रूस क्यों चाहता है, इस लेखक को पढ़ें अमरीकी?

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अमरीका के पूर्व विदेश मंत्री जॉन केरी ने कहा है कि जो लोग अमरीका की नई सरकार को प्रभावित करना चाहते हैं उन्हें रूसी भाषा सीखनी चाहिए.

केरी ने हॉर्वर्ड यूनिवर्सिटी के केनेडी स्कूल ऑफ़ गवर्नमेंट में एक भाषण के दौरान ये बात कही.

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इस दौरान केरी ने डोनल्ड ट्रंप और उनकी टीम की तीखी आलोचना करते हुए ये तंज कसा. ट्रंप के ख़िलाफ़ 2016 के राष्ट्रपति चुनावों के दौरान कथित रूसी हस्तक्षेप की जांच हो रही है.

केरी के बयान पर रूस के विदेश मंत्रालय ने भी जवाब दिया कि पूर्व अमरीकी प्रशासन को सोवियत प्रचारक व्लादिमीर मायकोवस्की की कविताएं पढ़ लेनी चाहिए थी.

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Image caption मंत्रालय के प्रवक्ता मालिया ज़खारोवा ने तंज करते हुए मायकोवस्की को पढ़ने की सलाह दी

रूसी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता मालिया ज़खारोवा का इशारा कवि मायकोवस्की की उस कविता की ओर था जिसमें 1917 की कम्युनिस्ट क्रांति के नेता व्लादिमीर इलिच लेनिन की भाषा के रूप में रूसी भाषा का गुणगान किया गया है.

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रूस इस साल क्रांति का शताब्दी वर्ष मना रहा है, जिसके बाद अमरीका और रूस के बीच शीत युद्ध की प्रतिद्वंद्वता शुरू हुई.

केरी ने बुधवार को कहा था, "मुझसे अक्सर पूछा जाता है कि सरकार पर असरदार प्रभाव डालने का राज क्या है. मुझे लगता है कि हाल ही में ये नज़ारा बदल गया है. मैं कहता हूं या तो आप पद की दौड़ में शामिल हों या हॉर्वर्ड केनेडी स्कूल से डिग्री हासिल करें. व्हाइट हाउस के मामले में मैं कहूंगा कि रोसेटा स्टोन की किताब ख़रीदें और रूसी सीखें."

रोसेटा स्टोन एक ऑनलाइन लैंगुएज लर्निंग दस्तावेज है.

इसके बाद ज़ाखारोवा ने अपने फ़ेसबुक पोस्ट में कहा कि रूस से ये चूक हो गई कि वो पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा के कार्यकाल में अमरीकी विदेश विभाग को मायकोवस्की की कविताओं का संग्रह नहीं दे पाया.

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Image caption कवि और कलाकार मायकोवस्की लेनिन के नेतृत्व में हुई रूसी क्रांति के धुर समर्थक थे

उन्होंने 1927 में लिखी मायकोवस्की की एक लंबी कविता 'टू ऑवर यूथ' का ज़िक्र किया, जिसका अनुवाद है-

"अगर मैं एक बुज़ुर्ग काला इंसान होता, मैं रूसी सीखता, बिना हताशा या काहिली के, केवल इसलिए कि रूसी लेनिन की भाषा थी."

इस कविता में कहा गया है कि तत्कालीन सोवियत संघ के कम्युनिस्ट शासन में विभिन्न राष्ट्रों के बीच रूसी भाषा एक कड़ी का काम कर सकती है.

रूस में मायकोवस्की को आज भी उनकी कविता और उनके अग्रणी समाजवादी यथार्थवादी पोस्टरों के लिए सम्मान की नज़र से देखा जाता है.

1925 में उन्होंने उत्तरी अमरीका के दौरे के बाद अमरीका की कड़ी आलोचना की थी.

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ज़ाखारोवा ने तंज कसते हुए लिखा है, "मैं नहीं जानती कि 'इस' अमरीकी प्रशासन के लिए कौन सी रूसी भाषा की किताब खरीदनी जानी चाहिए, लेकिन 1917 के शताब्दी वर्ष के मौके पर मायकोवस्की का एक छोटा संग्रह ख़रीदना बेहतर रहेगा."

रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने 1995 में 1991 में हुए सोवियत संघ के विघटन को '20वीं शताब्दी की सबसे बड़ी भू-राजनीतिक आपदा' कहा था.

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