द. कोरिया में राष्ट्रपति चुनने के लिए मतदान

  • 9 मई 2017
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Image caption दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति चुनाव में 13 उम्मीदवार मैदान में हैं

दक्षिण कोरिया में राष्ट्रपति चुनने के लिए मतदान हो रहा है.

वहां समय से पूर्व राष्ट्रपति चुनाव कराया जा रहा है क्योंकि भ्रष्टाचार के आरोपों के बाद पूर्व राष्ट्रपति पार्क गुन हे को पद से हटा दिया गया था.

वामपंथी रुझान वाले मून जे-इन इस चुनाव में साफ़ तौर पर आगे बताए जा रहे हैं जबकि उन्हें चुनौती दे रहे हैं मध्यमार्गी विचारधारा वाले आन चल-सू.

उत्तर कोरिया के साथ हाल के दिनों में बढ़े तनाव के बीच हो रहे चुनाव पर निगरानी रखी जा रही है.

मून जे-इन उत्तर कोरिया के साथ संपर्क बढ़ाना चाहते हैं जबकि पूर्ववर्ती राष्ट्रपति पार्क गुन हे ने प्योंगयांग के साथ हर तरह के रिश्ते ख़त्म कर दिए थे.

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Image caption ओपिनियन पोल्स में मून जे-इन को जीत मिलने की संभावना जताई जा रही है

बीबीसी कोरिया संवाददाता स्टीफ़न इवान्स का कहना है कि अगर दक्षिण कोरिया उत्तर कोरिया के साथ संबंधों में आगे बढ़ता है तो अमरीका के साथ तनाव बढ़ सकता है.

चुनाव प्रचार

चुनाव प्रचार के आखिरी दिन मून जे-इन ने प्रचंड जीत का दावा करते हुए कहा कि पार्क गुन हे के पतन और महाभियोग से देश में जो विभाजन पैदा हुआ है, उनके चुने जाने से उस विभाजन को पाटने में मदद मिलेगी.

उधर चुनाव में निर्णायक भूमिका निभानेवाले राज्यों में चुनाव प्रचार करते हुए आन चल-सू ने कहा कि उन्हें पूरा भरोसा है कि वो चुनाव में विजयी रहेंगे.

मून जे-इन डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ़ कोरिया के उम्मीदवार हैं.

ओपिनियन पोल्स में उन्हें जीत का दावेदार माना जा रहा है.

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Image caption आन चल-सू पेशे से डॉक्टर थे जो बाद में सॉफ़्टवेयर कारोबारी बन गए

मार्च में पार्क गुन हे को महाभियोग के ज़रिए पद से हटा दिया गया था. उनपर भ्रष्टाचार और पद के दुरुपयोग के आरोप थे. हालांकि उन्होंने कुछ भी ग़लत करने के आरोपों से इनकार किया है.

2012 के राष्ट्रपति चुनाव में मून जे-इन पार्क गुन हे से मामूली अंतर से हारे थे.

उत्तर कोरिया के हथियार विकास को रोकने में नाकाम रहने के लिए वो पिछले दो सरकारों की आलोचना करते रहे हैं.

उत्तर कोरिया के अलावा इस चुनाव में मतदाताओं के लिए घरेलू मुद्दे भी महत्वपूर्ण हैं.

सभी उम्मीदवार वादा कर रहे हैं वो देश की कमज़ोर होती अर्थव्यवस्था को सुधारेंगे और युवाओं में बेरोज़गारी में कमी लाएंगे जो कि बहुत ज़्यादा हो गई है.

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