पामेला की चाहत हैं जूलियन असांज

  • 1 अप्रैल 2017
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नामी टेलीविज़न शो बेवॉच में काम कर चुकी पामेला एंडरसन ने जूलियन असांज के बारे में अपने 'प्यार' का इज़हार किया है. उन्होंने 45 साल के असांज को ' इस दौर का सबसे पॉपुलर शरणार्थी' कहा है.

पामेला ने विकीलीक्स के संस्थापक के बारे में अपने ब्लॉग में लिखा है कि उनके साथ मेरा संबध 'गोपनीय' नहीं है और वो 'मेरे पसंदीदा लोगों में से एक' हैं.

कौन हैं जूलियन असांज?

पांच महीने पहले 49 साल की पामेला को इक्वाडोर के दूतावास में असांज के साथ लंच करते हुए देखा गया था जहां असांज पिछले 5 सालों से रह रहे हैं.

यौन शोषण के एक मामले में स्वीडन को असांज की तलाश थी. इस आरोपों से असांज इंकार करते रहे हैं.

जूलियन असांज से स्वीडन कर सकेगा पूछताछ

'मुझे असांज की चिंता है'

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पामेला ने लिखा है कि असांज को अमरीका सज़ा दे रहा है क्योंकि उन्होंने उनके काम को दुनिया के सामने रख दिया. उन्हें चिंता है कि कहीं असांज को स्वीडन को प्रत्यर्पित तो नहीं कर दिया जाएगा.

पामेला ने असांज की एक तस्वीर अपने बलॉग पर पोस्ट की और साथ में लिखा "वो शायद हमारे दौर के सबसे नामी और ऐसे शरणार्थी हैं जिन पर सबसे अधिक राजनीति की हुई है."

जूलियन असांज के इंटरनेट पर लगी आंशिक रोक

पामेला ने लिखा है लिखा, "जूलियन एक ऐसे व्यक्ति हैं जो बेहद संवेदनशील हैं और दुनिया के बारे में चिंता करते हैं. अपने काम के कारण उन्होंने कुछ देशों में अपने लिए ताकतवर दुश्मन बन लिए हैं, इनमें से एक है अमरीका जिसे उन्होंने एक्सपोज़ किया था."

उन्होंने लिखा है कि उन्हें स्वीडन पर "पूरा भरोसा" है कि वो "अमरीका के दवाब के आगे नहीं झुकेंगा."

उन्होंने लिखा, "असांज जानकारी के माध्यम से दुनिया को आज़ाद करने की कोशिश कर रहे हैं. ये एक तरह की रोमांटिक लड़ाई है और इसके लिए मुझे उनसे प्यार है."

असांज को आज़ादी मिलनी चाहिए

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इससे कुछ दिन पहले भी पामेला ने अपने ब्लॉग में लिखा था कि वो और असांज अच्छे दोस्त बन गए हैं और उन्हें आश्चर्य नहीं होगा अगर कुछ लोग इस संबंध को मात्र 'सेक्स संबंध' समझें.

वो लिखती हैं कि ऐसा सोच लेना सबसे आसान होता है और ये 'अख़बरों की ख़बर बनने के लिए भी ठीक लगता है'.

पामेला ने लिखा कि अब तक दो बार संयुक्त राष्ट्र भी कह चुका हैं कि असांज को छोड़ दिया जाना चाहिए और उन्हें मुआवज़ा दिया जाना चाहिए.

फरवरी 2016 में संयुक्त राष्ट्र के एक पैनल ने कहा था कि असांज को 'ग़ैरकानूनी तौर पर हिरासत में रखा गया है' और उन्हें आज़ाद कर दिया जाना चाहिए.

उस समय ब्रिटेन के विदेश मंत्री रहे फिलिप हेमंड ने इस फ़ैसले को 'बेतुका' बताया था.

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