जहां गरीबी की ग़र्द से निकलते हैं इंटरनेशनल फ़ुटबॉलर

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Image caption अजेगुनला से निकलने वाले खिलाड़ी तरिबो बेस्ट

नाइजीरिया के लागोस शहर की सबसे ख़तरनाक जगह मानी जाने वाली झुग्गी बस्ती अजेगुनला इस अफ़्रीकी देश के लिए बेहतरीन फ़ुटबॉलर देने के लिए भी मशहूर है.

वैसे नाइजीरिया में जिस क़दर फुटबॉल के लिए दीवानगी है , उससे तो कई शहरों से फुटबॉल खिलाड़ी आने चाहिए लेकिन अजेगुनला की गरीबी, तंगहाली और तमाम अन्य दुश्वारियों से जूझते स्लम की ज़िंदगी से लगातार विश्व स्तर के फुटबॉलर निकल रहे हैं.

अजेगुनला की तंग गलियों से निकलने वाले शीर्ष फुटबॉलरों में तरीबो वेस्ट, ओडियन इघालो, ब्राउन आईडेये, सैम्सन सियासिया, ओबेफेमी मार्टिंस और जोनाथन अकपोबोरी शामिल हैं.

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लेकिन इन और इन जैसे हजारों अन्य खिलाड़ियों को जोड़ने वाली चीज़ है इस स्लम की ज़िंदगी. पानी और बिजली जैसी रोज़मर्रा की समस्याओं से जूझते हुए इन लड़कों को आपराधिक तत्वों से भी जूझना पड़ता है.

विविधता बनी ताकत

फिर, ऐसी क्या बात है कि इन झुग्गियों से शानदार फुटबॉल खिलाड़ी निकेलते हैं?

अजेगुनला में जर्मन क्लब में फुटबॉल स्काउट के रूप में कार्यरत बेनेडिक्ट इहिनेम्बा कहते हैं, " झुग्गियों में कई नस्लों के लोग रहते हैं, नाइजीरिया की इग्बोस, हाउसास, इत्सेकिरीस और अन्य सभी आदिवासी जातियां यहां रहती हैं. ये नाइजीरिया का टैलेंट हब है. ''

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Image caption नाइजीरिया के फॉरवर्ड जोनाथन अकपोबोरी भी अजेगुनला से निकले हैं

यहां से निकलने वाले तमाम बड़े फुटबॉल खिलाड़ियों की सफलता में यहां की दो संस्थाओ का योगदान है. ये सेंट मैरी कैथोलिक चर्च और नेवी बैरेक्स कैंप हैं.

ये दोनों संस्थाएं बच्चों के खेलने के लिए मैदानों को सुरक्षित रखती हैं. अन्य मैदान और खाली जगहों पर एरिया ब्वॉएज़ नाम के स्थानीय आपराधिक तत्वों का कब्जा रहता है. ये तत्व बच्चों से इन मैदानों पर खेलने के लिए पैसे लेते हैं.

खेल बस खेल नहीं

1990 में जर्मनी में नाम कमाने वाले सुपर ईगल टीम के स्ट्राइकर जोनाथन एकपोबोरी ने भी अपने खेल को अजेगुनला के मैदानों पर तराशा है. वे कहते हैं कि असल में ये स्लम बस्ती नाइजीरिया में फुटबॉल का घर है और नौजवान लड़के और बच्चे अपनी तंगहाली भरी जिंदगी से बाहर निकलने के लिए खेल को एक रास्ते की तरह देखते हैं.

एकपोबोरी कहते हैं, "मैं फुटबॉल खिलाड़ियों की सफलता को उनकी गरीबी से जोड़कर इस क्षेत्र को नीचा नहीं दिखाना चाहता लेकिन बच्चों के पास करने को कुछ नहीं हैं, ऐसे में वे अपना ज्यादातर समय फुटबॉल खेलकर बिताते हैं. ऐसा करते-करते उनके खेल में निखार आ जाता है."

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राष्ट्रीय टीम में हमेशा एक खिलाड़ी अजेगुनला का रहने वाला होता है.

एकपोबोरी कहते हैं कि मेरी शुरुआत भी ऐसे ही हुई थी, बड़े लोग पहले खेलते हैं, हम उन्हें खेलते हुए देखते हैं, इसके बाद हम मैदान में उतरते हैं, वो हमारे लिए प्रेरणास्रोत थे.

फुटबॉल के इश्क से जिंदा हैं अजेगुनला के लोग

स्लम में काबिल बच्चों के लिए लोकल क्लबों में खेलने के लिए भी व्यवस्था की गई है.

स्विटजरलैंड की फुटबॉल लीग से जुड़ा व्यवसाय करने वाले अल्फ्रेड के मुताबिक, "यहां के लोग फुटबॉल के प्रति दीवाने हैं और म्यूज़िक से लेकर टैक्सी चलाने तक हर चीज़ में सफल होना चाहते हैं."

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चीन सुपर लीग से जुड़े ओडियन इघालो अब दुनिया के सबसे बड़े शहरों में रहते हैं और कहते हैं, "वहां का जीवन कठिन था. यूरोप की तरह नहीं था जहां आपको हर चीज मिली हुई है. आपको फुटबॉल के जूतों, जर्सी, पीने के पानी और ट्रांसपोर्ट के लिए पैसों का बंदोबस्त करना होता है. अगर आप ट्रांसपोर्ट के लिए पैसों का बंदोबस्त नहीं कर सकते हैं तो आप वहीं रुकते हैं और जो रुकते हैं वो महान खिलाड़ी बन जाते हैं"

बोलारिन्वा ओलाजिडे लागोस से चलने वाले रेडियो स्टेशन के लिए खेल पत्रकार के रूप में काम करते हैं.

वे कहते हैं, ''हम कई निराश खिलाड़ियों को देखते हैं जो जानते हैं कि उनमें प्रतिभा है लेकिन वे इस प्रतिभा को कहीं दिखा नहीं सकते. क्योंकि वे एक फुटबॉल अकादमी में खेलने के लिए पैसों का बंदोबस्त नहीं कर सकते. ऐसे बच्चे अजेगुनला जाकर खेलते हैं क्योंकि वे जानते हैं कि चयनकर्ता वहां उभरते हुए खिलाड़ियों का खेल देखने आते हैं. ''

Image caption अजेगुनला में बच्चों को फुटबॉल खेलने के लिए सुरक्षित स्थानों की जरूरत होती है

नाइजीरियाई मिड-फील्डर विलफ्रेड एनदीदी अजेगुनला में पैदा नहीं हुए लेकिन वो अपने अकादमी के दिनों में स्लम के लड़कों के खिलाफ खेले जरूर हैं.

उन्हें लगता है कि अजेगुनला ने कई बेहतरीन फुटबॉल खिलाड़ी दिए हैं क्योंकि इस झुग्गी बस्ती में रहने वाले लड़के बेहद कड़ी मेहनत करते हैं ताकि इस कठिन जिंदगी से छुटकारा पा सकें .

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