चीन में कुंवारापन सबसे बड़ी धरोहर?

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चीन में एक टीवी सीरियल के बहाने इन दिनों लड़कियों के कुंवारेपन पर बहस छिड़ी हुई है.

क्या आज के चीन में भी लड़कियों के लिए कुंवारी होना सबसे बड़ी धरोहर है.

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चीन की सबसे मशहूर टीवी सीरियल हो चुकी 'ओडी टू जॉय' ने इस बहस को देश में व्यापक पैमाने पर छेड़ दिया है.

इस सीरियल के दूसरे सीजन में जीवन के अलग-अलग क्षेत्रों की पांच खूबसूरत महिलाओं की कहानी दिखाई जा रही है.

ये पांचों महिलाएं शंघाई के एक अपार्टमेंट में एक ही मंजिल पर रहती है.

यह शो चीन की महिलाओं में ख़ासा लोकप्रिय है.

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यह शो 'सेक्स एंड सिटी' की तर्ज पर है. जिसकी थीम है कि बड़े शहरों में औरतों को रोमांस, करियर, और दोस्ती से जुड़ी किस तरह की कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है.

इस शो के एक दृश्य में क़ी यींगयींग फूट-फूटकर रोती हुई अपने बॉयफ्रेंड के बारे में कहती हैं, "उसने मुझसे पूछा कि क्या मैं कुंवारी है."

यह जानने के बाद कि उन्होंने पहले से ही किसी के साथ सेक्स कर रखा है, उनके बॉयफ्रेंड ने उनसे रिश्ता तोड़ लिया.

क़ी यींगयींग भोली-भाली युवती हैं. वो अपने रिश्ते को किसी भी बात से अधिक प्राथमिकता देती है.

सीरियल के एक दृश्य में उन्हें अपने दोस्तों के साथ पार्टी करते हुए दिखाया गया है लेकिन अचानक ही पार्टी में भंग पड़ता हुआ दिखता है.

क्योंकि उनके पड़ोसी पार्टी के दौरान उनके सेक्स रिश्ते का खुलासा सब के सामने कर देते हैं.

क़ी का बॉयफ्रेंड इसके बाद आग बबूला हो जाता हैं और उन्हें छोड़कर चला जाता है.

चीन में सेक्स एजुकेशन की हालत बहुत बुरी है. ऐसे कई उदाहरण हैं जिसमें जीव विज्ञान पढ़ाने वाले पुरुष शिक्षक की जब महिलाओं के प्रजनन के बारे में पढ़ाने की बारी आती है तो वो कक्षा से बाहर निकल जाते हैं और छात्रों को ख़ुद से पढ़ने की सलाह देते हैं.

ऐसा बहुत कम बार होता है कि माता-पिता अपने बच्चों से सेक्स को लेकर बातें करें.

दोगलापन है ये

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शंघाई की असिस्टेंट फ़िल्म प्रोड्यूसर ज़ी यीन ने बीबीसी से कहा, "21वीं सदी में कुंवारेपन पर छिड़ी यह बहस बहुत पुरानी पड़ चुकी है. टीवी शो को इस बहस का विषय बनाना 'बेकार' है. "

उनका मानना है कि शंघाई जैसे बड़े शहरों में महिलाएं बहुत आज़ाद है और पढ़ी-लिखी महिलाओं के लिए यह कोई परेशानी का सबब नहीं है.

लेकिन हर कोई यह मानने को तैयार नहीं कि कुंवारेपन को लेकर बहस आज की तारीख में बेमानी हो चुकी है.

इस टीवी सीरियल को पसंद करने वाली एक महिला ज़ेई पेई ने बीबीसी से कहा कि जो लड़का खुद कुंवारा हो, उसका अपने लिए कुंवारी लड़की ढूढना तो समझ में आता है. लेकिन समस्या यह है कि इस मामले में मर्दों के बीच दोगलापन है. वो औरतों से तो सती सावित्री होने की उम्मीद करते हैं लेकिन ख़ुद नहीं होते.

सोशल मीडिया पर भी इसे लेकर बहस जारी है और लोग यौन सबंधों में बराबरी को लेकर बंटे हुए हैं.

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