ट्रंप अरब देशों के चहेते अमरीकी राष्ट्रपति

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अबु-इवांका-अल-अमरीकी...यानि 'इवांका के पिता, अमरीकी'.

अरब देशों में अमरीका के नए राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप को इस नाम से जाना जा रहा है.

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राष्ट्रपति चुनाव के दौरान अरब देशों में ट्रंप की छवि मुस्लिम और महिला विरोधी नेता के रूप में थी. वह आम लोगों के बीच मज़ाक के पात्र थे.

लेकिन अब अरबी लोगों के बीच उनकी छवि बदलती दिख रही है. वे साल 1991 में कुवैत को इराक से आज़ादी दिलाने वाले पूर्व अमरीकी राष्ट्रपति जॉर्ज एच डब्ल्यू बुश जैसी लोकप्रियता पा रहे हैं.

छवि में परिवर्तन

सवाल ये है कि आख़िर ऐसा क्या हुआ कि ट्रंप की छवि में ऐसा परिवर्तन देखने को मिल रहा है और अरब देशों की नज़र में ट्रंप के लिए प्यार का भाव कब तक रहेगा?

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Image caption काहिरा भाषण में ओबामा ने कल्पना की थी कि मुस्लिम और पश्चिमी देशों में लोकतंत्र में विश्वास करने वाले साथ काम करेंगे.

अमरीका के पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा के प्रति अरब देशों में राय जानने की कोशिश करें तो कई लोग उनसे निराश मिलेंगे. ये निराशा ख़ासकर मध्य पूर्व के संबंध में उनकी नीतियों को लेकर है.

ओबामा के प्रति निराशा के भाव की शुरुआत साल 2009 में काहिरा में दिए उनके भाषण 'एक नई शुरुआत' से हुई.

इस भाषण के बाद अमरीका और अरब देशों के बीच दोस्ती का एक नया अध्याय शुरू होना था. अरब देशों ने ओबामा प्रशासन से बहुत ज्यादा उम्मीद लगा रखी थी जो जल्द ही निराशा में बदलने लगीं.

इसके बाद अरब दुनिया ने सीरियाई युद्ध को हाथ से निकलते देखा.

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लेकिन ओबामा के प्रति लोगों का भरोसा तब टूटा जब दमिश्क के बाहर आम नागरिकों पर रसायनिक हथियारों से हमला किया गया. इसके साथ ही इसराइल-फिलिस्तीन शांति वार्ता भी आगे नहीं बढ़ी.

अरब लोगों के लिए इस सबसे ज्यादा निराशाजनक ईरान के प्रति नर्म व्यवहार था. इससे एक शक पैदा हुआ कि अमरीका अरब देशों के साथ अपने जुड़ाव को कम करने की कोशिश कर रहा था.

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Image caption सीरिया पर क्रूज मिसाइल हमले का अरब देशों में स्वागत किया गया

गल्फ रिसर्च सेंटर में सुरक्षा एवं रक्षा विभाग के निदेशक मुस्तफा अलानी कहते हैं कि अरब देशों की सड़कों पर भी लोग ओबामा से निराश हो चुके थे.

वे कहते हैं, "ओबामा कार्यकाल के दौरान हमनें इस्लामिक स्टेट को उभरते हुए देखा और मध्य-पूर्व क्षेत्र में रूस के प्रवेश के साथ ईरान को तेज़ गति से होते प्रसार करते देखा.

ट्रंप का आगाज शानदार

ट्रंप ने राष्ट्रपति पद संभालते ही कई मुस्लिम बहुसंख्यक देशों के यात्रियों को प्रतिबंधित कर दिया. इन देशों ने कभी भी अमरीका पर हमला नहीं किया था.

लेकिन इन प्रतिबंधों को अरब देशों ने अनदेखा कर दिया. ऐसा ट्रंप का सीरिया के प्रति व्यवहार देखने के बाद हुआ है.

सोशल मीडिया पर बीते दिनों एक हैशटेग 'वी लव यू ट्रंप' यानी 'ट्रंप हम तुम्हें प्यार करते हैं' ट्रेंड कर रहा था.

