5 तरीक़ों से दुनिया पर वर्चस्व की चीन की योजना

  • 21 मई 2017
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Image caption 2000 साल पहले प्राचीन सिल्क रोड पूर्व और पश्चिम को व्यापारिक और सांस्कृतिक तौर पर जोड़ता था. चीन इसे हाई स्पीड ट्रेनों से फिर जीवित करना चाहता है.

यह बहुत बड़ा और ख़र्चीला इंफ़्रास्ट्रक्चर प्लान है जिसके ज़रिए चीन दुनिया में अपना असर बढ़ाना चाहता है.

चीन ने बंदरगाहों, सड़कों और रेल नेटवर्क के पुनर्निर्माण के लिए यह महत्वाकांक्षी आर्थिक योजना शुरू की है, जिसके तहत वह अरबों डॉलर का निवेश करेगा. इसे 'वन बेल्ट वन रोड' (न्यू सिल्क रूट) नाम दिया गया है.

इसके ज़रिये वह पूर्व और पश्चिम को जोड़ने वाले दो हज़ार साल पुराने रास्ते को पुनर्जीवित करना चाहता है.

इसी हफ़्ते चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने कहा था, 'हम चाहते हैं कि वैश्विक प्रगति के लिए नई आर्थिक ताकतें खड़ी करें, विकास के नए प्लेटफ़ॉर्म बनाएं और वैश्वीकरण को इस तरह दोबारा संतुलित करें कि वह हर आदमी की पहुंच में हो.'

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Image caption शी जिनपिंग के साथ रूसी राष्ट्रपति पुतिन.

उन्होंने कहा कि नए सिल्क रूट का मक़सद एशिया और दुनिया के बाक़ी देशों से रिश्ते सुधारना है. नए सिल्क रूट की पहली 'कोऑपरेशन फ़ोरम' बीते सोमवार को बीजिंग में ख़त्म हुई, जिसमें रूस और तुर्की के राष्ट्रपति और अर्जेंटीना और चिली के नेता शामिल हुए.

वर्ल्ड बैंक के अध्यक्ष जिम योंग किम ने इसे 'महत्वाकांक्षी और अपनी तरह का पहला प्रयास' बताया है.

आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, इसके लिए अब तक 210 बिलियन अमरीकी डॉलर (135 लाख करोड़ रुपए) की फ़ंडिंग की व्यवस्था हो गई है.

सितंबर 2013 में जिनपिंग ने इसकी आधारशिला रखी थी.

पढ़ें: नए सिल्क रूट पर ख़र्च हमारा, फ़ायदा सभी देशों का: चीन

क़ाग़ज़ों पर चीन इसका मक़सद यूरोप, एशिया, अफ़्रीका और बाकी जगहों पर आर्थिक एकीकरण बताता है. पर कुछ पश्चिमी देश मानते हैं कि यह अर्थव्यवस्था से इतर अपना असर बढ़ाने की कोशिश है.

बीबीसी की चीन मामलों की विशेषज्ञ कैरी ग्रेस के मुताबिक, मध्य एशिया और पाकिस्तान और श्रीलंका के बंदरगाहों तक तेल और गैस की पाइपलाइनों का इस्तेमाल भविष्य में सैन्य मक़सद से भी किया जा सकता है.

आपको उन पांच बड़े प्रोजेक्ट्स के बारे में बताते हैं, जिन्हें आर्थिक कारोबार बढ़ाने के लिए चीन ने शुरू किया है.

1. चीन और यूरोप के बीच हाईस्पीड मालगाड़ी

ख़र्च: 242 बिलियन अमरीकी डॉलर

चीन अभी ऐसी क़रीब 20 ट्रेन लाइनें चलाता है जो सीधे लंदन, मैड्रिड और रॉटरडैम जैसे यूरोपीय शहरों से जुड़ती हैं. चीन और मैड्रिड के बीच एक साल से ज़्यादा समय से ट्रेनें चल रही हैं और यह दुनिया की सबसे लंबी रेल सेवा है.

अब जिनपिंग सरकार इस नेटवर्क को अनुकूल और अधिक तेज़ बनाना चाहती है. हालांकि यह चीनी प्रोडक्ट्स ले जाने के पारंपरिक तरीक़े के मुक़ाबले ख़र्चीला ज़रूर होगा.

चीन की योजना है कि बीजिंग से मॉस्को के बीच 7 हज़ार किलोमीटर की दूरी 30 घंटे मे पूरी करने वाली हाई स्पीड ट्रेनें चलाई जाएं. रूसी सरकार के नियंत्रण वाली रूसी रेलवे कंपनी के मुताबिक, इसका पहला चरण 2025 तक पूरा हो सकता है.

कैरी ग्रेस के मुताबिक, इसके ज़रिए चीन ख़ुद को एक ग्लोबल व्यापारिक ताक़त के तौर पर स्थापित करना चाहता है.

