सीरिया पर हमले से अमरीका को क्या हासिल हुआ?

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सीरिया एयरबेस पर हमला

सीरियाई सैन्य अड्डे पर हवाई हमलों के बाद अमरीका ने कहा है कि अगर ज़रूरत पड़ी तो वो और हमलों के लिए तैयार है.

अमरीकी अधिकारियों ने कहा है कि मंगलवार को रासायनिक हमला लॉन्च करने के लिए जिस सैनय अड्डे का इस्तेमाल किया गया था, अमरीका ने इसी अड्डे पर बम बरसाए हैं.

उधर, संयुक्त राष्ट्र ने मौजूदा स्थिति बिगड़ने की चेतावनी दी है, जबकि रूस और सीरिया ने इसकी आलोचना की है.

सीरिया के सहयोगी देश रूस ने कहा है कि अमरीका 'अपनी एकतरफा कार्रवाई से चरमपंथियों को बढ़ावा' दे रहा है.

अमरीकी विदेश मंत्री रेक्स टिलरसन ने कहा है, "रूस की प्रतिक्रिया से मैं निराश हूं." हालांकि उन्होंने कहा कि इस प्रतिक्रिया से उन्हें हैरानी नहीं हुई है.

रूस ने सीरिया के एंटी क्राफ़्ट सुरक्षा तंत्र को मजबूत करने का वादा किया है.

इस हमले से आख़िर अमरीका को क्या हासिल हुआ?

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अमरीका और रूस के रिश्तों पर असर?

इस हमले से सीरिया के ज़मीनी हालात में कोई बदलाव नहीं आया है बल्कि एक समाचार एजेंसी के मुताबिक़, जिस हवाई पट्टी पर बमबारी हुई है, उससे आज ही लड़ाकू विमानों ने उड़ान भरी है.

इससे रूस के साथ अमरीका के तनाव में खासा इजाफ़ा हो गया है. संयुक्त राष्ट्र में रूस और अमरीका ने खुलकर एक दूसरे के ख़िलाफ़ बयानबाज़ी की है.

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Image caption सीरिया की वो हवाई पट्टी जिस पर अमरीका ने हमला किया था

चरमपंथी गुटों पर कार्रवाई के लिए रूस और अमरीका के बीच हवाई हमलों के दौरान किसी दुर्घटना से बचने के लिए जानकारी साझा करने के समझौते को रूस ने रद्द कर दिया है.

दोनों देशों के बीच रिश्तों की दिशा क्या होगी, इसका अंदाज़ा अगले हफ़्ते लग पाएगा जब अमरीकी विदेश मंत्री रूस पहुंचेंगे.

ट्रंप को फायदा

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Image caption संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की बैठक में सीरिया पर रणनीति की चर्चा हो रही है.

इस कार्रवाई से अमरीकी राष्ट्रपति को फायदा पहुंचा है. अमरीकी कांग्रेस में रिपब्लिकन और डेमोक्रेट दोनों पार्टियों के सदस्यों ने इस कार्रवाई का समर्थन किया है.

हालांकि कुछ सदस्यों ने इसका विरोध भी किया. लेकिन ट्रंप की टीम इसे एक ठोस कारगर विदेश नीति के रूप में पेश किया है, जिसमें कमांडर इन चीफ़ मुश्किल फैसलों से पीछे नहीं हटते.

इस हमले से चीन के राष्ट्रपति के अमरीकी दौरे को एक तरह से फीका कर दिया है, जोकि माना जा रहा है कि ये कार्रवाई चीन को काफी नागवार गुजरी होगी.

इसे एक दूसरे को जानने समझने के दौरे की तरह पेश किया जा रहा है. हालांकि सार्वजनिक रूप से दोनों के देशों के राष्ट्रपतियों ने जितना संभव था, गर्मजोशी दिखाई.

अहम मुद्दों पर नहीं बनी बात

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ट्रंप ने अपने चुनावी अभियान में चीन पर काफी निशाना साधा था, इसलिए भी चीनी राष्ट्रपति का यह दौरा काफी अहम माना जा रहा था.

व्यापार, उत्तर कोरिया, साउथ चाइना सी जैसे मुद्दों पर कोई प्रगति नहीं हुई और इसे ट्रंप के चीन के दौरे के लिए टाला दिया गया.

चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने ट्रंप को चीन आने का न्यौता दिया था जिसे उन्होंने स्वीकार कर लिया है.

दोनों देशों के बीच 'हंड्रेड डेज़' कार्यक्रम पर सहमति बनी है, जिसका मक़सद है आपसी व्यापार के मसलों को सुलझाना, अमरीकी निर्यात को बढ़ावा देना ताकि चीन के साथ अमरीका का व्यापार घाटा कम हो सके.

हालांकि इसी दौरान एक बार फिर अमरीका ने दुहराया है कि अगर चीन नहीं तैयार होता है तो वो अकेले ही उत्तर कोरिया पर कार्रवाई करेगा.

शी जिनपिंग का ये दौरा इसलिए भी याद रखा जाएगा क्योंकि उनकी यात्रा के दौरान अमरीका ने सीरिया पर बमबारी की है.

कट्टर ट्रंप समर्थक भी नाराज़

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सीरिया की बमबारी को लेकर एक बड़ी बात ये आई है कि ट्रंप के कट्टर समर्थकों में से कुछ ने इस कार्रवाई की आलोचना की है.

उनका कहना है कि हमने उनको इसके लिए वोट नहीं दिया था, हमने उन्हें अमरीका फ़र्स्ट के वादे की वजह से वोट दिया था, जिसमें उन्होंने कहा था कि वो अमरीकी लोगों की ज़िंदगियां बेहतर करेंगे, उनके लिए नौकरियों के अवसर पैदा करेंगे.

उनके अनुसार, मध्यपूर्व में फौजी दख़लंदाजडी की ट्रंप तो आलोचना किया करते थे, इसके लिए उन्होंने ओबामा की भी काफी आलोचना की थी कि वो उन देशों में क्यों घुसने की कोशिश कर रहे हैं, जिनसे हमारा कोई सीधा लेना देना नहीं है.

ये लोग इसे ट्रंप की नीति में एक बड़े बदलाव की तरह देख रहे हैं और इससे ट्रंप के कट्टर समर्थकों में एक नाराज़गी नज़र आई है.

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