क्या डोनल्ड ट्रंप पर लग सकता है महाभियोग?

  • 19 मई 2017
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व्हाइट हाउस में डोनल्ड ट्रंप के दस्तक देने के बाद से ही आरोपों की झड़ी लगी हुई है. इन आरोपों की बुनियाद पर 'महाभियोग' शब्द उछलने लगा है.

कमान संभालने से पहले ही ट्रंप विरोधी महाभियोग की आशंका जता रहे थे लेकिन अब इसे किसी के द्वारा पेश किया जाना है.

ट्रंप अमरीकी शासन संभालने के बाद से ही कई विवादों में हैं. इसी हफ़्ते अमरीकी मीडिया ने आरोप लगाया कि ट्रंप ने एफ़बीआई प्रमुख जेम्स कोमी से रूस और अमरीका के पूर्व राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार के बीच संबंधों की जांच रोकने को कहा था. इसके 24 घंटे पहले यह दावा किया गया कि ट्रंप ने रूसी राजदूत को अहम खुफिया जानकारी दी थी.

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सवाल यह है कि राष्ट्रपति पर महाभियोग लगाना कितना आसान है? अतीत में किसने महाभियोग का सामना किया है? इन सवालों के जवाब से शायद आप हैरान हो सकते हैं.

महाभियोग क्या है?

जब किसी राष्ट्रपति पर गंभीर आरोप लगते हैं तो उस पर महाभियोग लगाया जाता है. महाभियोग के बाद राष्ट्रपति को पद छोड़ना पड़ता है. अमरीकी संविधान के मुताबिक राष्ट्रपति को देशद्रोह, रिश्वत और दूसरे संगीन अपराधों में महाभियोग का सामना करना पड़ता है.

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अमरीका में महाभियोग की प्रक्रिया हाउस ऑफ रिप्रेज़ेंटेटिव्स से शुरू होती है और इसे पास करने के लिए साधारण बहुमत की ज़रूरत पड़ती है. इस पर एक सुनवाई सीनेट में होती है लेकिन यहां महाभियोग को मंजूरी देने के लिए दो तिहाई बहुमत की ज़रूरत पड़ती है. अमरीकी इतिहास में इस मील के पत्थर तक अभी तक पहुंचा नहीं जा सका है.

किसे महाभियोग का सामना करना पड़ा?

कई बार महाभियोग का बादल गहराया लेकिन केवल दो राष्ट्रपतियों को ही इसका सामना करना पड़ा. इस मामले में सबसे हाल की मिसाल हैं अमरीका के 42वें राष्ट्रपति बिल क्लिंटन. बिल क्लिंटन को एक व्यापक जूरी के समक्ष झूठी गवाही देने और न्याय में बाधा डालने के मामले में महाभियोग का सामना करना पड़ा था.

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मोनिका लेविंस्की से प्रेम संबंधों के स्वरूप को लेकर उन्होंने झूठ बोला था. इसके साथ ही यह भी आरोप है कि बिल क्लिंटन ने मोनिका लेविंस्की को भी इस मामले में झूठ बोलने के लिए कहा था.

पहले आरोप को लेकर बिल क्लिंटन के महाभियोग के पक्ष में हाउस में 228 वोट पड़े थे और विरोध में 206 वोट. वहीं दूसरे आरोप को लेकर पक्ष में 221 वोट पड़े और विरोध में 212 वोट. यह ध्यान देने वाली बात है कि तब समय दिसंबर 1998 का था. क्लिंटन को राष्ट्रपति की मंजूरी रेटिंग 72 फ़ीसदी थी. हालांकि यह मामला सीनेट में 1999 में आया था पर इसे दो तिहाई बहुमत की मंजूरी नहीं मिल पाई थी.

इस मामले में तब बीबीसी का एक विश्लेषण काफ़ी चर्चित हुआ था. उसमें कहा गया था, ''राष्ट्रपति को हटाने की उत्सुकता ऐसी थी कि लोगों ने इसे सोचा तक नहीं कि आरोप शक से आगे बढ़कर साबित होगा या नहीं.

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बिल क्लिंटन के बाद एन्ड्रयू जॉन्सन एकमात्र राष्ट्रपति हैं जिन्हें महाभियोग का सामना करना पड़ा था. जॉन्सन अमरीका के 17वें राष्ट्रपति थे. उनका कार्यकाल 1865 से 1869 तक था. जॉनसन के ख़िलाफ़ 1868 में हाउस में महाभियोग लाया गया था. तब के युद्ध मंत्री एडविन स्टैंचन के हटने के 11 दिन बाद ही महाभियोग लाया गया था. एडविन राष्ट्रपति की नीतियों से सहमत नहीं थे.

राष्ट्रपति एन्ड्रयू जॉन्सन ने युद्ध मंत्री एडविन को पद से हटा दिया था. इसकी तुलना जेम्स कोमी से की जा रही है. कोमी को ट्रंप ने एफबीआई प्रमुख से बर्खास्त कर दिया है. कहा जा रहा है कि कोमी भी ट्रंप की नीतियों से सहमत नहीं थे. इसे लेकर अमरीकी मीडिया में भी सुर्खियां बनीं.

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जॉन्सन का मामला बिल क्लिंटन से बिल्कुल उलट था. जॉन्सन का महाभियोग महज एक वोट से बच गया था. इसके लिए एक रिपब्लिकन वोट काम आया था. महाभियोग के ख़िलाफ वोट देने वाले आयोवा के रिपब्लिकन सेनेटर जेम्स ग्राइम्स ने कहा था, ''मैं एक अस्वीकार्य राष्ट्रपति से छुटकारे के लिए संविधान के सुव्यवस्थित तरीके को नष्ट करने से सहमत नहीं था.''

क्या ट्रंप का महाभियोग संभव है?

सिद्धांत तौर पर हां. लॉफेयर ब्लॉग के लेखकों के मुताबिक- तकनीकी रूप से देखें तो ट्रंप ने अपनी शपथ की उपेक्षा की है जिसमें उन्होंने अमरीकी संविधान का बचाव और उसकी रक्षा करने की शपथ ली थी. व्यावहारिक रूप से देखें तो ट्रंप के ख़िलाफ़ महाभियोग संभव नहीं है.

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बीबीसी के उत्तरी अमरीकी संवाददाता एंटनी ज़र्चर का कहना है कि अगर डेमोक्रेटिक बहुमत वाला हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स होता तो महाभियोग की प्रक्रिया शुरू हो सकती थी. वास्तव में यह संभव नहीं है. यहां रिपब्लिकन का बहुमत है. यहां रिपब्लिकन 238 हैं जबकि डेमोक्रेट 193. सीनेट में 52 और 46 की स्थिति है. इसके साथ ही यहां दो निर्दलीय हैं. यहां भी बहुमत रिपब्लिकन का ही है.

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