वैज्ञानिक जिसने अमन के लिए वतन से गद्दारी की

  • 21 मई 2017
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Image caption जनवरी 1988 में चैंग अमरीका पहुंचे

1988 में ताइवान पहली बार परमाणु बम बनाने की कोशिश कर रहा था, लेकिन सैन्य वैज्ञानिक चैंग सिएन ने उसके अरमानों पर पानी फेर दिया.

चैंग इस परमाणु कार्यक्रम के अहम शख़्स थे. उन्होंने अपनी पत्नी को छुट्टियों पर डिज़्नीलैंड भेज दिया और ख़ुद ताइवान छोड़कर अमरीका में बस गए.

73 साल के चैंग अब अमरीका के इदाहो प्रांत में रहते हैं. उन्हें उनके देश में बहुत सारे लोग 'ग़द्दार' मानते हैं, लेकिन चैंग कहते हैं कि अपने देश को बचाने के लिए उसे धोखा देना ज़रूरी था.

वह कहते हैं, 'अगर मुझे दोबारा ऐसा करना पड़े तो दोबारा करूंगा.'

चीन के ख़िलाफ़ परमाणु बम

ताइवान से अप्रिय रिश्तों वाली चीन की कम्युनिस्ट सरकार 1960 के दशक से परमाणु बम बना रही थी. ताइवान को लगता था कि उस पर कभी भी हमला हो सकता है. यह छोटा-सा द्वीप 1949 के गृह युद्ध के बाद चीन से अलग हुआ था. तब से चीन इसे अपना अलगाववादी प्रांत मानता है और हर क़ीमत पर उसे अपने साथ मिलाने की बात करता है.

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Image caption फैक्ट्री 221 में चीन ने अपने पहले परमाणु बम का परीक्षण किया था

चैंग ताइवान न्यूक्लियर एनर्जी रिसर्च इंस्टीट्यूट के डिप्टी डायरेक्टर थे. यही संस्था परमाणु कार्यक्रम देख रही थी. 1980 के शुरुआती दशक में वह सीआईए के लिए गुप्त रूप से काम करने लगे.

वह ताइवान में अच्छी तनख़्वाह के साथ ऐशो-आराम की ज़िंदग़ी बिता रहे थे. लेकिन उनके मुताबिक, '1986 में सोवियत यूनियन में चेर्नोबिल हादसा हुआ और वह सोचने लगे कि ताइवान को परमाणु बम बनाना चाहिए या नहीं.'

अमरीका चाहता था कि ताइवान अगर परमाणु कार्यक्रम रोक दे तो यह शांति और चीन-ताइवान दोनों देशों के लिए फ़ायदेमंद होगा.

चैंग इस बात से सहमत हो गए. वह कहते हैं, 'मेरी सहमति की सबसे ज़रूरी वजह ये थी कि उन्होंने मेरी सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए बड़े प्रयास किए थे.'

अब उन्हें ख़ुद को और अपने परिवार को वहां से निकालना था.

पहले बीवी-बच्चों को छुट्टी पर भेजा

चैंग एक सैन्य वैज्ञानिक थे और उस वक़्त ताइवान सेना के लोग बिना इजाज़त देश नहीं छोड़ सकते थे. इसलिए पहले उन्होंने अपने बीवी-बच्चों को छुट्टियों पर जापान के डिज़्नीलैंड भेज दिया.

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Image caption ताइवान में चैंग अपने बच्चे के साथ

उनकी पत्नी बैटी बताती हैं कि उन्हें अपने पति की दोहरी ज़िंदग़ी के बारे में कुछ पता नहीं था. उन्हें चैंग ने बताया था कि यह अमरीका में नई नौकरी के बारे में है.

अगले दिन चैंग ने सीआईए से मिले एक फ़र्ज़ी पासपोर्ट के सहारे अमरीका की फ़्लाइट ले ली. पुरानी रिपोर्टों को ख़ारिज़ करते हुए उन्होंने कहा कि वह अपने साथ एक भी दस्तावेज़ नहीं ले गए थे.

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पत्नी को चिट्ठी भिजवाकर बताया सच

उधर टोक्यो में चैंग की पत्नी को एक महिला ने चैंग की चिट्ठी दी. तब उन्हें पता चला कि उनका पति सीआईए का जासूस है और उसने अवैध तरीक़े से ताइवान छोड़ दिया है. उस चिट्ठी में लिखा था कि तुम कभी ताइवान नहीं लौटोगी और वहां से सीधे अमरीका आओगी.

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Image caption चैंग अपनी पत्नी बैटी के साथ

चैंग का परिवार जब सिएटल में फ़्लाइट से उतरा तो चैंग वहां मौजूद थे. उन्हें वर्जीनिया की एक सुरक्षित जगह ले जाया गया क्योंकि ताइवान के एजेंट और अतिवादी देशभक्त उनकी हत्या कर सकते थे.

अमरीका ने दबाव बनाकर रुकवा दिया परमाणु कार्यक्रम

चैंग से अमरीका को जो ख़ुफ़िया जानकारी मिली, उसकी बदौलत दबाव बनाकर अमरीका ने ताइवान का परमाणु कार्यक्रम एक महीने के अंदर रुकवा दिया.

माना जाता है कि ताइवान उस वक़्त परमाणु बम बनाने से सिर्फ़ एक या दो साल दूर था.

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Image caption चैंग की कहानी पर यह किताब आई है

चैंग दशकों तक चुप रहे. लेकिन रिटायरमेंट के बाद उन्होंने एक किताब के ज़रिए सारी बातें सामने रखीं. दिसंबर में छपी यह किताब चेन शेन ने चैंग से बात करके किताब लिखी है. इसके बाद से ताइवान में यह बहस ज़ोर पकड़ने लगी कि चैंग ने सही किया या नहीं.

कुछ लोग परमाणु युद्ध की आशंका को टालने के लिए उनकी तारीफ़ कर रहे हैं. कुछ मान रहे हैं कि ताइवान को अपनी रक्षा के लिए वे हथियार बनाने ज़रूरी थे.

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'मैं ताइवान से प्यार करता हूं'

ताइवान ने चैंग के ख़िलाफ़ जो अरेस्ट वॉरंट जारी किया था, वह 17 साल पहले एक्सपायर हो चुका है. लेकिन चैंग की ताइवान लौटने की कोई योजना नहीं है.

वह उस आलोचना का सामना नहीं करना चाहते और अपने परिवार को भी नकारात्मक असर से बचाना चाहते हैं.

1990 में वह इडाहो में बस गए थे. चैंग इडाहो की अमरीकी सरकार की एक लैब में सलाहकार और वैज्ञानिक इंजीनियर के तौर पर काम करने लगे और 2013 में रिटायर हो गए.

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Image caption 1995 में अमरीका में चैंग परिवार की तस्वीर

उनका एकमात्र अफ़सोस यह है कि वह अपने मां-पिता को उनकी मौत से पहले नहीं देख सके.

वह कहते हैं, 'ताइवान से प्यार करने के लिए आपको ताइवान में होना ज़रूरी नहीं है. मैं ताइवान से प्यार करता हूं. मैं ताइवान का हूं. मैं चीनी हूं. मैं नहीं चाहता कि दोनों तरफ़ से चीन के लोग एक-दूसरे की जान ले लें.'

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