नेपाल: विनाशकारी भूकंप के दो साल बाद भी लाखों लोग बेघर

  • 25 अप्रैल 2017
सिन्धुपालचौक

नेपाल में 25 अप्रैल 2015 को 7.8 तीव्रता का ज़बरदस्त भूकंप आया था. संयुक्त राष्ट्र के आँकड़ों के अनुसार इसमें क़रीब 9000 लोगों की जान गई, 10 लाख घरों को नुक़सान पहुँचा और करीब 28 लाख लोग विस्थापित हुए. भूकंप के दो साल बाद भी नेपाल इसके असर से नहीं उबर सका है.

नेपाल में दो साल पहले आए भूंकप में तबाह इमारतों में आधी से ज़्यादा को दोबारा बनाने का आदेश राष्ट्रीय पुनर्निर्माण प्राधिकरण को दिया गया है.

विनाशकारी भूकंप की दूसरी बरसी पर प्राधिकरण घरों को मज़बूत और सुरक्षित बनाने के लिए नई तकनीक लेकर आया है. उसका कहना है कि ज़्यादातर इमारतों में नियमों का पालन नहीं हुआ है.

भूकंप में तबाह नेपाल में पुनर्निर्माण शुरू

इन इमारतों के लिए थीम रखा गया था - "बेहतर बना कर लौटाओ" - लेकिन जांच में पता लगा है कि इनमें बुनियादी मानदंडों का भी ख़याल नहीं रखा गया है.

निराशाजनक तस्वीर

वास्तव में भूकंप के बाद पुनर्निर्माण की जो गति है वो बेहद धीमी रही. अधिकारी मानते हैं कि करीब आठ लाख घर भूकंप में तबाह हुए. इनमें अब तक महज़ 22 हज़ार घर बनाए जा सके हैं उनमें से भी ज़्यादातर अच्छे नहीं हैं.

राष्ट्रीय पुनर्निर्माण प्राधिकरण के प्रमुख गोविंद राज पोखरेल ने बीबीसी को बताया कि बहुत से घर तय मानदंडों के मुताबिक नहीं बने हैं और अगर फिर बड़ा भूकंप आ जाए तो वो टिक नहीं पाएंगे.

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गाँवों के पुनर्निर्माण से जुड़े अंतरराष्ट्रीय दानदाता भी ऐसी ही चिंता जता रहे हैं और उन्होंने घरों को सुरक्षित बनाने के लिए सरकार से और अधिक तकनीकी सहयोग लेने का अनुरोध किया है.

भूकंप से सबसे ज़्यादा प्रभावित सिंधुपाल ज़िले में चौतारा के बाहरी इलाक़े में मौजूद फलांते गाँव में रहने वाले 63 साल के तारा बहादुर कुंवर का घर भूकंप में गिर गया.

उन्होंने मिट्टी, पत्थर और लकड़ी से इस साल जनवरी में घर बनाया. कुंवर को घर का निर्माण शुरू करने के लिए करीब 31 हज़ार रुपए की रकम मिली लेकिन मकान बनाने में करीब चार लाख रुपए लगे. कुंवर बताते हैं कि उन्हें बाकी पैसा कर्ज़ लेना पड़ा.

दूसरे कई भूकंप पीड़ितों की तरह कुंवर डेढ़ लाख रुपए की नगद सहायता की दूसरी और तीसरी किश्तें हासिल नहीं कर सके क्योंकि उनका घर उन सुरक्षा मानकों को पूरा नहीं करता था. ये मानक सुरक्षा के लिए तय किए गए थे.

कुंवर सरकार की तरफ से तकनीकी सहयोग की कमी को सुरक्षा मानकों में हुई चूक के लिए जिम्मेदार मानते हैं. वो कहते हैं, "कोई इंजीनियर हमारे गांव में नहीं आया. मैंने ये घर खुद बनाया है. आखिर मैं क्या करता?"

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कुंवर को पिछली दो सर्दियां तिरपाल की छत वाले मकान में बितानी पड़ीं, उनके साथ उनके दो पोते भी थे. वो कहते हैं, "ईंट और पत्थरों से बने मज़बूत मकान भी पिछले भूकंप में गिर गए. मैंने ये घर थोड़े से पैसे में बनाया है जो मेरे पास था और मैं खुश हूं कि अब मेरे सिर पर छत है."

नहीं मिल पा रही आर्थिक मदद

राष्ट्रीय पुनर्निर्माण प्राधिकरण के प्रमुख गोविंदा राज पोखरेल का कहना है कि सरकार वैकल्पिक उपाय लेकर आ रही है और बन चुके मकानों को भी मज़बूती देने की कोशिश हो रही है.

