महँगी पड़ सकती है जवानी की वो भूल

  • 20 मई 2017
फ़ेसबुक
Image caption फ़ेसबुक पर असतर्कता से मुश्किल को तो निमंत्रण नहीं दे रहे (प्रतीकात्मक तस्वीर)

फ़ेसबुक पर कभी किसी क्षण में आपने अपने प्रेमी या अपनी प्रेमिका को कोई अंतरंग तस्वीर भेजी होगी, और बिना समझे कंप्यूटर में किसी रैन्समवेयर को डाउनलोड कर लिया होगा - बिना ये सोचे कि इसका नतीजा कितना भयंकर हो सकता है?

बांग्लादेश डिजिटल पथ पर तेज़ी से आगे जा रहा है, मगर इसके साथ ही वहाँ तेज़ी से बढ़ रहा है -साइबर अपराध. और ये टीवी या सिनेमा के पर्दे पर दिखने वाली चीज़ भर नहीं रही, ये घटनाएँ हमारे-आपके पास ही हो रही हैं, लगातार.

प्यार में डूबी एक बेपरवाह युवती ने अपनी आपबीती कुछ यूं बताई - "तीन साल पहले मेरा एक प्रेम संबंध था, तब हमारी उम्र कम थी, हम लोगों ने कुछ तस्वीरों का लेन- देन किया, आप कह सकते हैं उनमें कुछ आपत्तिजनक भी थीं... "

ये बातें जो कह रही हैं, मान लेते हैं कि उनका नाम मिस एक्स है. वे ढाका के एक नामी कॉलेज में उच्च-माध्यमिक की पढ़ाई कर रही हैं.

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Image caption पुरानी पोस्ट से भी मुश्किल आ सकती है (प्रतीकात्मक तस्वीर)

अबोध उम्र में की गई ग़लती का नतीजा

तीन साल पहले, जब वो मिस्टर वाई से प्यार करती थीं, तब वे एक कमउम्र किशोरी थीं.

वो प्रेम तो बहुत दिन पहले ख़त्म हो गया, मगर उस अबोध उम्र में हुए उस प्रेम का दंश वो आज भुगत रही हैं.

एक शाम फ़ेसबुक पर एक फ़ेक आईडी से मिस एक्स को एक संदेश मिला - 'आपकी तस्वीरें हमारे पास हैं, विकास को पाँच हज़ार टका भेजें, वरना तस्वीरें फ़ेसबुक पर पोस्ट कर दी जाएँगी. '

आईडी फ़र्ज़ी थी, मगर तस्वीरें असली. तीन साल पहले फ़ेसबुक पर भेजी गईं, वही 'कुछ आपत्तिजनक' तस्वीरें.

ये मिस्टर वाई की हरकत तो नहीं? संदेह आया मन में.

जवानी के दिनों के कठोर सबक

मगर, प्रेम संबंध ना रहने के बाद भी दोनों लोगों के बीच संपर्क बरक़रार है.

मिस्टर एक्स ने तत्काल मिस्टर वाई को फ़ोन कर घटना के बारे में बताया.

ढाका के नामी विश्वविद्यालय में पढ़ रहे मिस्टर वाई दूसरे ही दिन सुबह-सुबह अपनी पूर्व प्रेमिका के कॉलेज के सामने पहुँचे और उन्हें भरोसा दिया कि मुश्किल की इस घड़ी में वो उनके साथ खड़े रहेंगे.

मिस्टर एक्स ने उन्हें अपनी आशंका के बारे में बताया, मिस्टर वाई ने कहा कि वो ये ब्लैकमेलिंग नहीं कर रहे, बल्कि 'इसमें तो उनकी भी तस्वीरें हैं, और उनकी भी बदनामी होगी'.

मिस एक्स को भी लगा, मिस्टर वाई इसमें नहीं हैं, क्योंकि प्रेम संबंध ना रहने पर भी, वो 'अच्छे दोस्त' हैं.

