मोदी जी श्रीलंका से आखिर क्या लेकर आएंगे?

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Image caption भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और श्रीलंका के प्रधानमंत्री रनिल विक्रमसिंघे

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दो दिवसीय श्रीलंका दौरे का एक तरह से सांकेतिक महत्व है.

वो वहां बुद्ध पूर्णिमा (वीसक डे) के मौके पर जा रहे हैं. श्रीलंका एक बौद्ध धर्मावलंबी देश है और बुद्ध पूर्णिमा का वहां बहुत महत्व है जिसे वेसाक या वैशाख कहा जाता है.

इस मौके पर श्रीलंका में भव्य समारोहों का आयोजन किया जाता है और प्रधानमंत्री उसी में शिरकत करने जा रहे हैं.

प्रधानमंत्री मोदी मध्वर्ती श्रीलंका के इलाके में जा रहे हैं जहां वो तमिल लोगों से भी मिलेंगे.

कैंडी में वो एक अस्पताल का भी उद्घाटन करेंगे.

अधिकारियों के मुताबिक प्रधानमंत्री के दौरे के दौरान कोई द्विपक्षीय बातचीत नहीं होनी है और किसी समझौते पर भी दस्तख़त नहीं होना है.

ये एक सद्भावना दौरा है. वहां पूरे दक्षिण एशिया के बौद्ध धर्मगुरु पहुंच रहे हैं. आपने देखा होगा कि श्रीलंका के राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री भारत में बौद्ध धर्म से जुड़े महत्वपूर्ण तीर्थ स्थलों पर दर्शन के लिए आते रहते हैं. वैसे ही प्रधानमंत्री मोदी के इस श्रीलंका दौरे को भी देखा जाना चाहिए.

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Image caption श्रीलंका में बुद्ध पूर्णिमा का त्योहार बहुत धूमधाम से मनाया जाता है. वहां इसे वेसक (वैशाख) दिवस के नाम से मनाया जाता है

कूटनीतिक महत्व

जब इस यात्रा की योजना बनी थी तब लगा था कि भारत और श्रीलंका के बीच जो समझौते हैं उन पर अमल हो सकता है.

जैसेकि मुक्त व्यापार संधि पर कुछ प्रगति हो सकती है या फिर ट्रिंकोमाली में चल रहे कई प्रोजेक्ट्स में भारत शामिल है, उसमें प्रगति हो सकती थी.

लेकिन कुछ हफ़्ते पहले ही जब श्रीलंका के प्रधानमंत्री रानिल विक्रमसिंघे भारत आए थे तो उन्होंने एक सहमति पत्र पर दस्तख़त किया था. साथ ही उन्होंने ये भी स्पष्ट कर दिया था कि जब भारतीय प्रधानमंत्री मोदी श्रीलंका जाएंगे तो किसी समझौते पर दस्तख़त नहीं होगा.

हां ये ज़रूर है कि दो-तीन दिन बाद ही बीजिंग में बेल्ट एंड रोड फ़ोरम समिट होने जा रहा है. ऐसे में भारत ये दिखाने की कोशिश करेगा कि श्रीलंका जैसे पड़ोसी देश के साथ उसके रिश्ते बहुत अच्छे हैं.

ये भी सच है कि श्रीलंका की सरकार के भीतर भारत से होने वाले समझौतों को लेकर काफ़ी अनबन है. उनके बीच अभी तक एक राय नहीं बन पाई है कि भारत के साथ होने वाले समझौतों में आगे बढ़ना चाहिए या नहीं.

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Image caption भारत और श्रीलंका के बीच भारतीय मछुआरों को लेकर पुराना विवाद है

भारत-श्रीलंका के बीच मौजूदा संबंध

अभी तक मछुआरों के मामले को लेकर दोनों देशों के बीच संबंध उलझे हुए थे. लेकिन अब दोनों देशों से ये तय कर लिया है कि मछुआरों के मसले पर वे बातचीत करते रहेंगे और ऐसे उपायों पर ग़ौर करेंगे जिससे भारतीय मछुआरे श्रीलंका के समुद्री क्षेत्र में ना चले जाएं.

इसके अलावा दोनों देश निवेश और व्यापार बढ़ाना चाहते हैं.

कभी-कभी लगता है कि दोनों देशों के बीच के तनाव में ये मुद्दे पृष्ठभूमि में चले गए हैं, लेकिन साथ ही ये भी देखने वाली बात है कि प्रधानमंत्री बुद्ध पूर्णिमा पर वहां जाकर शायद यही संदेश देना चाहते हैं कि 'भारत और श्रीलंका पड़ोसी मुल्क हैं और हमारे बीच कई तरह के ताल्लुक हैं जैसे कि सांस्कृतिक, धार्मिक और आध्यात्मिक.'

(बीबीसी संवाददाता संदीप सोनी के साथ बातचीत पर आधारित)

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