उत्तर कोरिया का टेस्ट पर टेस्ट, कैसे रोकेंगे डोनल्ड ट्रंप?

  • 14 मई 2017
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उत्तर कोरिया की चुनौती

दक्षिण कोरिया में नए राष्ट्रपति मून जे-इन के सत्ता में आने के कुछ ही दिनों बाद उत्तर कोरिया ने एक और बैलिस्टिक मिसाइल का परीक्षण किया है.

उत्तर पश्चिमी कुसोंग के नजदीक इस मिसाइल को लॉन्च किया गया. सैंकड़ों मील का सफर तय करने के बाद ये जापान सागर में गिर गया.

उत्तर कोरिया के साथ बेहतर रिश्तों की वकालत करने वाले दक्षिण कोरियाई राष्ट्रपति मून जे-इन पर इस परीक्षण के बाद तात्कालिक दबाव बढ़ गया है.

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उत्तर कोरिया ने इस साल कई मिसाइल परीक्षण किए हैं. इससे अंतरराष्ट्रीय बिरादरी में चिंता का माहौल है और अमरीका के साथ उत्तर कोरिया का तनाव भी बढ़ा है.

पिछले महीने भी उत्तर कोरिया ने दो परीक्षण किए थे, हालाँकि ये नाकाम रहे थे और प्रक्षेपण के कुछ ही देर बाद इन रॉकेट्स में विस्फोट हो गया था.

उत्तर कोरिया ने किया एक और मिसाइल परीक्षण

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मिसाइल टेस्ट

दक्षिण कोरियाई राष्ट्रपति मून जे-इन ने इस मुद्दे पर चर्चा के लिए अपनी सुरक्षा परिषद की आपात बैठक बुलाई.

बैठक के बाद उन्होंने मिसाइल टेस्ट की निंदा करते हुए इसे 'उकसावे की कार्रवाई' करार दिया है.

उनके प्रवक्ता ने कहा, "राष्ट्रपति ने कहा कि उत्तर कोरिया के साथ बातचीत की संभावनाओं पर दक्षिण कोरिया सकारात्मक है, लेकिन ये तभी संभव है जब उत्तर कोरिया अपने रवैये में बदलाव दिखलाएगा."

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हालांकि अभी तक उत्तर कोरिया के मिसाइल टेस्ट के ब्योरे तफ़सील से सामने नहीं आए हैं.

समाचार एजेंसी रॉयटर्स ने जापान के रक्षा मंत्री के हवाले से कहा है कि मिसाइल उत्तर कोरिया के पूर्वी तट पर तकरीबन 400 किलोमीटर दूर जाकर गिरा और ये नए तरह की मिसाइल हो सकती है.

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उत्तर कोरिया के ख़िलाफ़

उधर, यूएस पैसिफ़िक कमांड ने एक बयान जारी कर कहा मिसाइल टेस्ट का मूल्यांकन किया जा रहा है, लेकिन इसकी उड़ान अमरीकी जमीन तक पहुंच रखने वाली अंतरमहाद्वीपीय मिसाइलों की तरह नहीं थी.

दूसरी तरफ़ व्हाइट हाउस ने भी कहा है कि राष्ट्रपति ट्रंप ये सोच भी नहीं सकते कि रूस को इससे खुशी हुई होगी क्योंकि मिसाइल रूस की जमीन से ज्यादा दूरी पर नहीं गिरा था.

अमरीकी बयान में आगे कहा गया है कि इस नए परीक्षण से उत्तर कोरिया के ख़िलाफ़ और अधिक कड़े प्रतिबंधों की मांग उठनी चाहिए.

माना जाता है कि उत्तर कोरिया दो प्रकार के इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइलों या अंतरमहाद्वीपीय मिसाइलों के परीक्षण पर काम कर रहा है, लेकिन अभी तक इनका परीक्षण नहीं किया गया है.

इस मिसाइल टेस्ट पर न तो उत्तर कोरिया ने ही अभी तक कुछ कहा है और न ही उसके करी़बी सहयोगी चीन ने.

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अतीत का क्यूबा संकट

बीबीसी के कोरिया संवाददाता स्टीफ़न इवांस उत्तर कोरिया संकट को अतीत में हुए क्यूबा मिसाइल संकट से जोड़कर देखते हैं.

उनका कहना है कि धीरे-धीरे उत्तर कोरिया की स्थिति क्यूबा जैसी हो रही है.

अक्टूबर, 1962 में ऊपर से ली गई तस्वीरों से ये पता चला था कि सोवियत संघ फ़्लोरिडा तट के पास क्यूबा में एक मिसाइल बेस बना रहा है.

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Image caption एस संयुक्त सैन्य अभ्यास के दौरान दक्षिण कोरिया और अमरीकी सेना के जवान

राष्ट्रपति कैनेडी ने कहा कि ये उन्हें स्वीकार नहीं. वे इसे 'लक्ष्मण रेखा' मानते हैं.

सोवियत नेता ख्रुश्चेव को लगा कि इससे युद्ध भड़क सकता है और उन्होंने अपने कदम वापस खींच लिए.

ये साफ़ नहीं है कि राष्ट्रपति ट्रंप ने उत्तर कोरिया के लिए कौन सी 'लक्ष्मण रेखा' खींची है और क्या वे युद्ध का कोई जोखिम ले सकते हैं, खासकर जिसमें चीन के शामिल हो जाने की संभावना हो.

उन्होंने कहा है कि उत्तर कोरियाई मिसाइलें कभी भी 'अमरीकी ज़मीन तक नहीं पहुंच पाएंगी.' इस बीच दक्षिण कोरिया में एक नया राष्ट्रपति है जो उत्तर कोरिया के साथ बातचीत चाहता है.

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चीन का असर

और अगर उत्तर कोरिया के मिसाइल टेस्ट जारी रहते हैं तो फिलहाल ये साफ नहीं है कि अमरीका किसी सैन्य कार्रवाई का कोई फ़ैसला लेगा या नहीं. या फिर दक्षिण कोरिया ही कोई कदम उठाता है या नहीं.

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संयुक्त राष्ट्र प्रतिबंधों के बावजूद उत्तर कोरिया ने पांच परमाणु परीक्षण किए हैं और वह लंबी दूरी की मिसाइलें भी विकसित कर रहा है.

अमरीका ने सुरक्षा परिषद के दूसरे सदस्य देशों पर उत्तर कोरिया के ख़िलाफ़ प्रतिबंधों को ठीक से अमल नहीं करने का आरोप लगाया है. उसने ख़ासतौर पर चीन से अपील की है कि वो अपने कारोबारी रिश्तों के ज़रिए उत्तर कोरिया पर दबाव डाले.

लेकिन ख़राब संबंधों के बावजूद उत्तर कोरिया ने हाल ही में कहा है कि अगर हालात सही रहे तो वो अमरीका से बात करने के लिए तैयार है.

एक उत्तर कोरियाई कूटनयिक की ये टिप्पणी अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप के ये कहने के बाद आई कि वो उत्तर कोरियाई नेता किम जोंग-उन से मिलकर 'सम्मानित' महूसस करेंगे.

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