भारत के ही दांव से चित करने की कोशिश में पाकिस्तान

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पाकिस्तान इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ़ जस्टिस (आईसीजे) में भारतीय नागरिक कुलभूषण जाधव की फांसी की सज़ा के मामले पर अपने पक्ष का 'मज़बूती से' बचाव करने की तैयारी कर रहा है.

समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार पाकिस्तान के अख़बार 'डॉन' ने एटर्नी जनरल अश्तर औसाफ़ के हवाले से ख़बर दी है कि पाकिस्तान ने इस बारे में एक रणनीति बनाई है.

पाकिस्तानी इसी रणनीति के तहत हेग स्थित उस अदालत के सामने अपनी दलील पेश करेगा जिसने सज़ा पर रोक लगा दी है.

अख़बार के मुताबिक जनरल औसाफ़ ने कहा,"हमने अपने सुझाव प्रधानमंत्री कार्यालय और विदेश मंत्रालय को भेज दिए हैं."

इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ़ जस्टिस के अधिकार में क्या है?

जाधव मामले में भारत क्यों गया अंतरराष्ट्रीय कोर्ट

रिपोर्ट के अनुसार अटार्नी जनरल औसाफ़ ने दो दिनों तक विदेश मंत्रालय और क़ानून मंत्रालय के साथ लंबी बैठकें की हैं और समझा जा रहा है कि आईसीजे में पाकिस्तान की ओर से वही दलील दे सकते हैं.

हालांकि उन्होंने कहा है कि पैरवी के लिए विदेश से भी किसी की मदद ली जा सकती है, क्योंकि 15 मई को सुनवाई शुरू होने वाली है और समय बहुत कम है.

पिछले साल 3 मार्च को गिरफ़्तार हुए कुलभूषण जाधव को पाकिस्तान की एक सैन्य अदालत ने जासूसी के आरोप में फांसी की सज़ा दी है, जिसे रुकवाने के लिए भारत ने आईसीजे का दरवाज़ा खटखटाया है.

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भारत की नज़ीर पेश करेगा पाकिस्तान

ऐसा समझा जा रह है कि पाकिस्तान सुनवाई में आईसीजे के अधिकार क्षेत्र का मामला उठा सकता है.

और इसके लिए वो 17 साल पहले की घटना का हवाला देगा जब पाकिस्तान भी अंतरराष्ट्रीय अदालत पहुंचा था तब अदालत ने मामला सुनने से इनकार कर दिया था.

पाकिस्तान में सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष और प्रतिष्ठित क़ानूनविद अकरम शेख के अनुसार 1999 में भारत के लड़ाकू विमान ने पाकिस्तानी नौसेना के एक जहाज को मार गिराया था, जिसमें 16 अधिकारी मारे गए थे. तब पाकिस्तान ने इस मामले को अंतरराष्ट्रीय कोर्ट में उठाया था.

पाकिस्तान का तर्क था कि भारत ने पाकिस्तान के निहत्थे अधिकारियों को मारा है और यह वैश्विक नियमों को उल्लंघन है.

उस वक्त भारत ने ये कहते हुए अदालत के क्षेत्राधिकार को मानने से इनकार कर दिया था कि अंतरराष्ट्रीय अदालत कॉमनवेल्थ देशों के बीच हुए विवाद की सुनवाई नहीं कर सकती.

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