'पाकिस्तान जैसे क़ानून-परस्त देश की आलोचना शोभा नहीं देती'

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भारतीय नागरिक कुलभूषण को पाकिस्तान में मिली मौत की सज़ा पर पाकिस्तान मीडिया में भी ख़ासा कवरेज हो रहा है.

कुलभूषण को जासूसी के आरोप में ये सज़ा सुनाई गई है.

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कुलभूषण पर आरोप लगाया गया है कि जासूसी के अलावा पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर के बलूचिस्तान में उन्होंने गड़बड़ियां फैलाने की कोशिश भी की.

उन्हें मार्च 2016 में गिरफ़्तार किया गया था और 10 अप्रैल 2017 को एक सैन्य अदालत ने उन्हें मौत की सज़ा सुनाई.

'रॉ ने पाकिस्तान भेजा था'

पाकिस्तान मीडिया के मुताबिक़, "जाधव ने अपने जुर्म का इक़बाल किया है कि उन्हें भारतीय ख़ुफ़िया एजेंसी रॉ ने साज़िश के लिए पाकिस्तान भेजा था ताकि वो कराची के साथ-साथ बलूचिस्तान में षडयंत्र कर सकें."

पाकिस्तानी अख़बार वहां के रक्षा मंत्री ख़्वाजा आसिफ़ के इस बयान को प्रमुखता से छाप रहे हैं जिसमें उन्होंने कहा, "जाधव को मिली सज़ा उन लोगों के लिए चेतावनी है जो पाकिस्तान के ख़िलाफ़ साज़िश कर रहे हैं."

ख़्वाजा आसिफ़ ने भारत पर आरोप लगाया कि वो 'कश्मीर में बेगुनाह लोगों की पूर्व नियोजित हत्या कर रहा है.'

'पाकिस्तान क़ानून-परस्त देश'

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एक्सप्रेस ट्रिब्यून जैसे अख़बारों ने जाधव के बारे में लिखा कि उन्होंने ख़ुद अपने जुर्म का इक़बाल किया है.

इंग्लिश डेली 'द नेशन' ने लिखा, "इस फ़ैसले के बाद पाकिस्तान जैसे क़ानून-परस्त देश की अंधी आलोचना करना भारत को शोभा नहीं देती. भारत ने ख़ुद कभी ये बात नहीं नकारी कि भारत उसका नागरिक है. लोग बहस कर सकते हैं कि इसके बाद दोनों देशों के बीच शांति प्रक्रिया पर असर पड़ेगा. लेकिन सच ये है कि ऐसी कोई शांति प्रक्रिया चल ही नहीं रही है."

जिहादी मूवमेंट के प्रति नरमी रखने वाला अख़बार औसफ़ कहता है, "सज़ा मुकम्मल करने में अब ज़रा भी देरी नहीं होनी चाहिए. किसी भी तरह के अंदरूनी या बाहरी दबाव में नहीं आना चाहिए."

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