ब्लॉग: '64 की उम्र में भी इमरान खान नहीं समझे सियासी खेल'

इमरान ख़ान और नवाज़ शरीफ़ इमेज कॉपीरइट Getty Images

हो सकता है कि भारत में मनोरंजन के पायदान पर पहले बॉलीवुड और फिर राजनीतिक नाटक आते हों, मगर हमारे पाकिस्तान में फ़िल्म तो बनती नहीं, इसलिए मनोरंजन के पायदान पर एक से 10 तक राजनेता और उनकी नीतियां ही कथक करती रही हैं.

एक एक्ट पूरा होता नहीं कि दूसरे का पर्दा खुल जाता और हर बार नया खेल, नया सीन, नए एक्टर्स और ताज़ा कहानी के साथ.

कल तक सब मान रहे थे कि पनामा घोटाले में जो सुप्रीम कोर्ट कहेगा, वही माना जाएगा.

अब सुप्रीम कोर्ट ने कह दिया है कि इस घोटाले में प्रधानमंत्री की गर्दन में जो रस्सा डालना है, वो छोटा है और कोई लंबा रस्सा लाया जाए.

इसके लिए अदालत ने एक ज्वॉइंट इन्वेस्टिगेशन टीम भी बना दी है. मगर जो सुप्रीम कोर्ट पर अंधा भरोसा कर मुकदमा वहाँ लेकर गए थे, यानी इमरान ख़ान, वो अब ये कह रहे हैं कि अगर कोर्ट ने नवाज़ शरीफ़ के गले में रस्सा न डाला, तो हम डाल देंगे.

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नवाज़ शरीफ

इमरान ख़ान ने कहा कि हम नवाज़ शरीफ़ को शर्म दिलाएंगे, उन पर नैतिक दबाव बढ़ाएंगे और मजबूर करेंगे कि जब तक जाँच पूरी नहीं हो जाती, तब तक वो प्रधानमंत्री का पद छोड़कर संन्यास ले लें, वर्ना सत्यानाश के लिए तैयार रहें.

अब तो मुझे यकीन हो चला है कि इमरान ख़ान ने नौजवानी में या तो क्रिकेट खेली है या फिर अमिताभ बच्चन की वो फ़िल्में देखी हैं, जिनमें बच्चन जी मज़दूर नेता बनकर खून चूसने वाले सेठ से मजदूरों को हक दिलवाते हैं.

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भारत हो या पाकिस्तान यहां सियासत भावनाओं और नियमों का नहीं टेक्निकैलिटी का खेल है.

इमरान का ख़याल है कि जिस तरह क्रिकेट में गावस्कर या विवियन रिचर्ड्स अंपायर की उंगली का इंतज़ार किए बिना विकेट छोड़कर चले जाते थे, उसी तरह नवाज़ शरीफ़ भी करेंगे.

या फिर जिस तरह फ़िल्म के आख़िर में ज़ालिम सेठ अमिताभ बच्चन की मांगें मान लिया करता था और शर्मिंदा भी होता था, वैसे ही पाकिस्तान के सबसे बड़े सेठ नवाज़ शरीफ़ भी करेंगे.

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सियासत का खेल

ऐसी बातों पर इमरान ख़ान पर प्यार न आए तो क्या आए. राजनीति में अनोखा लाडला...खेलने को मांगे चांद.

सुप्रीम कोर्ट के पाँच में से तीन जजों ने नवाज़ शरीफ़ को मुलज़िम और दो ने मुज़रिम ठहराया है. यानी, टेक्निकली नवाज़ शरीफ़ चाहें तो अपने पद पर बने रह सकते हैं और नॉन टेक्निकल इमरान ख़ान को 64 वर्ष की उम्र में भी ये नहीं पता कि भारत हो या पाकिस्तान यहां सियासत भावनाओं और नियमों का नहीं टेक्निकैलिटी का खेल है.

कहते हैं एक मिरासी गांव के चौधरी के पास अपने बेटे का रिश्ता लेकर गया. चौधरी आग बबूला हो गया और मिरासी को खूब पिटवाया और उसके कपड़े तक फाड़ डाले.

मिरासी ने उठते-उठते अपनी पगड़ी सर पर जमाते हुए पूछा....तो चौधरी साहब क्या मैं आपकी तरफ से इनकार समझूँ?

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मुझे यकीन है कि इमरान ख़ान ने ये कहानी नहीं सुनी होगी, वरना वो नवाज़ शरीफ़ को हटाने के लिए इतने उतावले नहीं होते. और मुझे ये भी यकीन है कि नवाज़ शरीफ़ ने ये कहानी बहुत बार सुनी है.

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