'जिहादी गोलियाँ' जो भारत से भेजी गईं: इटली पुलिस

इमेज कॉपीरइट GUARDIA DI FINANZA

एक प्रयोगशाला में बड़ी मात्रा में ख़ास किस्म की दवा मिलने के बाद नीदरलैंड्स की पुलिस दो लोगों की तलाश कर रही है. जिहादियों के बीच इन गोलियों का ख़ास तौर पर इस्तेमाल होता है.

'सीरिया अब भी बना रहा हैं रासायनिक हथियार'

वहीं इटली की पुलिस ने भी इस हफ़्ते बताया था कि उन्हें ट्रामाडोल नाम की दवा की तीन करोड़ 75 लाख गोलियाँ मिली हैं. ये दवा भी इस्लामिक लड़ाके इस्तेमाल करते हैं. ट्रामाडोल का इस्तेमाल पेनकिलर के तौर पर होता है.

इटली की पुलिस के मुताबिक ये खेप भारत से आई थी और दो मकसदों के लिए इस्तेमाल में आ सकती है- इस्लामिक चरमपंथ में आर्थिक मदद करने के मकसद से या फिर जिहादी लड़ाके इसका प्रयोग करते होंगे ताकि शारीरिक तनाव से निपटने में मदद मिल सके.

इस साल आई एक रिपोर्ट में बताया गया था कि नाइजीरिया में बोको हराम लड़ाके किस कदर ट्रामाडोल का इस्तेमाल करते हैं.

सीरिया संघर्ष में दवा का रोल

इमेज कॉपीरइट DUTCH POLICE

उधर डच पुलिस को पिछले महीने फ़र्ज़ी कैप्टागॉन नाम की दवा की खेप मिली थी. पुलिस का कहना है कि उन्हें अभी ठीक से पता नहीं है कि ये दवाएँ मध्य पूर्व भेजी जा रही थीं या नहीं.

फ़र्ज़ी कैप्टागॉन में मुख्यत एमफेटामाइन पाया जाता है लेकिन ग़ैर कानूनी तरीक़े से दवा बनाने वाले इसमें कैफ़ीन और दूसरी चीज़ें मिला देते हैं.

माना जाता है कि इस दवा की वजह से सीरिया में संघर्ष में बढ़ोत्तरी हुई है क्योंकि इसके बेचने से लाखों डॉलरों की कमाई होती है और लड़ाके इसका इस्तेमाल करते हैं.

कैप्टागॉन के नाम से बिकने वाली दवा एक साइको-स्टीमूलेंट के तौर पर काम करती थी और 80 के दशक से ही इस पर बैन लगा था. इसको लेने से हिंसा के प्रति रवैए में बदलाव देखा गया है और लड़ाई के दौरान अलर्ट रहने की क्षमता बढ़ती है.

मार्च में ग्रीस की पुलिस ने भी फ़र्ज़ी कैप्टागॉन बनाने में लगे चार संदिग्धों को गिरफ़्तार किया था और छह लाख 50 हज़ार गोलियाँ ज़ब्त की थी.

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए यहां क्लिक करें. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर भी फ़ॉलो कर सकते हैं.)

मिलते-जुलते मुद्दे