अकेले चीन में बाकी देशों के बराबर हुई फांसी

  • 15 अप्रैल 2017
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Image caption मानवाधिकार कार्यकर्ता लंबे समय से फांसी की सज़ा ख़त्म किए जाने की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं

मानवाधिकार संगठन एमनेस्टी इंटरनेशनल ने कहा है कि चीन में पिछले साल जितने लोगों को मौत की सज़ा दी गई उनकी संख्या दुनिया भर के देशों में दी गई मौत की सज़ा के बराबर है.

संगठन का कहना है कि चीन को छोड़कर दुनिया के बाकी देशों में 1,032 लोगों को फांसी दी गई थी.

एमनेस्टी के अनुसार, 2016 में दुनियाभर में फांसी दिए जाने के मामले में, पिछले साल के 1,634 के मुकाबले, 37 प्रतिशत कमी दर्ज की गई है.

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यह कमी मुख्य रूप से पाकिस्तान और ईरान में फांसी दिए जाने के मामलों में कमी आने के कारण है.

हालांकि, इसके बावजूद दोनों देश एमनेस्टी की सूची में शीर्ष पांच में बने हुए हैं.

संगठन का मानना है कि चीन ने बाकी देशों में सज़ा-ए-मौत की कुल संख्या के बराबर फांसी की सज़ा दी है, हालांकि विश्वसनीय आंकड़ों की कमी के कारण चीन के आंकड़े शामिल नहीं किए गए हैं.

साल 2006 के बाद पहली बार अमरीका शीर्ष पांच देशों में शामिल नहीं है.

पाकिस्तान में फांसी के मामलों में काफ़ी गिरावट दर्ज की गई. 2015 में 326 मामलों के मुक़ाबले 2016 में 87 मामले ही दर्ज किए गए.

Image caption भारत में फांसी की सज़ा की स्थिति

मध्यपूर्व और उत्तरी अफ़्रीका में कुल फांसी में 28 प्रतिशत की कमी आई है.

जबकि नाइजीरिया में ऐसे मामलों में बढ़ोत्तरी की वजह से सहारा के पास के अफ़्रीकी देशों में 145 प्रतिशत की वृद्धि हुई है.

दूसरी तरफ, दुनिया के 104 देशों ने अपने यहां क़ानूनी और व्यावहारिक रूस से मौत की सज़ा ख़त्म कर दी है, जबकि 1997 में ऐसे देशों की संख्या 64 थी.

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