छात्रों की पत्रकारिता से छिनी प्रिसिंपल की नौकरी

  • 6 अप्रैल 2017
'बूस्टर रीडक्स' के पत्रकार. इमेज कॉपीरइट Emily Smith/Pittsburg High School

एक हाई स्कूल के नए प्रिंसिपल को छात्रों की ओर से उनकी योग्यता को लेकर उठाए गए सवाल के बाद इस्तीफ़ा देना पड़ा है.

अमरीका के कंसास स्थित पिट्सबर्ग हाई स्कूल (पीएचएस) में छात्रों के अख़बार 'बूस्टर रीडक्स' ने स्कूल के नवनियुक्त प्रिंसिपल डॉक्टर ऐमी रॉबर्टसन की उनकी प्रोफाइल के आधार पर जांच-पड़ताल की.

छात्रों के तीन हफ़्ते की जांच में पता चला कि डॉक्टर रॉबर्टसन के पास ज़रूरी योग्यता और आधिकारिक मान्यता नहीं है.

'बूस्टर रीडक्स' के छह छात्रों की इस टीम के काम की तारीफ़ पूरे अमरीका के पत्रकार कर रहे हैं.

जांच-पड़ताल

रॉबर्टसन को पीट्सबर्ग बोर्ड ऑफ़ एजुकेशन ने इस साल छह मार्च को 93 हज़ार डॉलर सालाना के वेतन पर नौकरी दी थी.

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स्कूल बोर्ड की मंगलवार रात हुई बैठक में उनका इस्तीफ़ा स्वीकार किया गया.

बोर्ड ने एक बयान में कहा गया है, '' छात्रों की ओर से उठाए गए मुद्दे के आधार पर डॉक्टर रॉबर्टसन को लगा कि उनका इस्तीफ़ा दे देना ही बोर्ड के हित में होगा.''

योग्यता और मान्यता

'बूस्टर रीडक्स' की संपादक ट्रीना पॉल ने कहा, '' वो हमारे स्कूल की प्रमुख होने वाली थीं, ऐसे में हम आश्वस्त हो लेना चाहते थे कि उनके पास ज़रूरी योग्यता और मान्यता है.''

अख़बार के मुताबिक़ छात्रों के साथ टेलीफ़ोन पर हुई बातचीत में डॉक्टर रॉबर्टसन ने कुछ सवालों के आधे-अधूरे जवाब दिए, ग़लत तारीखें बताईं और ग़लतबयानी की.

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छात्रों की इस टीम में शामिल 17 साल के पत्रकार मैडी बाडेन ने स्थानीय अख़बार 'कंसास सिटी स्टार' को बताया, '' मैं यह जानना चाहता हूं कि अगर छात्रों ने यह पता लगा लिया तो, बड़े लोग ऐसा क्यों नहीं कर पाए.''

जांच पड़ताल में पता चला कि डॉक्टर रॉबर्टसन दुबई के एक स्कूल में प्रिंसिपल के रूप में काम करती थीं. लेकिन यूनाइटेड अरब अमीरात की सरकार ने उनके लाइसेंस को 2013 में निलंबित कर दिया था.

प्रिंसिपल का इनकार

यह भी पता चला कि कॉर्लिंस यूनिवर्सिटी जहां से डॉक्टर रॉबर्टसन ने अपनी मास्टर और पीएचडी की डिग्री ली थी, उसे अमरीकी शिक्षा विभाग से मान्यता नहीं मिली है.

इस यूनिवर्सिटी पर पैसे लेकर डिग्रियां देने का भी आरोप है.

डॉक्टर रॉबर्टसन ने 'कांसस सिटी स्टार' से कहा, '' कॉर्लिंस यूनिवर्सिटी की वर्तमान स्थिति प्रासंगिक नहीं है, क्योंकि जब मैंने 1994 में वहां से एमए की डिग्री ली और 2010 में पीएचडी की तो वहां ऐसा कोई मुद्दा नहीं था.''

छात्रों की ओर से योग्यता पर जताए गए संदेह पर उन्होंने कहा, '' पीएचएस की ओर से मेरी योग्यता पर उठाए गए सवालों पर मैं कोई प्रतिक्रिया नहीं देना चाहूंगी, क्योंकि वो तथ्यों पर आधारित नहीं हैं.''

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