फ्रांस के राष्ट्रपति चुनाव के बारे में जानना ज़रूरी क्यों है?

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फ्रांस में रविवार को राष्ट्रपति चुनाव होने हैं.

लेकिन कई दशकों तक फ्रांस की राजनीति पर हावी रहने वाली दो बड़ी राजनीतिक पार्टियों को मतदाताओं ने ख़ारिज कर दिया है.

अब राष्ट्रपति की दौड़ में एक उम्मीदवार यूरोपीय संघ के हिमायती उदारवादी नेता इमैनुअल मैक्रों हैं जो कभी चुनाव नहीं जीते हैं.

आर्थिक मंत्री रहते हुए इमैनुअल मैक्रों ने 2016 में एन मार्श नाम के संगठन की स्थापना की थी. एन मार्श भी इससे पहले कभी चुनाव में नहीं उतरी, मैक्रों भी पहली बार चुनाव लड़ रहे हैं.

फ्रांस: राष्ट्रपति चुनाव के लिए कड़ी सुरक्षा

फ्रांस राष्ट्रपति चुनाव: पहला राउंड पेन और मैक्रों के नाम

दूसरी उम्मीदवार मैरीन ल पेन धुर दक्षिणपंथी पार्टी (फ्रंट नेशनल) की नेता रही हैं जो वैश्वीकरण से ज़्यादा प्रभावित नहीं दिखतीं और यूरोपीय संघ से फ्रांस के रिश्तों में भी बदलाव की बात करती हैं.

ब्रेक्सिट को लेकर हुए जनमत संग्रह और अमरीका में डोनल्ड ट्रंप के राष्ट्रपति चुने जाने के बाद फ्रांस में भी बड़ा राजनीतिक उलट फेर होता दिख रहा है.

क्या ख़ास है इस बार के फ्रांस के राष्ट्रपति चुनाव में?

सोशलिस्ट और रिपब्लिकन 1950 के दशक से फ्रांस में सत्ता पर काबिज़ रहे लेकिन अब ये ढांचा ध्वस्त हो गया है.

सोशलिस्ट और रिपब्लिकन पार्टी के उम्मीदवारों के ख़िलाफ़ कई मामलों में न्यायिक जांच के कारण फ्रांस में ऐसे उम्मीदवार राष्ट्रपति बनने की दौड़ में आगे निकल गए हैं जो पहले कभी फ्रांस की नेशनल एसेंबली का चुनाव नहीं जीते हैं.

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इमैनुअल मैक्रों या मैरीन ल पेन में से जो भी चुनाव जीते वो फ्रांस में एक बड़े बदलाव के एजेंडा के साथ आएगा.

अब तक राजनीति की मुख्यधारा से बाहर रहे फ्रंट नेशनल के पास आठ शहरों का प्रशासन और यूरोपीय संसद में 20 सांसद हैं.

वहीं, 39 वर्षीय मैक्रों कभी सांसद नहीं रहे और ना ही कभी किसी चुनाव में खड़े हुए, लेकिन उनका राजनीतिक उभार बहुत आश्चर्यजनक रहा है.

क्या क्या है दांव पर?

फ्रांस के वोटर न सिर्फ फ्रांस के भविष्य के लिए बल्कि एक तरह से यूरोपीय संघ के साथ उसके रिश्तों के लिए भी मतदान करेंगे.

इमैनुअल मैक्रों यूरोपीय संघ के सुधारों और यूरोप के एकीकरण के हिमायती हैं, वो यूरो बजट और यूरोज़ोन के वित्त मंत्रियों की बात करते हैं.

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वहीं मैरीन ल पेन ने हाल ही में ट्वीट किया था, " मैं (फ्रांस की) संप्रभुता लौटाने पर यूरोपीय संघ से बातचीत के लिए ख़ुद को छह महीने दूंगी. बाद में फ्रांस के लोग ही इस पर फ़ैसला करेंगे."

मार्च में एक सर्वेक्षण के मुताबिक 10 में से सात लोग यीरोपीय संघ से फ्रांस के बाहर होने के खिलाफ़ हैं.

कौन जीतेगा?

सभी सर्वेक्षणों के मुताबिक मतदान के दूसरे राउन्ड में इमैनुअल मैक्रों बड़ी जीत की ओर बढ़ रहे हैं.

उन्होंने पहले राउन्ड में मैरीन ल पेन को मात दी और बहुत कम विश्लेषक मानते हैं कि ल पेन सात मई को नतीजों में बड़ा उलट फेर कर पाएंगीं.

