'मैं पिडोफाइल था पर इलाज से ठीक हो गया'

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जैक (बदला हुआ नाम) एक समय में पिडोफाइल थे यानी बच्चों की तरफ यौन आकर्षण की समस्या से परेशान थे. वो कैसे ठीक हुए और कैसे इस समस्या से लड़े. पढ़िए उन्हीं की ज़बानी.

पिडोफ़ाइल (बच्चों का यौन शोषण करने वाला) के तौर पर अपनी पहचान ज़ाहिर किए हुए मुझे लंबा अरसा हो चुका है.

पिडोफ़ाइल होना एक मनोविकार है, एक बेहद परेशान करने वाला यौन रुझान.

मुझे लगता है कि ये बचपन के दर्दनाक अनुभवों के कारण होता है.

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मैं साठ साल से ऊपर का हूँ, लेकिन जब मैं छोटा बच्चा था मेरी मां मुझे नहलाने के बाद पोंछने के लिए मुझे अपनी गोद में बैठाती और मेरे जननांगों को दुलराती थी.

उनका व्यवहार मुझे कभी भी कामुक नहीं लगा, लेकिन आज जब मैं पीछे मुड़कर देखता हूं तो लगता है कि बेशक़ वो कामुक था. मुझे ठीक से याद नहीं है कि कितने समय तक ऐसा हुआ लेकिन लंबे समय तक ये होता रहा. जब तक ये ख़त्म हुआ मैं खुद को नुकसान पहुंचा चुका था.

मुझे लगता है कि मेरी मां जो मेरे साथ करती थी वही छोटे लड़कों के प्रति मेरे आकर्षण की वजह थी.

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मैंने पहली बार अपनी इस असमान्यता को 15 साल की उम्र में स्वीकर किया था. ये वो वक़्त था जब मैंने महसूस किया कि मैं बाक़ी लड़कों की तरह नहीं था.

वो लोग महिलाओं में दिलचस्पी लेते थे लेकिन मेरे साथ ऐसा नहीं था. मैं अभी भी किशोर अवस्था से पहले वाले लड़कों जैसा ही था. ये बहुत भयानक था.

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मैंने कभी किसी बच्चे का शोषण नहीं करना चाहा. ये मैं दूर-दूर तक नहीं सोच सकता था.

मुझे उम्मीद थी जैसे-जैसे मैं बड़ा होऊंगा, मैं भी वयस्कों की तरह ही यौन भावनाओं वाला हो जाऊंगा. लेकिन ऐसा लग रहा था जैसे कि मेरा विकास ही रुक गया था.

ये बेहद भयानक था, मुझे लग रहा था कि मैं ख़ुद से ही विद्रोह कर रहा हूं.

मैंने महसूस किया कि मैं अकेलेपन की ओर जा रहा हूं. मुझे डर लगता था कि अगर लोगों को मेरे भयानक विचारों के बारे में पता चल गया तो हिंसा या शारीरिक हमला भी हो सकता है.

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मैं यूनिवर्सिटी गया, जहां मेरे कई दोस्त थे, और मैं कई साल अपनी मानसिक स्थिति के ख़िलाफ़ लड़ता रहा. तब तक मेरा कोई यौन अनुभव नहीं था.

जब मेरे साथ रहने वाले दोस्त ने मुझे आगाह किया तब मुझे इस हक़ीक़त का सामना करने के लिए मजबूर होना पड़ा कि मैं बदल नहीं रहा था.

मेरे दोस्त ने समझ लिया था कि जब हम बच्चों के बारे में बात करना शुरू करते हैं तो मैं विषय बदल देता था. अगर हम सड़क पर घूम रहे हों बच्चों के साथ किसी परिवार को देखते तो मैं असहज हो जाता था.

मैं सामने के कमरे में बैठा था. मेरे सारे दोस्त शाम का खाना बना रहे थे और मुझे नहीं लगता कि उन्होने महसूस किया था कि मैं सीढ़ियों के नीचे आ गया हूं. मैंने उनकी बाते सुनीं मेरा दोस्त कह रहा था, '' मुझे लगता है कि जैक को छोटे लड़कों में दिलचस्पी है."

मैंने अपना कोट पहना और चुपचाप घर से बाहर निकल गया.

उस घर के दरवाज़े से बाहर निकलना ऐसा लग रहा था जैसे किसी एक दुनिया से निकलकर दूसरी दुनिया में जा रहा हूं.

मैं अगले दिन यूनिवर्सिटी के डॉक्टर के पास गया. मैंने कहा '' मैं पिडोफ़ाइल हूं. क्या मैं ठीक हो सकता हूं?''

