उर्दू प्रेस रिव्यू: 'कुलभूषण मामले में भारत अंतरराष्ट्रीय बिरादरी में फैला रहा भ्रम'

  • 14 मई 2017
कुलभूषण जाधव (फ़ाइल फोटो) इमेज कॉपीरइट AFP

पाकिस्तान से छपने वाले उर्दू अख़बारों में इस हफ़्ते जिन ख़बरों ने सुर्ख़ियां बटोरी उनमें पाकिस्तान की जेल में बंद भारतीय नौसेना के पूर्व अधिकारी कुलभूषण जाधव, डॉनलीक्स, नवाज़ शरीफ़ की सज्जन जिंदल से मुलाक़ात और पाकिस्तान-ईरान के संबंधों में तनाव शामिल हैं.

पाकिस्तान का कहना है कि भारत ने इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ़ जस्टिस (आईसीजे) में कुलभूषण मामले की सही जानकारी नहीं दी और उनके बारे में कई बातें भारत ने छुपा ली हैं.

अख़बार 'दुनिया' के मुताबिक़ भारत ने ये तक नहीं बताया कि जाधव भारतीय नौसेना के अधिकारी हैं और उनके पास दो-दो पासपोर्ट थे.

अख़बार लिखता है कि जाधव की गिरफ़्तारी के बाद ही पाकिस्तान ने हेग स्थित अंतरराष्ट्रीय न्यायालय (आईसीजे) को बता दिया था कि जाधव की सुनवाई का मामला आईसीजे के अधिकार क्षेत्र में नहीं आता है.

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भारतीय मीडिया की हड़बड़ी

कुलभूषण जाधव को मार्च 2016 में पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत से गिरफ़्तार किया गया था और पिछले महीने यानी अप्रैल 2017 में पाकिस्तान की सैन्य अदालत ने उन्हें जासूसी करने के जुर्म में मौत की सज़ा सुनाई थी.

भारत का दावा है कि कुलभूषण जाधव भारतीय नौसेना के पूर्व अधिकारी हैं जो रिटायरमेंट के बाद ईरान में कारोबार करते थे और उन्हें ईरान से अग़वा किया गया था.

उनकी फांसी की सज़ा को टालने के लिए भारत ने आईसीजे का दरवाज़ा खटखटाया है.

भारतीय मीडिया ने ये ख़बर चला दी थी कि आईसीजे ने कुलभूषण की फांसी की सज़ा को अमल में लाने पर रोक लगा दी है.

यहां तक की भारतीय विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने ट्वीट कर दिया था कि उन्होंने ये ख़ुशख़बरी कुलभूषण जाधव के परिवार को भी दे दी है.

हालांकि बाद में आईसीजे ने केवल इतना कहा कि भारत ने इस तरह की अपील की है जिस पर सोमवार यानी 15 मई को सुनवाई होगी.

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'भारत गुमराह कर रहा है'

अख़बार नवा-ए-वक़्त ने संपादकीय लिखा है कि इस मामले में भारत अपने नागरिकों को गुमराह कर रहा है और अंतरराष्ट्रीय बिरादरी को भ्रमित करने की कोशिश कर रहा है.

अख़बार लिखता है कि भारत के झूठ का इससे बड़ा सबूत क्या होगा कि कुलभूषण मामले में अभी पाकिस्तान के सुप्रीम कोर्ट से फ़ैसला आना बाक़ी है और उसके बाद भी जाधव को राष्ट्रपति से माफ़ी की अपील का हक़ है, लेकिन भारत अभी ही आईसीजे पहुंच गया.

संपादकीय में आगे लिखा गया है कि भारत इस मामले में तो आईसीजे से दख़ल देने को कह रहा है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं के फ़ैसलों को अमली जामा पहनाने में ख़ुद भारत का रिकॉर्ड बदतरीन रहा है.

अख़बार लिखता है कि कश्मीर के मामले में संयुक्त राष्ट्र की क़रारदादों की भारत पिछले 70 सालों से अनदेखी करता आया है.

वर्ल्ड बैंक के फ़ैसलों को नकारते हुए भारत ग़ैर-क़ानूनी तरीक़े से बांध बनाता रहा है. अख़बार लिखता है कि भारत इस मामले में चाहे जितना शोर मचाता रहे, पाकिस्तान सरकार को क़ानून का पालन करते हुए कुलभूषण जाधव को फांसी देनी चाहिए.

