एंजेलीना जोली पर भिड़े पड़ोसी देश मिस्र और सूडान

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Image caption एंजेलीना जोली

हॉलीवुड स्टार एंजेलीना जोली की फ़िल्म की सुगबुगाहटों ने दो देशों के बीच चल रहे विवाद को बढ़ा दिया है.

ख़बर है कि एंजेलीना जोली मानव सभ्यता में सूडान के योगदान पर फ़िल्म प्लान कर रही हैं, जिससे मिस्र के लोग खुश नहीं हैं.

बीबीसी अफ़्रीका के मोहनद हाशिम के मुताबिक़, 'यह झगड़ा 'किसके पिरामिड ज़्यादा बड़े हैं'- से कहीं ज़्यादा है.'

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कई मीडिया रिपोर्ट्स में कहा गया है कि क़तारी प्रोडक्शन कंपनी इस फ़िल्म में पैसा लगाएगी, जिसमें एंजेलीना के साथ लियोनार्डो डिकैप्रियो होंगे.

सूडान में ब्रिटिश राजदूत भी इस कहानी पर ट्वीट करके लड़ाई में फंस गए.

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सूडान के ट्विटर यूज़र्स ने वे तस्वीरें पोस्ट कीं, जिनमें एंजेलीना को एक न्युबियन रानी के तौर पर दिखाया गया था.

मिस्र के एक टीवी चैनल ने एंजेलीना का कॉस्ट्यूम डिज़ाइनर बताए जा रहे सूडानी डिज़ाइनर समर दार्विश का इंटरव्यू तक कर लिया.

पढ़ें: दक्षिण सूडान में अकालपढ़ें: क्या है दक्षिण सूडान का संकट?

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हालांकि इनमें से किसी भी चीज़ की पुष्टि अभी नहीं हुई है.

इससे पहले शहज़ादी की तस्वीरों से बढ़ा विवाद

मामला मार्च में बढ़ा था, जब पूर्व क़तरी अमीर की पत्नी शेख़ा मोज़ा संयुक्त राष्ट्र के प्रतिनिधि के तौर पर सूडान पहुंची थीं.

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Image caption शहज़ादी ने सूडान को दुनिया की मां कह दिया था. मिस्र के लोगों को यह पसंद नहीं आया.

अल-बाजरौयाह पिरामिड में उनकी यात्रा की तस्वीरें ख़ूब शेयर की गईं. लेकिन मिस्र में इस यात्रा का मज़ाक उड़ाया गया.

दरअसल, सूडान के ऐतिहासिक स्थलों के विकास के लिए क़तर 135 मिलियन डॉलर का निवेश करना चाहता है. मिस्र में बहुत सारे लोग इसे मिस्र के कमज़ोर होते पर्यटन क्षेत्र को खोखला करने और मिस्र नेतृत्व को नीचा दिखाने की कोशिश के तौर पर देखते हैं.

पढ़ें: वो मुल्क जिसके प्यार में पड़ गईं एंजेलीना जोली

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Image caption मिस्र के एक टीवी होस्ट ने सूडान के पिरामिडों को 'चीज़ ट्राएंगल' बताया

मिस्र के अल-असीमा टीवी पर एक 'टॉक शो' के होस्ट आज़मी मुजाहिद ने शहज़ादी की तस्वीरों के बहाने मिस्र के पिरामिडों का मज़ाक उड़ाते हुए कहा, 'दुनिया भर के सितारे पिरामिडों के साथ तस्वीरें खिंचवाते हैं, लेकिन शेख़ मोज़ा ने सूडान में दो 'चीज़ ट्राएंगल्स' के साथ तस्वीरें खिंचवाईं.'

किसके पिरामिड ऊंचे और पुराने?

सूडान के पिरामिडों के आकार का इस तरह मखौल सूडान के सूचना प्रसारण मंत्री को पसंद नहीं आया.

अहमद उस्मान ने कहा, 'सूडान के पिरामिड मिस्र के पिरामिडों से 2 हज़ार साल पुराने हैं.' हालांकि इस दावे पर पुरातत्वविदों में विवाद है.

तुरंत कुछ सूडानवासियों ने याद दिलाया कि उनके देश में पिरामिडों की संख्या (230) ज़्यादा है.

मिस्र के लोग हमेशा गर्व से मिस्र को 'दुनिया की मां' कहते रहे हैं. वह सात हज़ार साल पुरानी सभ्यता होने का दावा करते हैं. इसलिए क़तरी की शहज़ादी का हाथ से लिखा नोट उन्हें पसंद नहीं आया, जिसमें उन्होंने सूडान को 'दुनिया की मां' लिखा था.

दोनों देशों के बीच नील नदी के पानी, पड़ोसी लीबिया के तनाव और अरब खाड़ी के देशों से संबंधों को लेकर पहले से विवाद है.

मिस्र क्यों ख़फ़ा है?

मिस्र कई मामलों पर सूडान के रुख़ से असहज है.

सूडान इथियोपिया का क़रीबी है, जहां हाल ही में बना मिलेनियम बांध नील नदी में मिस्र की हिस्सेदारी घटा सकता है. जिसे मिस्र के नेता अपने मुल्क़ के लिए बड़ा ख़तरा मानते हैं.

दूसरा, सूडान के मिस्र के इस्लामवादियों और उनके पीछे खड़े क़तरी ख़ानदान से अच्छे संबंध हैं.

क़तर मिस्र के 'मुस्लिम ब्रदरहुड' को समर्थन देता है, जिसे मिस्र के राष्ट्रपति अब्दुल फत्ताह अल-सिसी ने बैन किया हुआ है.

पढ़ें: क्या है मुस्लिम ब्रदरहुड?

Image caption नील नदी को मिस्र अपनी पहचान मानता है.

मिस्र के लोग अकसर सूडान को अपना दक्षिणी प्रांत बताते हैं. वह कहते हैं कि इस क्षेत्र में ब्रिटिश औपनिवेशिक काल में दोनों देश एक थे.

सूडान के लोग मिस्र के टिप्पणीकारों के नस्लीय भाव को लेकर शिकायत करते हैं कि वे लोग उनके देश और सरकार का मज़ाक उड़ाते हैं.

इस विवाद से ही सूडान के लोगों ने अपने देश और विरासत के बारे में बताने के लिए हैशटैग #KnowSudan लॉन्च किया था.

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