सीरिया में केमिकल हमला: हमें क्या-क्या पता है

  • 7 अप्रैल 2017
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सीरिया में विद्रोहियों के कब्जे वाले शहर इदलिब में संदिग्ध रासायनिक हमले में कम से कम 80 लोगों की मौत हो गई. मृतकों में कई बच्चे भी शामिल हैं.

सैकड़ों की संख्या में लोग दम घुटने की शिकायत कर रहे हैं. विपक्षी दलों और पश्चिमी देशों का कहना है कि मंगलवार को हुए हमले के पीछे सीरियाई सरकार का हाथ है.

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सीरिया की सेना ने रासायनिक हमले से इनकार किया है, जबकि उसके सहयोगी देश रूस का कहना है कि हवाई हमले का निशाना एक डिपो बना जो रसायनिक हथियारों से भरा था.

क्या हुआ है?

गृहयुद्ध से जूझ रहे सीरिया के इदलिब शहर में मंगलवार को जो दृश्य नज़र आए, वो दिल को दहला देने वाले थे. ज़मीन पर कई शव बिखरे पड़े थे तो कहीं लोगों के मुंह से झाग निकल रहा था.

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कई लोग अपने छोटे बच्चों को गोद में उठाए अस्पताल की तरफ भाग रहे थे.

द सीरियन ऑब्ज़र्वेटरी फ़ॉर ह्यूमन राइट्स के मुताबिक ख़ान शेखौन में सीरियाई सरकार और रूसी लड़ाकू विमानों के हमले में कई लोगों का दम घुट गया.

14 साल की मरियम अबु ख़लील ने न्यूयॉर्क टाइम्स को बताया कि उन्होंने एक मंजिल की इमारत पर एयरक्राफ्ट को बम गिराते देखा है. उन्होंने बताया, "धमाके के बाद ऐसा लगा कि जैसे कोहरे की चादर फैल गई है. मैं तो घर में ही छिपी रही लेकिन कई लोगों का दम घुट गया."

इदलिब के चैरिटी एंबुलेंस सर्विस के मुखिया मोहम्मद रासूल ने बीबीसी को बताया कि सुबह हमले के बाद जब तक राहत सेवा लोगों तक पहुंचती तब तक कई लोगों को सांस लेने में मुश्किल हो रही थी.

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सीरिया में रासायनिक हमला

यूनियन ऑफ़ मेडिकल केयर एंड रिलीफ़ आर्गेनाइजेशन के मुताबिक ख़ान शेखौन में लोगों का इलाज़ कर रहे तीन डॉक्टरों का भी दम घुटने लगा, जिसके बाद उन्हें इंटेसिव केयर यूनिट में भर्ती कराया गया.

कितने लोग चपेट में हैं?

राहत एवं बचाव कर्मियों का कहना है कि दम घुटने की शिकायत पर सैकड़ों की संख्या में लोगों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है.

इस्माइल अब्दुल्लाह नामक एक राहतकर्मी ने कहा कि हमलावरों ने बंकर बस्टर बम, क्लस्टर बम समेत सभी तरह के हथियारों का इस्तेमाल किया.

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फिर, उन्होंने रासायनिक हथियार भी चलाए. लोग बड़ी संख्या में मारे गए हैं.

इदलिब प्रांत में विद्रोही लड़ाकों द्वारा संचालित समूह का दावा है कि इस हमले में कम से कम 84 लोग मारे गए हैं, जिसमें 27 बच्चे और 19 महिलाएं शामिल हैं. जबकि 546 लोग घायल हैं.

द सीरियन ऑब्ज़र्वेटरी फ़ॉर ह्यूमन राइट्स के मुताबिक कम से कम 86 लोगों की मौत हुई है और हताहतों की संख्या बढ़ सकती है.

हताहतों और घायलों की मुश्किल?

विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक हमले में ऐसे रासायन का इस्तेमाल किया गया है, जिससे लोगों को सांस लेने में काफ़ी मुश्किलें हो रही हैं.

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ऑर्गेनाइजेशन फॉर द प्राहबिशन ऑफ़ केमिकल वीपंस (ओपीसीडब्ल्यू) की फैक्ट फाइंडिंग कमेटी इस हमले से संबंधित सभी जानकारी को जुटा रही है.

वहीं इदलिब के स्थानीय डॉक्टर अब्दुलाई तेनारी ने बीबीसी से बताया, "सभी पीड़ितों में एक बात कॉमन थी- सबको सांस लेने में दिक्कत हो रही थी, कमज़ोरी महसूस हो रही थी, लोगों का दम घुट रहा था."

तेनारी के मुताबिक सारीन के ज़हर की काट के लिए इस्तेमाल होने वाले एट्रोपाइन देने पर पीड़ितों की स्थिति स्थिर हुई.

सीरियाई सरकार का क्या कहना है?

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सीरियाई सेना ने बयान जारी करके कहा है कि हमले में किसी तरह के रासायन का इस्तेमाल नहीं किया गया है. सेना ने ये भी कहा है कि भविष्य में भी किसी तरह के रासायनिक हमले की योजना नहीं है.

इस लड़ाई में रूस सीरिया के साथ है. रूस ने एक बयान देकर बताया है कि सीरीयाई सेना ने हमला किया था जिसमें चरमपंथियों के हथियारों के डिपो को निशाना बनाया गया था और वहां केमिकल हथियार हो सकते हैं.

सवाल ये भी है कि रूस का स्पष्टीकरण कितना विश्वसनीय है?

ब्रिटिश सेना के केमिकल बायोलाजिकल रेडियोलॉजिकल न्यूक्लियर (सीबीआरएन) के पूर्व कमांडिंग ऑफ़िसर हामिश डे ब्रेटन गॉर्डन ने बीबीसी को बताया, "ये स्पष्ट है कि सारीन अटैक हुआ है. विद्रोही लड़ाकों के पास सारीन का स्टॉक था, यह पूरी तरह से झूठ लगता है."

सारीन क्या है?

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सारीन बेहद ख़तरनाक रासायन है और सायनाइड के मुक़ाबले 20 गुना ज़्यादा ख़तरनाक माना जाता है. यह हृदय और श्वसन संबंधी अंगों पर असर डालता है.

सारीन की पहचान करना बेहद मुश्किल है. लेकिन यह रंगहीन और स्वादहीन द्रव होता है, जिसमें कोई गंध भी नहीं होती है. अमूमन खुली हवा में आने पर ये वाष्प बन जाता है.

सीरिया में पहले भी सारीन का इस्तेमाल हुआ है?

सीरियाई सरकार पर अगस्त, 2013 में सारीन भरे रॉकेट के जरिए दमिश्क में विद्रोहियों पर हमला करने का आरोप है. इस हमले में सैकड़ों लोग मारे गए हैं.

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