इसका मतलब ये हुआ कि मिस एक्स की अतिसंवेदनशील तस्वीरें किसी तीसरे व्यक्ति के हाथों में पड़ गई हैं, और अगर वो बाहर हो गईं, तो उनके लिए समाज में एक मुश्किल स्थिति आ सकती है.

घर पर भी नहीं बताया जा सकता, माता-पिता को ये अच्छा नहीं लगेगा, और इसलिए पुलिस के पास भी नहीं जाया जा सकता, क्योंकि तब माता-पिता को पता चल जाएगा.

मदद माँगना आसान नहीं

और इसलिए अब वो पहुँचे हैं क्राइम रिसर्च ऐंड ऐनालिसिस फ़ाउंडेशन की चौखट पर, जो एक ग़ैर-सरकारी संगठन है, जो मिस एक्स जैसे विपत्ति में पड़े व्यक्तियों की मदद करता है.

उनके पास ऐसे अनेक लोग पहुँचते हैं, यहाँ तक कि पुलिस और जासूसी संस्थाएँ भी तरह-तरह के साइबर अपराधों की तह तक पहुँचने के लिए उनके यहाँ आते हैं.

मगर सबसे ज़्यादा आती हैं, लड़कियाँ और युवतियाँ.

Image caption मिनहार मोहसिनुद्दीन के पास मदद के लिए अधिकतर लड़कियाँ और युवतियाँ पहुँचती हैं

संगठन के संस्थापक साइबर एक्सपर्ट मिनहार मोहसिनुद्दीन बताते हैं, "इनकी परेशानी की मूल वजह है फ़ेसबुक का बिना सोचे-समझे इस्तेमाल करना. और एक ख़ास तरह के अपराधी उनकी इस कमज़ोरी का फ़ायदा उठाते हैं. "

ब्लैकमेलर ने जिस विकास का नंबर दिया है, मिनहार ने अपनी दक्षता दिखाते हुए, उसके मालिक का पूरा पता-ठिकाना निकाल लिया है. वो उत्तर बांग्लादेश के नौगांव शहर का एक दुकानदार है.

मिनहार उन्हें फ़ोन लगाते हैं, और समझ जाते हैं कि वो व्यक्ति भी संभवतः ब्लैकमेलर नहीं.

शायद किसी चालाक अपराधी ने केवल उसका नंबर इस्तेमाल किया, क्योंकि उन्होंने अपनी दूकान से लेकर अपने विज़िटिंग कार्ड समेत तमाम जगहों पर अपना नंबर लिखा हुआ था.

Image caption रैन्समवेयर के हमले के बाद हैकर्स ऐसे संदेश छोड़ते हैं

उन्होंने नौगांव थाना में एक साधारण डायरी दर्ज करवाई, और पुलिस की सलाह पर वो इंतज़ार कर रहे हैं कि अगर विकास के नाम से कोई पाँच हज़ार टका देने आता है, तो वो तत्काल पुलिस को ख़बर कर देंगे.

लेकिन संभवतः ब्लैकमेलर को शक हो गया है, वो और मिस एक्स के साथ संपर्क नहीं कर रहा.

घटना अभी तक यही है. मगर इससे मिस एक्स की चिंता मिटी नहीं है. हाँ ये है कि वो अभी तक पुलिस के पास नहीं गई हैं.

पुलिस भी मजबूर

ढाका पुलिस के प्रवक्ता मसूद रहमान कहते हैं, साइबर अपराध के शिकार कई लोग, बदनामी के डर से पुलिस के पास नहीं आते. इसलिए ऐसे अपराधों को रोकना और अपराधियों को पकड़ना कठिन होता जा रहा है.

हालाँकि वो बताते हैं कि बांग्लादेश में आईसीटी ऐक्ट के नाम से एक नया क़ानून बना है और साइबर अपराध की रोकथाम के लिए एक नया विभाग भी खोला गया है.

रहमान सलाह देते हैं कि इस तरह की किसी भी परिस्थिति में फँसने पर लोगों को पुलिस के पास जाना चाहिए.

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