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Image caption पाकिस्तानी सेना प्रमुख जनरल कमर जावेद बाजवा

सेना और सरकार

डॉनलीक्स का मामला भी इस हफ़्ते पाकिस्तानी अख़बारों में छाया रहा.

पिछले साल अक्तूबर में पाकिस्तान से छपने वाले एक अंग्रेज़ी अख़बार डॉन ने एक ख़बर छापी थी जिसमें कहा गया था कि पाकिस्तान में जिहादियों से कैसे निपटा जाए इसको लेकर सेना और प्रधानमंत्री नवाज़ शरीफ़ की सरकार में भयंकर मतभेद हैं.

इस ख़बर के आने के बाद सरकार ने जांच कमेटी बनाई थी जिसने अपनी रिपोर्ट दे दी है.

सरकार ने कमेटी की सिफ़ारिशों को सार्वजनिक करने से इनकार कर दिया है और कहा है कि उनकी सिफ़ारिशों पर कार्रवाई हो रही है.

लेकिन सेना ने सरकार के ज़रिए उठाए गए क़दमों को नाकाफ़ी बताते हुए उसे सार्वजनिक तौर पर नकार दिया था.

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डॉनलीक्स

फिर क्या था पाकिस्तानी मीडिया में एक बार फिर इसको लेकर हंगामा बरपा हो गया.

लेकिन बाद में नवाज़ शरीफ़ और सेना प्रमुख जनरल कमर जावेद बाजवा ने मुलाक़ात कर मामले को सुलझा लिया.

अख़बार दुनिया के मुताबिक़ गृहमंत्री चौधरी निसार अली ख़ान ने कहा कि सेना से कोई नाराज़गी नहीं थी और पाकिस्तान ही ऐसा वाहिद मुल्क है जहां सरकार और सेना के संबंधों पर सियासत होती है. अख़बार जंग ने संपादकीय लिखा है कि ये मामला पाकिस्तान के सामने इस समय सबसे बड़ी चुनौती है.

अख़बार नवा-ए-वक़्त ने पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ़ के अध्यक्ष इमरान ख़ान के बयान को सुर्ख़ी बनाई है. इमरान ने कहा है कि डॉनलीक्स के मामले ने ये ज़ाहिर कर दिया है कि पाकिस्तान में कमज़ोर और ताक़तवर के लिए अलग-अलग क़ानून है.

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बैक चैनल डिप्लोमेसी

नवाज़ शरीफ़ की भारतीय कारोबारी सज्जन जिंदल से मुलाक़ात भी मीडिया में छायी रही.

नवाज़ शरीफ़ ने भारतीय कारोबारी सज्जन जिंदल से पिछले दिनों कई बार मुलाक़ात की थी. इसको लेकर पाकिस्तानी मीडिया में तरह-तरह की बातें हो रही थीं.

आख़िरकार नवाज़ शरीफ़ की सरकार ने कहा कि शरीफ़ और जिंदल की मुलाक़ात दरअसल बैक चैनल डिप्लोमेसी का हिस्सा है.

बीबीसी उर्दू ने विश्वस्त सूत्रों के हवाले से ख़बर दी है कि नवाज़ शरीफ़ ने जिंदल से मुलाक़ात के बारे में सेना प्रमुख जनरल बाजवा को भी जानकारी दे दी है.

शरीफ़ ने कहा है कि जिंदल भारत के एक वरिष्ठ अधिकारी के कहने पर उनसे मिलने पंजाब प्रांत के मरी आए थे और ये भारत और पाकिस्तान के बीच जारी तनाव को कम करने की भारतीय कोशिश का हिस्सा है.

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Image caption ईरान के सेना प्रमुख मोहम्मद हुसैन बाक़री

ईरान-पाक रिश्ते

ईरान का एक बयान भी इस हफ़्ते मीडिया में छाया रहा.

ईरान के सेना प्रमुख मोहम्मद हुसैन बाक़री ने एक बयान में कहा था कि पाकिस्तान चरमपंथियों के हमले रोके वर्ना ईरानी सेना ख़ुद कार्रवाई करेगी.

ईरानी सेना प्रमुख के इस बयान को पाकिस्तान को दी गई धमकी माना जा रहा है.

नवा-ए-वक़्त ने लिखा है कि पाकिस्तान में ईरानी राजदूत को विदेश मंत्रालय के दफ़्तर बुलाकर कहा गया है कि ईरानी सेना प्रमुख का बयान पाकिस्तान और ईरान के दोस्ताना संबंधों के बिल्कुल विपरीत है.

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