पनामा लीक्स: फ़ैसले से शरीफ़ खेमे में जश्न, विपक्ष ने कहा ज़्यादा ख़ुश ना हों

  • 21 अप्रैल 2017
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पाकिस्तान में बहुचर्चित पनामा लीक्स मामले में सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले के बाद प्रधानमंत्री नवाज़ शरीफ़ के कैंप में जश्न का माहौल है.

अदालत ने अपने फ़ैसले में कहा है कि प्रधानमंत्री नवाज़ शरीफ़ को पद के अयोग्य ठहराने के लिए पर्याप्त साक्ष्य नहीं हैं लेकिन साथ मामले की आगे जांच के लिए ज्वाइंट इनवेस्टिंगेशन टीम के गठन का आदेश दिया.

नवाज़ शरीफ़, परिवार पर भ्रष्टाचार के आरोपों की विस्तृत जांच होगी- पाक सुप्रीम कोर्ट

सोशल मीडिया पर लोगों ने कहा, एक नंबर से पास हुए नवाज़ शरीफ़

नवाझ़ शरीफ़ खेमा इसे अपनी जीत बता रहा है तो वहीं पाकिस्तानी मीडिया ने फ़ैसले की समीक्षा करते हुए कहा कि नवाज़ शरीफ़ को ज़्यादा ख़ुश होने की ज़रूरत नहीं है क्योंकि वो आगे फंस सकते हैं.

विशेषज्ञों का मानना है कि फ़ौरी तौर पर शरीफ़ को भले ही राहत मिल गई हो लेकिन केस अभी ख़त्म नहीं हुआ है.

नवाज़ शरीफ़ के परिवार पर आरोप है कि उनके कई विदेशी कंपनियों से लिंक हैं और उन्होंने ग़लत तरीके से फ़ायदा लिया है.,

शरीफ़ की पार्टी, पाकिस्तान मुस्लिम लीग (नवाज़) ख़ुश है पार्टी अपना कार्यकाल (2018 तक) पूरा कर पाएगी.

ट्विटर पर छाया 'फ़ैसला'

पाकिस्तान में ये मुद्दा सोशल मीडिया पर छाया रहा और इस केस से संबधित कई हैशटैग जैसे पनामा केस, सुप्रीम कोर्ट टॉप ट्रेंडिंग टॉपिक रहे.

फ़ैसले के बाद नवाज़ शरीफ़ की बेटी मरियम नवाज़ ने एक फ़ोटो ट्वीट की जिसमें शरीफ़ परिवार और पीएमएल (एन) के सदस्य जश्न मनाते दिख रहे हैं.

सरकारी रेडियो पाकिस्तान ने ट्वीट किया, "कोर्ट के आदेश के बाद पीएम नवाज़ शरीफ़ के उस क़दम पर मुहर लग गई जिसमें वो जेआईटी के गठन की बात कर रहे थे."

सुप्रीम कोर्ट की पांच सदस्यीय बेंच में से दो जजों ने प्रधानमंत्री नवाज़ शरीफ़ के ख़िलाफ़ फ़ैसला सुनाया जबकि तीन जजों ने आगे जांच करने का आदेश दिया.

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Image caption अपने समर्थकों के साथ तहरीक-ए-इंसाफ़ पार्टी के इमरान ख़ान

इमरान ख़ान की तहरीक-ए-इंसाफ़ पार्टी इस केस में नवाज़ शरीफ़ के ख़िलाफ़ मुख्य याचिकाकर्ता थी. पार्टी के असद उमर ने कहा, "नवाज़ शरीफ़ को क्लीन चिट कहां मिली. तीन जजों ने उनके बचाव को खारिज कर दिया और जेआईटी के गठन का आदेश दिया."

पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी की शेरी रहमान ने अपनी ही पार्टी के सदस्य सईद गनी के एक ट्वीट को रीट्वीट किया जिसमें उन्होंने लिखा था, "साबित हो गया कि अदालत के पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी और दूसरों के लिए अलग-अलग मानदंड हैं. जेआईटी के बजाय जांच के लिए एक मज़बूत न्यायिक आयोग बनाना चाहिए था."

सईद गनी ने साल 2012 में तत्कालीन प्रधान मंत्री पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी के यूसुफ़ रज़ा गिलानी की बर्खास्तगी का ज़िक्र किया. गिलानी, सुप्रीम कोर्ट की अवमानना के दोषी पाए गए थे.

मीडिया की प्रतिक्रिया

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Image caption पाकिस्तान मुस्लिम लीग (नवाज़) के कार्यकर्ता जश्न मनाते हुए

वरिष्ठ पत्रकार कासिफ़ अब्बासी ने उर्दू चैनल 'एआरवाई न्यूज़' में कहा, "पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज़ को समझना चाहिए कि इसमें ख़ुश होने वाली बात है ही नहीं. दो जजों ने उनके ख़िलाफ़ मत दिया जबकि बाक़ी तीन ने भी उन्हें कोई क्लीन चिट नहीं दी है."

निजी टीवी चैनल 'बोल' में इसके सीईओ फ़ैसल अज़ीज़ ख़ान ने कहा, "ज्वाइंट इनवेस्टीगेशन टीम, अपराधियों की जांच करती है. इसलिए नवाज़ शरीफ़ की हैसियत क्या है ये उन्हें समझ जाना चाहिए. वो मुश्किल में हैं."

तो वहीं पत्रकार आमिर हुसैन ने भी उसी चैनल में कहा, "अदालत ने इस मामले में एक तरह से देश को दिशा दी है. कोर्ट ने कहा है कि मामला पूरी तरह से साफ़ नहीं है और इसमें आगे जांच की ज़रूरत है. इसलिए नवाज़ शरीफ़ को आत्मविश्लेषण करना चाहिए ना कि जश्न मनाना चाहिए."

एक और विशेषज्ञ मुनीज़े जहांगीर ने निजी टीवी चैनल 'आज' में कहा, "60 दिनों में ये केस ख़त्म नहीं होगा बल्कि 60 दिनों में ये केस नया मोड़ लेगा जब जेआईटी अपनी रिपोर्ट सौंपेगी."

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