पिडोफ़ाइल होने को लेकर रूढ़ीवादी सोच है कि ये एक स्थिति है जिसका इलाज नहीं है. लेकिन ये डॉक्टर हंसे और कहा '' बिल्कुल ये ठीक हो सकता है."'

ये एक बहुत बड़ी राहत थी. डॉक्टर ने पिडोफ़ाइल के तौर पर मेरी पहचान को चुनौती नहीं दी, उन्होने इसे स्वीकार किया और कहा '' कोई परेशानी नहीं है, हम इसे हल कर लेंगे.''

मुझे पोर्टमैन क्लीनिक के लिए एक ख़त मिला जो असामान्य यौन व्यवहार वाले लोगों का इलाज करता था.

मैं कुछ हफ़्ते बाद जांच के लिए लंदन गया. 1972 के गर्मियों के दिन के थे और मुझे याद है हैम्पस्टेड हीथ पर चलते हुए, पेड़ों को देखते हुए, पक्षियों की आवाज़ सुनते हुए ये सोच रहा था " मैं एक नई ज़िंदगी में क़दम रख रहा हूं."

पोर्टमैन क्लीनिक के इलाज लंबी अवधि के हैं. उन लोगों ने कई साल मेरा इलाज किया.

आप उनसे खुलकर बात करें वो आपके अवचेतन में चल रहे विचारों की तस्वीर बना देते हैं.

इलाज के बाद मैं एक अलग ही इंसान था. यहां तक कि मैंने महिलाओं में यौन रुचि भी विकसित की.

अपनी किशोरावस्था का अनुभव मैंने अपने दोस्तों के मुक़ाबले कई सालों बाद किया था. मेरा यौन अनुभव बहुत कम था. ख़ुद से नफ़रत करने की वजह से मेरी दोस्तियाँ ख़त्म सी हो गई थीं और मुझमें आत्मसम्मान की भारी कमी थी.

अब मेरे पास एक अच्छा रिश्ता है और मैं लंबे समय से एक ऐसी महिला के साथ रह रहा हूं जिससे मैं प्यार करता हूं.

वो शुरू से ही मेरे बीते कल के बारे में जानती है. जो हमेशा मेरे साथ रहेगा. जिसे और कोई नहीं जानता, मेरा परिवार भी नहीं.

मैंने अब तक कुछ ऐसी चीज़े कर ली हैं जिन पर मैं गर्व महसूस करता हूं. ये कोई बहुत बड़ी उपलब्धियां नहीं हैं लेकिन फिर भी ये उपलब्धियां हैं. मुझे एक बात का मलाल है कि मैं अब जाकर पिडोफ़ाइल लोगों के लिए काम कर रहा हूं.

मैं यौन उत्पीड़न की रोकथाम के लिए एक विशेषज्ञ उपचार संगठन, StopSO नाम की संस्था के साथ काम कर रहा हूं. ये यूके का संगठन है जो किसी यौन अपराध के जोखिम के बारे में सोचने वाले किसी भी व्यक्ति को इलाज मुहैया करवाता है.

ज़्यादातर पिडोफ़ाइल लोगों में दो तरह की इच्छाएं होती हैं. नुकसान पहुंचाने की इच्छा और सामान्य रहने की इच्छा. ज़्यादातर पिडोफ़ाइल लोग इन इच्छाओं से दूर भागने के लिए उतावले रहते हैं.

ऐसे कई ऑनलाइन समुदाय हैं जहां नुकसान ना पहुंचाने वाले पिडोफ़ाइल एक दूसरे का सहयोग कर सकते हैं.

मुझे एक बार ऑनलाइन एक ऐसी महिला मिली थी जो बिल्कुल मेरी तरह थी. वो उन बच्चों की ओर आकर्षित होती थी जिनकी उम्र में उसका शोषण हुआ था. उसने भी मेरी तरह अपना इलाज करवाया था.

मुझे लगता है कि देश के हर शहर में पोर्टमैन की तरह एक क्लीनिक होना चाहिए. लेकिन अभी ये होना दूर की बात है.

मेरे जैसे लोगों का जितनी जल्दी हो सके इलाज कराना चाहिए. यह यौन शोषण के चक्र को तोड़ने का एक महत्वपूर्ण तरीका है.

मैं ख़ुशक़िस्मत हूं कि मुझे मदद मिली, मैं एक सामान्य वयस्क की ज़िंदगी जीने के लायक बन पाया.

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