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अगर सात मई को मतदान करने के लिए बड़ी संख्या में वोटर निकले तो ल पेन के लिए उम्मीद की कोई किरण दिख सकती है.

2011 में मैरीन ल पेन ने फ्रंट नेशनल की कमान संभाली थी और राष्ट्रपति चुनाव लड़ने पर उन्होंने पार्टी का प्रमुख पद छोड़ने की घोषणा की थी.

ऐसा करके वो पार्टी की कट्टरवादी सोच से ख़ुद को अलग दिखाने का संकेत देने की कोशिश कर रही थीं.

नए राष्ट्रपति के साथ फ्रांस में नए दौर की राजनीतिक की शुरुआत होगी?

ऐसा नहीं लगता कि फ्रांस के चुनाव से राजनीति में नया दौर इतनी जल्दी शुरू हो पाएगा क्योंकि इमैनुअल मैक्रों के पास कोई सांसद नहीं है और मैरीन ल पेन के पास सिर्फ दो सांसद ही हैं.

ऐसे में किसी भी बड़े फ़ैसले को मंज़ूरी दिलाने के लिए नए राष्ट्रपति के दल को 11 और 18 जून को होने वाले संसदीय चुनाव में बेहतर प्रदर्शन करना होगा.

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मैक्रों ने नई एसेंबली में बहुमत के लिए अपनी योजना का ऐलान किया है, संसदीय चुनाव के लिए उनके दल के उम्मीदवारों में 50 फ़ीसदी महिलाएं होंगी, लेकिन मुश्किल ये है कि ये महिला उम्मीदवार मतदाताओं के लिए नई होंगी.

ऐसे में नए राष्ट्रपति के लिए दूसरे दलों के सांसदों के भरोसे काम करने की स्थिति बन सकती है.

क्या हैं ज़मीनी मुद्दे?

सबसे बड़ा मुद्दा बेरोज़गारी का है. फ्रांस में बेरोज़गारी की दर 10 प्रतिशत है और यूरोपीय संघ के सदस्यों में बेरोज़गारी में फ्रांस आठवें नंबर पर है. फ्रांस में 25 साल से नीचे की उम्र के चार युवाओं में से एक बेरोज़गार है.

2008 के वित्तीय संकट के बाद फ्रांस की अर्थव्यवस्था सुस्त रफ्तार से पटरी पर आ पाई है इसलिए राष्ट्रपति के उम्मीदवारों के सामने अर्थव्यवस्था एक बड़ी चुनौती है.

सुरक्षा की चिंताएं?

फ्रांस में चरमपंथी हमलों के बाद आपातकाल लागू है, और पहले राउन्ड की वोटिंग से ठीक पहले फ्रांस की राजधानी पेरिस के शॉ एलीज़े इलाक़े में पुलिस बस पर हमला हुआ था.

जनवरी 2015 से चरमपंथी हमलों में 230 लोगों की मौत हो चुकी है.

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फ्रांस के सुरक्षा एजेंसियां इस बात को लेकर भी चिंतित हैं कि फ्रांस के कई मुस्लिम युवा सीरिया और इराक़ का रुख़ कर चुके हैं.

फ्रंट नेशनल की पूर्व नेता मैरीन ल पेन यूरोपीय संघ के खुली सीमा समझौते को स्थगित करना चाहती हैं.

फ्रंट नेशनल क्यों है धुर दक्षिणपंथी?

मैरीन ल पेन अपने पिता की छवि से हटकर फ्रांस की उदारवादी और वामपंथी पार्टियों को रिझाने की कोशिश कर रही हैं.

मैरीन ल पेन के पिता नफ़रत फैलाने वाले बयानों के लिए कई बार मुश्किल में फंसे थे.

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हालांकि वो अभी भी अपनी दक्षिणपंथी विचारधारा को लेकर ही नीतियां बनाती हैं. वो फ्रांस की सरकारी नौकरियों में विदेशियों के बजाय फ्रांस के नागिरकों को ही तरजीह देने की बात करती हैं.

ल पेन ग़ैरकानूनी प्रवासियों को भी फ्रांस से बाहर करने के पक्ष में हैं.

चुनाव से कुछ दिन पहले उन्होंने ये कहकर विवाद खड़ा कर दिया था कि दूसरे विश्व युद्ध के दौरान नाज़ी कैम्प्स में यहूदियों को भेजने के लिए फ्रांस ज़िम्मेदार नहीं था.

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