उन्होंने कहा, "हम गांवों में इंजीनियरों को भेजने की कोशिश में हैं. हम ये भी कोशिश कर रहे हैं कि नियमों में बदलाव कर सकें ताकि मकान बनने के बाद भी भूकंप पीड़ितों को उन्हें बेहतर बनाने के लिए पैसा मिल सके."

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पांच लाख से ज़्यादा लोगों को सहायता की पहली किश्त मिली लेकिन महज़ 14000 लोग ही अगली किश्त के लिए मंज़ूरी हासिल कर सके.

इसके लिए सरकारी इंजीनियर मकान का सर्वे करने के बाद डिज़ाइन और मानकों की पड़ताल करते हैं और संतुष्ट होने के बाद अपनी रिपोर्ट देते हैं.

अधिकारियों ने एक अभियान चलाया है जिसके तहत लोगों से बेहतर मकान बनाने का आग्रह किया जा रहा है. हालांकि इस अभियान का भी फायदा नहीं हो रहा है.

संख्या पर सवाल

नेपाल के गृह निर्माण विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि प्राधिकरण ने जो संख्या बताई है वो भी मुमकिन है कि सही नहीं हो.

तापेंद्र बहादुर खड़का नेपाल के गृहनिर्माण कार्यक्रम में परियोजना निदेशक हैं.

वो बताते हैं, "हमारे आँकड़े बताते हैं कि भूकंप पीड़ितों के करीब 18000 मकान बिना सरकार की ओर से तकनीकी सहायता के बनाए गए. इनमें से ज़्यादातर मकान मानदंडों को पूरा नहीं करते और उन्हें दोबारा से ठीक करने की ज़रूरत है."

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खड़का बताते हैं कि ज़्यादातर मकानों के खंभों का निचला हिस्सा बहुत मज़बूत नहीं है और उन्हें आपस में जोड़ने वाली बीम भी ठीक से नहीं लगाई गई है ऐसे में ये मकान भूकंप का सामना नहीं कर सकते.

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खड़का ने कहा, "हमने नए दिशानिर्देशों का प्रस्ताव रखा है ताकि समस्या का तुरंत समाधान हो सके. हम इसलिए भी चिंतित हैं क्योंकि अगर निर्माण सुरक्षित नहीं हुए तो दानदाता पैसा देना बंद कर सकते हैं."

नेपाल की सरकार ने जो आकलन किया है उसके मुताबिक भूकंप में गिरे मकानों को दोबारा बनाने के लिए करीब 9.37 अरब अमरीकी डॉलर की ज़रूरत होगी.

अधिकारियों का कहना है कि इसमें आधी से ज़्यादा रकम लोगों के घर और बस्तियों के निर्माण के लिए ज़रूरी होगी.

अंतरराष्ट्रीय सहायता

वर्ल्ड बैंक ने 55 हज़ार ग्रामीण घरों को बनाने के लिए 20 करोड़ अमरीकी डॉलर की सहायता दी है. वर्ल्ड बैंक का कहना है कि दानदाताओं की पहली प्राथमिकता है कि घर भूकंपरोधी बने.

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नेपाल में वर्ल्ड बैंक के आपदा जोखिम प्रबंधन के विशेषज्ञ अवनी मणि दीक्षित कहते हैं, "पाकिस्तान, भारत यहां तक कि इंडोनेशिया का भी अंततराष्ट्रीय अनुभव बताता है कि इमारत के मानकों का पुननिर्माण कार्यक्रम के शुरूआत में पालन बहुत कम होता है. हमें उम्मीद है कि नेपाल में जो गलतियां हुई हैं उन्हें भूकंप पीड़ितों को अतिरिक्त तकनीकी सहयोग देकर दुरूस्त किया जा सकेगा."

एशिया फाउंडेशन की एक हालिया रिपोर्ट बताती है कि भूकंप प्रभावित ज़िले में 71 फ़ीसदी लोग अब भी अस्थायी घरों में रह रहे हैं. अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने 2015 में भूकंप के बाद नेपाल के पुनर्निर्माण के लिए काठमांडू के एक सम्मेलन में 4.1 अरब डॉलर की रकम जुटाने का वचन दिया था. अंतरराष्ट्रीय दानदाताओं ने नेपाल के प्राधिकरणों के साथ 2.71 अरब डॉलर का करार किया है.

नेपाल के ख़राब प्रशासन और पांच महीने तक भारत से लगती सीमाओं पर घेराबंदी ने पुनर्निर्माण की गति को काफी धीमा कर दिया.

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