2. एशिया में ट्रेन नेटवर्क

इसके दो हिस्से हैं.

  • दक्षिण-पूर्वी एशिया में ख़र्च: 7 बिलियन अमरीकी डॉलर (सिर्फ कुनमिंग और विएंटिएन के बीच ट्रेन के लिए)

चीन की योजना है कि वह अपने दक्षिणी शहर कुनमिंग को लाओस के विएंशिएन और बर्मा के रेलवे नेटवर्क से जोड़े.

अगर वो यह काम पूरा कर सका और थाइलैंड, कंबोडिया या वियतनाम में प्लान किए गए दूसरे प्रोजेक्ट शुरू कर सका तो वह दक्षिण पूर्वी एशिया के अलग-अलग हिस्सों में अपना जाल बिछा सकता है.

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  • इंडोनेशिया में हाईस्पीड ट्रेन का ख़र्च: 5.9 बिलियन अमरीकी डॉलर

चीन जकार्ता से बांडुंग के बीच इंडोनेशिया की पहली हाई स्पीड रेलवे लाइन बना रहा है. हालांकि कई जापानी कंपनियां भी यह प्रोजेक्ट हासिल करने की कोशिश में थीं, लेकिन इंडोनेशियाई सरकार ने चीनी कंपनियों को चुना.

पढ़ें: न्यू सिल्क रूट को लेकर चीन के इरादे क्या हैं

3. चीन-पाकिस्तान कॉरिडोर का ख़र्च: 55 बिलियन अमरीकी डॉलर

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Image caption पाकिस्तान का ग्वादर बंदरगाह

पाकिस्तान से अपने पुराने अच्छे संबंधों का फ़ायदा उठाते हुए चीन वहां निवेश करेगा और अरब सागर के ग्वादर पोर्ट के विकास में मदद करेगा.

दोनों देश मिलकर चीन के सिलिकन वैली कहे जाने वाले 'शेंज़ेन' का पाकिस्तानी संस्करण बनाना चाहते हैं.

इस प्रोजेक्ट से चीन को अपने उत्पादों के निर्यात के लिए एक ज़मीनी रास्ता मिल जाएगा और समुद्री डाकुओं और ख़राब मौसम वाले मलक्का की खाड़ी के रास्ते से निजात मिल जाएगी.

इस प्रोजेक्ट में विश्व की सबसे ऊंची काराकोरम सड़क का विस्तार भी शामिल है, जो चीन और पाकिस्तान को जोड़ेगी.

4. श्रीलंका में बंदरगाहों का विकास

ख़र्च: 1.4 बिलियन अमरीकी डॉलर

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Image caption श्रीलंका में भी बंदरगाहों पर काम कर रहा चीन

चीन का नया सिल्क रोड सिर्फ ज़मीन पर नहीं होगा. शी जिनपिंग समुद्री बंदरगाहों के विकास पर भी विचार कर रहे हैं.

श्रीलंका की राजधानी कोलंबो उनकी प्राथमिकता में है.

हालांकि श्रीलंका में सत्ता परिवर्तन से प्रोजेक्ट पर असर पड़ा था. लेकिन हाल की बातचीत के बाद काम दोबारा शुरू हो गया है.

पढ़ें: क्या है पाक की ग्वादर बंदरगाह परियोजना?

5. अफ़्रीका में प्रोजेक्टख़र्च: 13,800 मिलियन अमरीकी डॉलर

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Image caption इथियोपिया की राजधानी और जिबूती को जोड़ने वाली इस रेल सेवा को चीनी कर्मचारी चलाते हैं.

केन्या के दो मुख्य शहरों- नैरोबी और मोम्बासा को जोड़ने वाला एक रेल रूट भी चीन बना रहा है.

यह पश्चिमी अफ़्रीका में बनाए जाने वाले उस बड़े ट्रांसपोर्ट नेटवर्क का हिस्सा है, जो केन्या को युगांडा, दक्षिणी सूडान, रवांडा और बुरुंडी की राजधानियों से जोड़ेगा.

बल्कि, इथियोपिया की राजधानी अदिस अबाबा से तटीय देश जिबूती तक एक ट्रेन लिंकिंग का उद्घाटन हो चुका है. समुद्र के इसी हिस्से में चीनी कंपनियां एक लॉजिस्टिक्स सेंटर भी बना रही हैं.

सामरिक मामलों के प्रोफ़ेसर पीटर डटन ने 'द न्यूयॉर्क टाइम्स' से बातचीत में इसे 'भारी रणनीतिक विकास' कहा.

उन्होंने कहा, 'यह अफ़्रीका में चीनी व्यापार और क्षेत्रीय हितों की रक्षा के लिए किया गया नौसैनिक शक्तियों का विस्तार है. विस्तारवादी ताक़तें अक़्सर यही करती हैं और चीन ने 200 साल पहले के ब्रिटिश साम्राज्य से सबक लिए हैं.'

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