मेरठ नगर निगम में 'वंदे मातरम' अनिवार्य

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मेरठ नगर निगम में 'वंदे मातरम' गाने को लेकर हुआ विवाद तूल पकड़ता जा रहा है.

मेयर की मौजूदगी में सदन ने राष्ट्र गीत गाने को अनिवार्य बनाए जाने संबंधी प्रस्ताव को ध्वनिमत से पारित कर दिया.

विपक्षी पार्षद इसे अनिवार्य बनाए जाने का विरोध कर रहे हैं.

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मंगलवार को निगम सदन की हुई बैठक में बीजेपी पार्षदों की ओर से प्रस्ताव आया कि सदन की बैठक से पहले राष्ट्र गीत गाना अनिवार्य हो.

जो पार्षद ऐसा नहीं करेंगे उन्हें सदन में बैठने नहीं दिया जाएगा और उनकी सदस्यता ख़त्म कर दी जाएगी.

मेयर हरिकांत अहलूवालिया की मौजूदगी में सदन ने ध्वनि मत से इस प्रस्ताव को पारित कर दिया.

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मेयर ने प्रस्ताव के पारित होने और इसे नियम बनाए जाने से इनकार किया है. लेकिन उनका कहना है कि यह परंपरा पहले से चली आ रही है और ऐसा नियम बनाए जाने में कुछ भी ग़लत नहीं है.

हरिकांत अहलूवालिया ने बीबीसी से कहा, "मेरे सामने प्रस्ताव आया कि कुछ लोग राष्ट्रगीत गाते समय बाहर चले जाते हैं और फिर आकर बैठ जाते हैं, इससे राष्ट्रगीत का अपमान होता है. ऐसा करने वालों के ख़िलाफ़ कार्रवाई हो."

उन्होंने आगे जोड़ा, "प्रस्ताव लाने वाले और उनका समर्थन करने वाले बहुमत में हैं. मैं सदन का अध्यक्ष हूं और बहुमत का सम्मान करना मेरा कर्तव्य है."

दरअसल, नगर निगम की बोर्ड बैठक से पहले राष्ट्रगीत गाने की परंपरा काफी दिनों से है.

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लेकिन मुस्लिम पार्षद इस दौरान वहां मौजूद नहीं रहते और इसके बाद आकर सदन में बैठते हैं. अभी तक इस पर कोई विवाद नहीं हुआ था.

मुस्लिम पार्षदों का कहना है कि अब जबकि सदन का कार्यकाल ख़त्म होने में महज़ कुछ दिन बचे हैं, बीजेपी के लोग जानबूझकर इस मुद्दे को तूल दे रहे हैं.

नगर निगम में नेता प्रतिपक्ष और समाजवादी पार्टी के पार्षद शाहिद अब्बासी कहते हैं, "हम लोग राष्ट्रगान के दौरान खड़े होते हैं, जय हिंद का नारा भी लगाते हैं. लेकिन बीजेपी इस मुद्दे को जानबूझकर तूल देकर ध्रुवीकरण की कोशिश कर रही है."

अब्बासी कहते हैं कि जब से उत्तर प्रदेश में बीजेपी की सरकार बनी है, यह मुद्दा उठाया जा रहा है.

उनके मुताबिक, "मंगलवार को सरकार बनने के बाद सदन की पहली बैठक हुई और तभी इस प्रस्ताव को ध्वनिमत से पारित कर दिया गया. निगम चुनाव में इस मुद्दे को ये लोग भुनाना चाहते हैं."

हालांकि मेयर हरिकांत अहलूवालिया का कहना था कि हमने इसके लिए न तो किसी को सदन से बाहर किया और न ही किसी को आने से रोका.

लेकिन उन्होंने यह भी कहा कि 'राष्ट्रगीत का अपमान किसी क़ीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा.'

शाहिद अब्बासी का कहना है कि उन्होंने वंदेमातरम का विरोध नहीं किया है, बल्कि वे दूसरे लोगों की भावनाओं का आदर करते हुए उठकर चले गए थे.

निगम के कई पार्षद इस नियम का मुखर विरोध भी कर रहे हैं. कुछ पार्षदों ने तो ऐसा नियम बनाए जाने पर इस्तीफ़े तक की धमकी दी है. लेकिन ज़्यादातर मुस्लिम पार्षदों को इसमें आपत्ति नहीं है.

शाहिद अब्बासी कहते हैं, "आपत्ति इसे ज़बरन थोपने पर है. इस बारे में जब सुप्रीम कोर्ट भी स्पष्ट व्यवस्था दे चुका है तब नगर निगम में इसके लिए विवश कैसे किया जा सकता है?"

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