प्रधानमंत्री बदलेगा, पर क्या बदलेगा नेपाल?

नेपाल के प्रधानमंत्री पुष्प कमल दहाल उर्फ प्रचंड ने बुधवार को अपने पद से इस्तीफ़ा दे दिया. दो बार प्रधानमंत्री रहे प्रचंड इस बार नौ महीने तक प्रधानमंत्री रहे. गठबंधन दलों को किए वायदे के अनुसार उन्होंने स्थानीय चुनाव के पहले चरण के बाद प्रधानमंत्री पद छोड़ दिया.

प्रचंड के कार्यकाल की क्या विशेषता रही?

प्रचंड की पहली बड़ी राजनीतिक सफलता ये है कि उन्होंने नेपाल में स्थानीय चुनाव करवाए हैं. पिछले करीब 20 साल से वहाँ स्थानीय निकायों के चुनाव नहीं हुए थे. लेकिन 10 दिन पहले ही नेपाल के सात प्रांतों में से तीन में स्थानीय चुनाव हुए. अब नेपाल में तीन हफ्ते बाद दूसरे दौर के स्थानीय चुनाव होने हैं.

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इसके अलावा नेपाल में बिजली कटौती की बड़ी समस्या थी. प्रशासकीय तौर पर प्रचंड की सफलता बिजली के क्षेत्र में उनका काम है. प्रचंड ने भारत से बिजली ख़रीदकर कम से कम राजधानी काठमांडू में बिजली कटौती की समस्या को सुलझा लिया है.

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चुनौतियां कई हैं प्रचंड के सामने

कहां विफल रहे प्रचंड?

पुष्प कमल दहाल के कार्यकाल की जितनी सफलताएं थीं उतनी ही नाकामियां प्रधानमंत्री के तौर पर उनके दूसरे कार्यकाल में रही हैं.

साल 2015 में नेपाल में नए संविधान को लागू किया गया था लेकिन नए संविधान में सही प्रतिनिधित्व न मिलने की शिकायत लेकर मधेशियों ने बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन किया था.

नेपाल में कई महीनों तक हिंसा जारी रही और नेपाल-भारत सीमा पर कथित तौर पर मधेशियों ने नाकेबंदी की थी जिससे नेपाल को काफ़ी परेशानियों का सामना करना पड़ा था.

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प्रचंड ने प्रधानमंत्री बनते वक्त कहा था कि वो संविधान में संशोधन करके मधेशी दलों को राजनीतिक मुख्यधारा में ले आएंगे लेकिन प्रचंड इसमें सफल नहीं हो सके हैं.

इसके अलावा वो अपने ही दल के बिखराव को समेट नहीं सके हैं.

शेर बहादुर देउबाफिर प्रधानमंत्री बने तो सफल हो पाएंगे?

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Image caption 62 वर्षीय दहाल ने तत्कालीन सरकार से अलग होकर देउबा की नेपाली कांग्रेस के साथ गठजोड़ किया था

अब तीन बार नेपाल के प्रधानमंत्री रह चुके नेपाली कांग्रेस के नेता शेर बहादुर देउबा प्रधानमंत्री बन सकते हैं.

अगले 10 दिनों में देउबा की नियुक्ति की औपचारिकताएं पूरी होने की संभावना है.

1990 के दशक में वो ख़ास सफल नहीं रहे थे लेकिन दूसरी बार जब वो स्थानीय चुनाव कराने में विफल रहे तो नेपाल के राजा ने उन्हें पदमुक्त कर दिया था और बाद में फिर उन्हें फिर से प्रधानमंत्री बनाया था.

देउबा प्रधानमंत्री और नेपाली कांग्रेस के नेता के तौर पर नेपाल में असफल माने जाते हैं.

अब अगर वो प्रधानमंत्री बनते हैं तो उनकी सफलता का दारोमदार इस पर रहेगा कि वो संविधान संशोधन को संसद से पारित करवा पाएंगे या नहीं.

चीन की तरफ़ झुकाव में होगा बदलाव?

शेर बहादुर देउबा के प्रधानमंत्री बनने पर प्रचंड के अंतरराष्ट्रीय नीतियों में बदलाव के आसार बनेंगे.

माओवादी नेता प्रचंड के नेतृत्व की सरकार का भी किसी अन्य वापपंथी सरकार की तरह चीन की तरफ़ लगाव सा दिखता था. अभी हाल ही में एक हाइड्रो इलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट चीन की सरकारी कंपनी को दिया गया. ये फ़ैसला प्रचंड के इस्तीफ़ा देने से एक दिन पहले लिया गया.

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लेकिन शेर बहादुर देउबा की सार्वजनिक छवि पश्चिमी देशों की तरफ़ झुकाव वाली समझी जाती है इसलिए नेपाल की अंतरराष्ट्रीय नीतियों में बदलाव की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता है.

तीन बार देश के प्रधानमंत्री रहे देउबा सत्तारूढ़ गठबंधन की प्रमुख पार्टी नेपाली कांग्रेस के नेता हैं.

वो शेरबहादुर देउबा ही थे जिनके कार्यकाल में माओवादी संघर्ष के दिनों में तब प्रचंड को जिंदा या मुर्दा पकड़ने पर 50 लाख रुपए का इनाम रखा गया था.

(बीबीसी संवाददाता कुलदीप मिश्र के साथ बातचीत पर आधारित.)

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