इश्क की ख़ातिर जा पहुंचीं जॉर्जिया से जेल

  • 4 मई 2017
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स्पेन की जिमेना रिको और मिस्र में जन्मी शाज़ा इस्माइल किसी दूसरे गे कपल से अलग नहीं हैं. लंदन में इनके प्यार को फले-फूले एक महीने से भी कम वक़्त हुआ था, लेकिन इस्माइल के पिता के बुलावे के बाद सब कुछ इतना आसान नहीं रहा.

यह मोहब्बत लोगों को रास नहीं आई और इन्होंने बताया कि इनकी जान पर ख़तरा था.

ये अंतरराष्ट्रीय सीमा से बच निकलीं, लेकिन तुर्की की एक जेल में इन्हें सम्मोहन इलाज का हिस्सा बनना पड़ा. शाज़ा का कहना है कि यहां इलाज बिल्कुल अप्रत्याशित, अमानवीय और डरावना था.

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रिको अपने स्पैनिश गृहनगर टोरक्स में सुरक्षित हैं. इस कपल ने तीन हफ़्ते के कठिन अनुभवों को कैमरे के सामने लोगों को बताया. रिको ने बताया कि इसकी शुरुआत उनकी पार्टनर के परिवार वालों की तरफ़ से हुई.

शाज़ा के परिवार वाले दुबई में रहते हैं. परिवार वालों ने उनपर अलग होने के लिए दबाव बनाना शुरू कर दिया था.

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रिको के कमरे पर रिपोर्टर उनकी कहानी सुनने के लिए जुटे थे. उन्होंने रिपोर्टरों से कहा, ''मैं वाकई अपनी कहानी लोगों को सुनाना चाहती हूं क्योंकि उन लोगों को मदद मिलेगी जिन्हें समलैंगिक होने की वजह से सताया जा रहा है.'' रिको ने कहा कि सब कुछ अनजाने में ही शुरू हुआ.

28 साल की रिको ने बताया कि वे 14 अप्रैल को लंदन से दुबई पहुंची थीं क्योंकि शाज़ा के पिता ने कहा था कि उसकी मां बीमार होने के कारण हॉस्पिटल में भर्ती हैं.

हालांकि यह सच नहीं था. रिको ने कहा कि उन्हें बुलाने के लिए जाल बुना गया था. उन्होंने उन्हें जान से मारने की धमकी दी और कहा गया था कि लेस्बियन होने कारण उन्हें जेल में डाला जा सकता है.

रिको ने बताया कि 21 साल की शाज़ा को परिवार वालों ने बंद कर दिया. हालांकि यह कपल इसके बावजूद जॉर्जिया में तिबलिसी एयरपोर्ट तक फ़रार होने में कामयाब रहा. यहां से वे लंदन की उड़ान मिलने की उम्मीद कर रही थीं.

शाज़ा के परिवार वालों से दो हज़ार मिल की दूरी पर भी सुरक्षा की गारंटी नहीं थी. उनके पिता एयरपोर्ट पहुंच गए और उन्होंने सारे काग़जात जिसमें वीज़ा भी शामिल था, फाड़ दिए. इन दस्तावेजों के बिना ब्रिटेन नहीं पहुंचा जा सकता था.

रिको ने बताया कि तुर्की की सीमा पर जॉर्जियाई अधिकारियों ने उन्हें अपने कब्ज़े में लिया. स्पेन के विदेश मंत्रालय ने कहा कि इस जोड़े को सैमसुन में गिरफ़्तार कर लिया गया.

यह उत्तरी तुर्की में है और यहां से फिर इन्हें इस्तांबुल ले आया गया. रिको ने बताया कि आतंकवाद के मामले में यहां गिरफ़्तार किया गया था. रिको ने कहा कि उनसे जिस पेपर पर हस्ताक्षर कराया गया उसे वे पढ़ या समझ नहीं सकती थीं.

रिको ने अपनी कहानी परिवार वालों से बताई. परिवार वालों ने इस वाकये की जानकारी स्पैनिश पुलिस को दी. तीन दिन तुर्की की जेल में रहने के बाद स्पैनिश विदेश मंत्रालय रिको की सुरक्षित रिहाई कराने में कामयाब रहा.

यहां से इन्हें स्पेन आने की अनुमति मिली. स्पेन में रिको के परिवार वालों ने इनका जमकर स्वागत किया.

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रिको ने कहा, ''मुझे लगता था कि हमलोग जेल से बाहर नहीं आ पाएंगे. उन्होंने कहा कि मैं तो बाहर आ जाऊंगी, लेकिन शाज़ा यहीं रहेगी पर मैंने कहा बिना शाज़ा के जा नहीं सकती.'' हालांकि इस मामले में शाज़ा के पिता ने बिल्कुल अलग बात कही है.

उन्होंने इस बात को स्वीकार किया है कि वह तिबलिसी एयरपोर्ट पर पहुंच गए थे और उन्होंने अपनी बेटी को जबरन साथ ले जाने की कोशिश की.

शाज़ा के पिता ने स्पेन एंटेना 3 टीवी स्टेशन को बताया, ''जब वह दुबई आई तो मैंने उसे गले लगाया. उसने कहा कि वह लंदन में रहना चाहती है. मैंने उसे घर आने को कहा और उससे लेस्बियन होने को लेकर बात की. उसने मुझे इसकी जानकारी एक टेक्स्ट मेसेज से दी थी.''

शाज़ा के पिता ने कहा उन्होंने अपनी बेटी को मनोचिकित्सक से इलाज कराने के लिए कहा. उन्होंने कहा कि वह दुबई में रहकर पढ़ाई करने के लिए तैयार हो गई थी. फिर उन्होंने दावा किया कि उनकी बेटी अचानक घर से ग़ायब हो गई.

पिता ने कहा, ''उसके ग़ायब होने के बाद मैं पुलिस के पास गया. एक दोस्त ने मुझे बताया कि शाज़ा जॉर्जिया में है. इसके बाद मैंने उसके अगवा होने या फ़रार होने की रिपोर्ट दर्ज कराई.

उन्होंने कहा, ''मैं एक वक़ील के साथ जॉर्जिया पहुंचा.'' हालांकि उन्होंने कहा कि जो काग़जात फाड़े वे उनकी बेटी के पुराने पासपोर्ट से जुड़े थे.

रिको ने कहा कि उनकी पार्टनर के पिता जो सोचते थे उसी हिसाब से उन्होंने बेस्ट किया. रिको ने कहा, ''मुझे पता है कि शाज़ा को उसके पिता बहुत प्यार करते हैं, लेकिन वह जो सोचती है उसे उसके पिता समझ नहीं पा रहे.''

रिको को उम्मीद है कि शाज़ा के साथ जल्दी ही शादी होगी. शाज़ा अभी अस्थायी वीज़ा पर स्पेन में रह रही हैं.

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