28 ईसाइयों की हत्या के बाद मिस्र ने लीबिया में जिहादी शिविरों पर बोला हमला

  • 27 मई 2017
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Image caption शुक्रवार को चरमपंथियों ने 28 ईसाइयों की हत्या कर दी थी

मिस्र के सुरक्षाबलों ने 'चरमपंथी प्रशिक्षण शिविरों' पर हमला किया है. मिस्र के राष्ट्रपति अब्दुल फ़तह अल-सिसी ने कहा है कि सुरक्षाबलों ने ऐसा शुक्रवार को कॉप्टिक ईसाइयों पर हुए जानलेवा हमले के जवाब में किया है.

मिस्र की सरकारी मीडिया का कहना है कि पड़ोसी लीबिया के डेरेना में चरमपंथी प्रशिक्षण शिविरों पर 6 हमले किए गए.

इससे पहले मध्य मिस्र में ईसाई श्रद्धालुओं को ले जा रही एक बस पर बंदूकधारियों ने हमला किया था. इस हमले में कम से कम 28 ईसाई मारे गए थे और 25 अन्य जख़्मी हुए थे.

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इस हमले के बाद मिस्र के राष्ट्रपति सिसी ने कहा कि वह चरमपंथी शिविरों को नष्ट करने में कोई कसर नहीं छोड़ेंगे, चाहे ये शिविर कहीं भी हों.

सिसी ने शुक्रवार देर शाम टीवी के ज़रिए इन शिविरों पर हमले की घोषणा की थी. उन्होंने वादा किया कि लोगों की सुरक्षा हर हाल में की जाएगी.

सिसी ने कहा कि बाहरी देशों से समर्थित चरमपंथ को हर हाल में नष्ट किया जाना चाहिए. सिसी ने इस मामले में अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप से भी मदद मांगी है.

समाचार एजेंसी रॉयटर्स ने सैन्य सूत्रों के हवाले से बताया है कि लीबिया में विद्रोही ग्रुपों पर हमला किया गया. इन्हीं समूहों के लड़ाकों ने मिस्र के ईसाइयों पर जानलेवा हमला किया था.

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हालांकि 28 ईसाइयों की हत्या के मामले में किसी भी समूह ने तत्काल ज़िम्मेदारी नहीं ली है. हाल के महीनों में कथित इस्लामिक स्टेट ने मिस्र में ईसाइयों पर कई हमले किए थे.

2011 के अक्टूबर महीने में लंबे समय से लीबिया की सत्ता पर काबिज कर्नल गद्दाफ़ी को नैटो समर्थित बलों ने अपदस्थ कर दिया था. गद्दाफ़ी के मारे जाने के बाद से लीबिया में विद्रोही गुटों का वर्चस्व लगातार बढ़ता गया. अभी लीबिया में इन गुटों का व्यापक नियंत्रण है.

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Image caption मिस्र के राष्ट्रपति अब्दुल फ़तह अल-सिसी और अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप

लीबिया में इस उठापटक के बीच कथित इस्लामिक स्टेट ने भी अपनी पहुंच बना ली. इससे पहले भी मिस्र ने लीबिया में कथित इस्लामिक स्टेट के ठिकानों पर हवाई हमला किया था.

साल 2015 में मिस्र की सेना ने इनके कई ठिकानों को निशाना बनाया था. डेरेना के पास भी मिस्र ने यह अभियान चलाया था.

मिस्र ने यह क़दम चरमपंथियों द्वारा मिस्र के 21 ईसाइयों के सर कलम के वीडियो जारी करने के बाद उठाया था. अमरीका ने इस मामले में मिस्र को मदद करने की बात दोहराई है. व्हाइट हाउस ने इस हमले के बाद कहा कि वह राष्ट्रपति सिसी और वहां की जनता के साथ खड़ा है.

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