लोगों को ये पसंद आ रहा है कि ट्रंप दृढ़ निश्चय के साथ कार्रवाई करते हैं. वहीं, ओबामा को इस क्षेत्र में कमजोर, निर्णय लेने में कमजोर और मध्य पूर्व के प्रति बेपरवाही भरे व्यवहार के लिए जाना जाता था .

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अरब देशों में सत्ता के केंद्रों में व्हाइट हाउस में एक नई टीम को राहत की नजर से देखा जा रहा है.

मिस्र के राष्ट्रपति अब्दुल फतह अल-सीसि का हालिया अमरीकी यात्रा पर शानदार स्वागत किया गया. ट्रंप की ओर से तारीफ तो मिली लेकिन मिस्र में राष्ट्रीय सुरक्षा के नाम पर मानवाधिकार उल्लंघन के मामलों पर बेहद कम बात हुई.

यमन में ओबामा प्रशासन सऊदी हवाई हमलों में मासूम नागरिकों के हताहत होने से इतना नाराज हुआ कि हूती विद्रोहियों से लड़ने के लिए सऊदी अरब को सैन्य सहयोग देने से इनकार कर दिया.

ट्रंप ने ओबामा के इस फैसले को निरस्त कर दिया है.

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Image caption मिस्र के राष्ट्रपति अब्दुल-अल-फतह-सीसि के साथ अमरीकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप

ओबामा प्रशासन को सऊदी अरब और बहरीन के मानवाधिकार उल्लंघन मामलों के लेकर बेहद चिंता थी. लेकिन ट्रंप ने इन देशों के साथ संबंधों को प्रगाढ़ किया है.

साल के शुरुआत में ट्रंप द्वारा नियुक्त किए गए सीआईए डायरेक्टर माइक पॉम्पेओ का दोनों देशों में बेहतरीन स्वागत हुआ.

इरान के मामले में मिस्र, जॉर्डन और खाड़ी देशों में डर था कि ओबामा प्रशासन न्यूक्लियर डील के चलते ईरान के प्रसारवाद की अनदेखी कर रहा है. ट्रंप प्रशासन ने ईरान के खिलाफ अपना पुराना नफरत से भरा राग अलाप कर इन देशों को राहत दी है.

लेकिन ट्रंप को अभी भी पूरी स्वीकार्यता नहीं मिली है.

ट्रंप के मुस्लिम विरोधी नीतियों का विरोध

अबु-धाबी के अख़बार 'द नेशनल' में अरब अमरीकी संस्थान के अध्यक्ष ट्रंप के मुस्लिम विरोधी मत और नीतियों की आलोचना करते हैं जिनकी वजह से इस्लामिक स्टेट, अल-कायदा और ईरान सरकार को फ़ायदा हो रहा है.

वे लिखते हैं कि अरब देशों को एक ऐसे अमरीकी पार्टनर की जरूरत थी जो उनके साथ काम करे ताकि इस क्षेत्र में स्थिरता आ सके.

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Image caption इसराइल के प्रति ट्रंप के रुख से फिलिस्तीन में उनके ख़िलाफ़ गुस्सा भड़क उठा है.

अलानी ने बीबीसी से बात करते हुए कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप को सीरिया में मिसाइल हमले के बाद अरब देशों में लोकप्रियता मिल रही है.

लेकिन इस क्षेत्र में अभी भी उनकी योजनाओं को लेकर अनिश्चितता का माहौल और अरब देशों के नेता जानना चाहते हैं अमरीकी समर्थन के बदले में ट्रंप क्या चाहेंगे.

अलानी पूछते हैं, "वो अपने समर्थन के बदले में हमसे क्या चाहेंगे, क्या ये धन होगा या सैन्य कार्रवाइयों में सक्रिय योगदान?"

इसके साथ ही अलानी कहते हैं, "हम इस क्षेत्र के लिए अमरीका के साथ सयुंक्त लक्ष्यों के लिए तैयार हो सकते हैं लेकिन इन लक्ष्यों तक पहुंचने के तरीकों पर मतभेद हो सकते हैं"

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