झुलसे हुए शरीर से उम्मीदों को स्तनपान

  • 14 मई 2017
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Image caption शामिका स्टीवेंसन

दुनिया उम्मीदों से भरी रहे, इसके लिए कितने लोग कितना कुछ कर रहे हैं.

एक हादसे में बुरी तरह जल गई एक महिला, असहनीय दर्द सहते हुए भी अपने बच्चे को दूध पिलाती है. सिर्फ इसलिए ताकि दूसरी नई मांओं की उम्मीदें बरक़रार रहे.

शामिका स्टीवेंसन 34 साल की हैं. वह दो साल की थीं जब उनके अमरीका के मिशीगन स्थित घर में आग लग गई थी और इस हादसे में उनका शरीर बुरी तरह जल गया था.

14 साल पहले वह अपने पहले बच्चे को दूध नहीं पिला पाई थीं, लेकिन इस बार उन्होंने यह हिम्मत भरा फैसला लिया है.

बीबीसी न्यूज़बीट से बात करते हुए उन्होंने कहा, 'मैं दूसरों की मदद के लिए अपनी कहानी बांटना चाहती हूं. ताकि कोई मेरी तरह 20 साल की उम्र में उम्मीद न छोड़े.'

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पहले बच्चे को दूध नहीं पिला सकी थीं

वह कहती हैं कि जब तक उनके स्तन ठीक हैं, उनका वैसा इस्तेमाल किया जाना चाहिए, जैसा प्रकृति ने तय किया है.

32 साल पहले शामिका के घर का बॉयलर फट गया था. खिड़की बंद होने की वजह से उनकी मां उस तरफ नहीं आ सकीं और शामिका के आठ महीने के भाई की मौत हो गई.

शामिका को सारी ज़िंदग़ी एक हिस्से की स्किन दूसरी जगह लगवाने की प्रक्रिया से जूझना पड़ा. 20 की उम्र में पहली बार गर्भवती होने के बाद वह डर गई थीं, क्योंकि उनके पेट पर जलने के दाग थे.

इन्हीं दागों की वजह से डॉक्टर उन्हें पेनकिलर भी नहीं दे सके. पेशे से मेडिकल असिस्टेंट शामिका कहती हैं कि पहले बच्चे के समय वह उसे दूध नहीं पिला सकी थीं, लेकिन इस बार वह कोशिश करना चाहती थीं.

अमरीकी फोटोग्राफर इवेट आइवन्स ने शामिका की तस्वीर फेसबुक पेज पर शेयर की है. उन्होंने शामिका के लिए 'दो बच्चों की मां, आग से बच निकलने वाली, योद्धा और दूध पिलाने वाली मां' जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया है.

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Image caption हादसे के बाद से शामिका के सिर पर बाल नहीं आए. वह विग पहनती हैं.

'मुझे दूध का रिश्ता क़ायम करना था'

पहले बच्चे से लेकर अब तक, 14 सालों में शामिका को दो बार गर्भपात झेलना पड़ा.

वह बताती हैं कि अपने पहले बेटे जोसिया को दूध पिलाना बहुत मुश्किल था. उन्हें ठीक से दूध नहीं उतरता था और शुरुआत में एक पंप और सिरिंज का सहारा लेना पड़ता था.

अस्पताल की नर्सों ने इसमें शामिका की मदद की. शामिका के मुताबिक, 'मुझे याद है जब उसने बच्चे को दूध पिलाने के लिए मेरा स्तन बाहर निकाला तो आगाह किया कि तुम्हें अच्छा फील नहीं होने वाला है.'

शामिका कहती हैं, 'इससे बहुत तेज़ दर्द हुआ लेकिन मुझे अपने बच्चे से दूध पिलाने का रिश्ता क़ायम करना ही था.'

वह याद करती हैं, 'मैं दूध पिलाने के हर तीन घंटे में पंपिंग कर रही थी, लेकिन ज़्यादा दूध नहीं आ रहा था.'

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Image caption 17 साल की उम्र तक हर साल उनकी सिनसिनाटी में सर्जरी हुई

'...जैसे मैं बियोंसे की तरह दिखती हूं'

शामिका को लगता है कि उनकी तस्वीरें दुनिया भर की मांओं का अपने शरीर में यक़ीन जगाएंगी.

वह कहती हैं, 'यह सोचकर मेरा दिल टूट जाता है कि लोग अपनी छवि को लेकर ख़ुदकुशी की सोचने लगते हैं. एक मैं हूं, जिसे दुनिया की परवाह नहीं और ऐसे घूम रही हूं जैसे बियोंसे या टेमर ब्रैक्सटन की तरह दिखती हूं.'

वह कहती हैं, 'मुझे रातों-रात यह आत्मविश्वास नहीं मिला है. कभी कभी मैं भी उदास हो जाती हूं क्योंकि मैं इंसान हूं. लेकिन मैं वापसी करती हूं और ईश्वर को इस ज़िंदग़ी और इन दो बच्चों के लिए शुक्रिया कहती हूं.'

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