड़ा है.

सिंता लार्गा का मानना है कि रूज़वेल्ट इलाक़े में खनन पर लगी रोक हटा कर ही इस समस्या का हल खोजा जा सकता है.

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लोगों का कहना है कि ज़मीन के नीचे दबी संपत्ति का वे फ़ायदा उठा सकेंगे.

मार्सेलो सिंता लार्गा कहते हैं, "हम चाहते हैं कि खनन को क़ानूनी कर दिया जाए."

टेक्स्ट: लुइज़ फ़िलिप सिल्वा, फ़ोटो: फ़िलिप एब्रू

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