हसन रूहानी दूसरी बार बने ईरान के राष्ट्रपति

इमेज कॉपीरइट Getty Images
Image caption हसन रुहानी

हसन रूहानी दूसरी बार ईरान के राष्ट्रपति चुन लिए गए हैं.

सरकारी टेलीविजन ने उन्हें दूसरी बार राष्ट्रपति चुने जाने पर बधाई दी है.

चुनाव समिति के प्रमुख अली असग़र अहमदी ने सरकारी टेलीविजन पर बताया कि मतगणना पूरी गई है. हसन रूहानी को कुल चार करोड़ मतों में से 57 फ़ीसदी वोट मिले हैं.

यानी उन्हें मिलने वाले मतों की संख्या 2 करोड़ 30 लाख रही.

आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार उनके विरोधी उम्मीदवार एक करोड़ 15 लाख वोट मिले हैंउनके 'कट्टरपंथी' प्रतिद्वंद्वी इब्राहिम रईसी ने मतदान में गड़बड़ियों का आरोप लगाते हुए शिकायत की है. उन्होंने रूहानी के समर्थकों पर वोटिंग बूथों पर सैकड़ों प्रतिबंधित तरीकों से प्रोपेगेंडा फैलाने का आरोप लगाया है.

ईरान में 70 फ़ीसदी मतदान दर्ज़ किया गया था. वोटरों का उत्साह को देखते हुए वोट देने का समय 5 घंटे आगे बढ़ाना पड़ा था.

ईरान शर्तें मानेगा, बशर्ते दूसरे भी मानें: रूहानी

इमेज कॉपीरइट AFP, Reuters
Image caption इब्राहिम रईसी, हसन रुहानी

चुनाव अधिकारियों ने बताया कि मतदान की अवधि 'अनुरोध' और 'उत्साही मतदाताओं की भागेदारी' को देखते हुए बढ़ाई गई.

68 साल के हसन रूहानी सुधार और परिवर्तन का नारा देते हुए 2013 में पहली बार ईरान के 11वें राष्ट्रपति बने थे. चार साल के पहले दौर के बाद बतौर राष्ट्रपति उम्मीदवार यह उनका दूसरा चुनाव था.

इमेज कॉपीरइट Getty Images
Image caption हसन रुहानी के समर्थक

वहीं 56 साल के रईसी कट्टरपंथी न्यायविद हैं. उन्हें ईरान के सर्वोच्च नेता आयतुल्लाह अली ख़ामनेई का क़रीबी माना जाता है.

ईरान में साल 1985 से हर पदस्थ राष्ट्रपति दोबारा निर्वाचित हुए हैं. साल 1985 में ख़ामनेई दोबारा चुने गए थे.

ग्लासगो कैलेडोनियन यूनिवर्सिटी से पीएचडी डिग्री प्राप्त रूहानी को शब्दशिल्पी कहा जाता है. कहते हैं कि रूहानी कड़वे फैसलों को मीठी चाशनी में डुबोकर लिया करते हैं.

इमेज कॉपीरइट Getty Images
Image caption हसन रुहानी के समर्थक

उनके चार साल के शासनकाल की सबसे बड़ी उपलब्धि ईरान का पश्चिमी देशों के साथ परमाणु समझौता रहा, जिसके तहत यूरोप और अमरीका समेत संयुक्त राष्ट्र संघ ने ईरान पर लगे प्रतिबंधों को हटा लिया.

2015 में पश्चिमी देशों के साथ हुए समझौते से ईरानी समाज की जितनी अपेक्षाएं बढ़ी उतना सकारात्मक असर ईरान की अर्थव्यवस्था पर नहीं पड़ा.

ईरान में राष्ट्रपति चुनाव फ़्रांसीसी चुनावी प्रणाली की तर्ज़ पर होते हैं. पहले दौर के मतदान में यदि किसी भी एक उम्मीदवार को 50 फीसद से अधिक वोट नहीं मिलते हैं तो दोबारा वोट डाले जाते हैं.

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)

मिलते-जुलते मुद्दे