फेसबुक को हटाने होंगे भड़काऊ पोस्ट- ऑस्ट्रियाई अदालत

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Image caption सांकेतिक तस्वीर

ऑस्ट्रिया की एक अदालत ने फेसबुक को भड़काऊ टिप्पणियां हटाने का आदेश दिया है.

इस आदेश का अंतरराष्ट्रीय स्तर पर असर हो सकता है, क्योंकि अदालत ने सिर्फ ऑस्ट्रिया नहीं, बल्कि पूरी दुनिया में ऐसी पोस्ट डिलीट करने को कहा है.

फेसबुक की तरफ से इस पर अब तक कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है.

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अदालत ऑस्ट्रिया की ग्रीन पार्टी की अर्ज़ी पर सुनवाई कर रही थी. इस पार्टी पर एक फ़र्ज़ी अकाउंट से निशाना साधा गया था, जिसके बाद उसने अदालत में अपील की थी.

इस आदेश को सोशल मीडिया पर 'ऑनलाइन ट्रोलिंग' के ख़िलाफ़ दुनिया भर में अभियान चला रहे लोगों की जीत की तरह देखा जा रहा है.

'सिर्फ ऑस्ट्रिया में संदेशों को हटाना नाकाफी'

विएना की इस अदालत ने कहा कि ग्रीन पार्टी की नेता इवा ग्लाविशनिग के ख़िलाफ़ शब्दश: दोबारा पोस्ट की गईं टिप्पणियों को हटाना चाहिए.

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Image caption इवा ग्लाविशनिग

अदालत ने यह भी कहा कि पूरी दुनिया में ये पोस्ट हटाए बिना सिर्फ ऑस्ट्रिया में इन संदेशों को रोकना नाकाफी होगा.

अदालत ने कहा कि फेसबुक के लिए इस प्रक्रिया को स्वचालित बनाना आसान था.

ग्रीन पार्टी के वकील डीटर ब्रॉश ने कहा कि फेसबुक यह कहकर नहीं बच सकता कि वह सिर्फ एक प्लेटफॉर्म है. भड़काऊ टिप्पणियों से निपटने के लिए उसे ज़िम्मेदारी लेने की ज़रूरत है.

कई देशों में फेसबुक, गूगल, ट्विटर समेत कई सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म भड़काऊ टिप्पणियां न हटाने की वजह से निशाने पर हैं.

पिछले महीने ही जर्मनी के मंत्रियों ने उस प्रस्ताव को मंज़ूरी दी थी, जिसमें भड़काऊ टिप्पणियां और फ़र्जी ख़बरें न हटाने पर सोशल मीडिया कंपनियों पर 50 मिलियन यूरो (क़रीब 252 करोड़ रुपए) का जुर्माना लगाए जाने का प्रावधान था.

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Image caption बर्लिन का फेसबुक दफ्तर

हाल ही में फेसबुक ने कहा है कि वह भड़काऊ टिप्पणियां, बाल शोषण और आत्मघाती चीज़ों को फैलने से रोकने के लिए 3 हजार लोगों को काम पर रखेगा.

वहीं गूगल ने भी कहा है कि उसके बुनियादी सर्च इंजन के काम करने के तरीकों में कुछ बदलावों से फ़र्जी ख़बरों और भड़काऊ टिप्पणियों पर लगाम लग सकती है.

25 करोड़ स्मार्टफोन उपभोक्ताओं वाले भारत में भी भड़काऊ टिप्पणियां और सोशल मीडिया पर फैलने वाली अफ़वाहें एक समस्या बन रही है. हाल के दिनों में राजनीतिक प्रचार के लिए भी सोशल मीडिया का इस्तेमाल तेज़ी से बढ़ा है. फ़र्जी ख़बरों के प्रसार और भड़काऊ टिप्पणियों के मामले भी सामने आए हैं.

ब्रिटेन के कंज़र्वेटिव पार्टी के सांसद डेमियन कॉलिंस ने भी हाल ही में फेसबुक से अपील की थी कि वह 8 जून को होने वाले ब्रिटेन के आम चुनावों के संबंध में फ़र्जी ख़बरों पर लग़ाम लगाए.

उन्होंने 'द गार्जियन' से कहा था कि पिछले साल हुए अमरीकी चुनाव में टॉप-20 फ़र्जी ख़बरें, टॉप-20 सच्ची ख़बरों से ज़्यादा शेयर की गई थीं.

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