'....तो अमरीका ही नहीं जाता विक्रम'

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"वो दुनिया घूमना चाहता था, उसने कहा था कि वो कुछ महीनों में ही घर वापस आ जाएगा, अगर मेरे विक्रम जैसे बच्चों को देश में ही अच्छी सेलरी मिलने लगे तो...?"

ये शब्द हैं अपने 26 साल के बेटे की मौत की पीड़ा झेल रहे पुरुषोत्तम जारयाल के.

मर्चेंट नेवी में नौकरी छोड़कर टूरिस्ट वीज़ा पर अमरीका की यात्रा कर रहे विक्रम जारयाल को बीते 6 अप्रैल को वॉशिंगटन के याकिमा में लुटेरों ने गोली मार दी थी.

वो पंजाब के होशियारपुर में जांधवाल गांव के रहने वाले थे.

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वापस आना था

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विक्रम के भाई इंदरजीत जारयाल कहते हैं कि उन्हें शाम 8 बजे सूचना मिली कि उनके भाई को गोली को मार दी गई है.

वे कहते हैं कि ये ख़बर मिलते ही उन्होंने इंटरनेट चेक किया तो कुछ जानने वाले लोगों ने भी इस बुरी ख़बर को सच बताया. इसके बाद परिवारवालों ने विदेश मंत्री सुषमा स्वराज को ट्वीट किया.

पूर्व सैनिक पुरुषोत्तम जारयाल बताते हैं कि विक्रम ने अमरीका जाने से पहले उन्हें विस्तार से अपने प्लान के बारे में बताया था.

वे कहते हैं कि विक्रम ने कहा था कि वह बस कुछ महीनों के लिए जा रहा है और फिर वापस आ जाएगा.

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विक्रम के पिता पुरुषोत्तम जारयाल ने कहा, "उसे खेती-किसानी पसंद नहीं थी, वो बस अपने में ही रहता था. बच्चे अपने दोस्तों को विदेशों से अपने घरों में डॉलर भेजते हुए देखते हैं और उनकी तरह पैसे कमाने की सोचते हैं."

"बच्चे मां-बाप के बुढ़ापे की लाठी होते हैं लेकिन अगर वे पहले ही मर जाएं तो क्या हो? अगर विक्रम जैसे बच्चों को हमारे देश में ही अच्छी सेलरी मिल जाए तो वे कभी विदेश न जाएं."

विक्रम के भाई करन सिंह कहते हैं कि 'विक्रम ने लुटेरों को सब कुछ दे दिया था फिर भी उन्होंने विक्रम को गोली मार दी.'

वे कहते हैं कि 'ये नफरत से जुड़े अपराध का मामला है. मर्चेंट नेवी छोड़ने के बाद उसने अमरीका जाने की इच्छा जताई थी और टूरिस्ट वीज़ा के लिए आवेदन भी किया था.'

सरकार बंद करे ब्रेन ड्रेन

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पीड़ित परिवार के मुताबिक़, ये कुछ नहीं बस ब्रेन ड्रेन है, पढ़े-लिखे लोगों को यहां पर ठीक सेलरी नहीं मिलती, इसलिए वे बाहर जाते हैं.

उनका कहना है, "अगर हमारी सरकार इनका मूल्य समझे तो ऐसा न हो."

पीड़ित परिवार का कहना है कि सरकार को जल्द से जल्द उनके बेटे के पार्थिव शरीर को उनके गांव तक पहुंचाने का बंदोबस्त करना चाहिए.

देश में पर्याप्त अवसर उपलब्ध कराए ताकि बच्चे अच्छी सेलरी के लिए विदेशों का रुख़ न करें.

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