जब पाकिस्तानी राष्ट्रपति याहिया ख़ां को गच्चा देकर चीन पहुंचे किसिंजर

  • 28 मई 2017
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1 जुलाई 1971 को जब हेनरी किसिंजर पूर्वी एशिया के कुछ देशों के दौरे पर निकले तो उन्हें टैक्टिकल एयर कमांड के एक खिड़कीरहित विमान से काम चलाना पड़ा, क्योंकि उस समय व्हाइट हाउस के प्रेसीडेंशियल फ़्लीट में कोई विमान उपलब्ध नहीं था.

राष्ट्पति निक्सन एयरफ़ोर्स वन और उसके बैक अप विमान को अपने साथ सेंट क्लेमेंट ले गए थे. राष्ट्रपति बेड़े के दूसरे विमानों का इस्तेमाल उप राष्ट्रपति स्पाइरो एग्न्यू और मेलविन लेयर्ड कर रहे थे. इस यात्रा को बहुत तवोज्जो नहीं दी जा रही थी, इसलिए किसिंजर के साथ पत्रकारों का कोई दल भी नहीं चल रहा था.

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10 जुलाई, 1971 को न्यूयॉर्क टाइम्स के अंदरूनी पन्नों में तीन लाइन की एक छोटी-सी ख़बर छपी, "रावलपिंडी की गर्म और ह्यूमिड हवाओं से बचने के लिए, राष्ट्रपति निक्सन के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार हेनरी किसिंजर ने उत्तरी पाकिस्तान के ठंडे पहाड़ों में नथियागली में पूरा दिन बिताया. ख़बरें हैं कि किसिंजर की तबीयत थोड़ी नासाज़ है."

असल बात ये थी कि किसिंजर कभी नथियागली गए ही नहीं. साइरन बजाता और अमरीकी झंडे को लहराता किसिंजर की कारों का एक नकली काफ़िला नथियागली की ओर बढ़ा ज़रूर, लेकिन उसमें किसिंजर मौजूद नहीं थे. उनकी जगह उनका 'डबल' उनकी कार में चल रहा था. उसके साथ पाकिस्तान में अमरीकी राजदूत फ़ारलैंड, किसिंजर के सहायक डेविड हेल्प्रिन, दो सीक्रेट सर्विस एजेंट और एक पाकिस्तानी अधिकारी एम एम अहमद भी उस समूह में शामिल थे.

पेट दर्द का बहाना

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Image caption राष्ट्रपति रिचर्ड निक्सन के साथ हेनरी किसिंजर

हेनरी किसिंजर अपनी आत्मकथा, 'द व्हाइट हाउस इयर्स' में लिखते हैं, "मेरी योजना थी कि पाकिस्तान में उतरते ही मैं पेट दर्द का बहाना करूँगा. दूतावास के डॉक्टर मुझे कुछ दवाएं देंगे. मेरी तबीयत तब भी ठीक नहीं होगी और पाकिस्तान के राष्ट्रपति याहिया खाँ मुझे नथियागली स्थित उनके गेस्ट हाउस में एक दो दिन आराम करने की सलाह देंगे और मैं इस बीच चीन से गुप्त बातचीत करने के लिए बीजिंग उड़ जाऊंगा. लेकिन ईश्वर ने इस मक्कारी के लिए मुझे सज़ा देने का फ़ैसला किया और मेरी यात्रा का दिल्ली चरण पूरा होते होते वाकई मेरे पेट में दर्द हो गया और मुझे बिना किसी को बताए, बिना किसी डॉक्टरी मदद के उस दर्द को सहन करना पड़ा."

चीन जाने से एक दिन पहले याहिया ख़ाँ ने किसिंजर के सम्मान में एक रात्रि भोज दिया था. वहाँ उन्होंने समाँ बाँधते हुए ज़ोर से एलान किया कि इस्लामाबाद की गर्मी में किसिंजर की तबीयत सुधरने में देर लगेगी, इसलिए मैं आपसे अनुरोध करता हूँ कि आप मरी के ऊपर नथियागली के मेरे गेस्ट हाउस में आराम फ़रमाएं. जब किसिंजर ने झिझकने का नाटक किया तो याहिया बोले, "हमारे यहाँ कायदा है कि इन मामलों में मेज़बान की सुनी जाती है, मेहमान की नहीं."

याहिया का इसरार इतना वास्तविक था कि किसिंगर के सीक्रेट सर्विस एजेंटों ने रातोंरात उस जगह का मुआएना किया.

किसिंजर लिखते हैं, "क़रीब आधी रात को मेरे पास उस एजेंट का फ़ोन आया, ये बताने के लिए कि उस जगह आप हरगिज़ न जाइए क्योंकि वो जगह सुरक्षा की दृष्टि से महफ़ूज़ जगह नहीं है."

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Image caption याहिया ख़ाँ

9 जुलाई, 1971 की सुबह किसिंजर तड़के साढ़े तीन बजे उठे. उन्होंने जल्दी जल्दी नाश्ता किया. इससे पहले पाकिस्तान के विदेश सचिव सुल्तान मोहम्मद खाँ अपनी निजी गाड़ी से किसिंजर को विदा करने उनके गेस्ट हाउस पहुंचे.

सुल्तान ख़ां अपनी आत्मकथा 'मेमॉएर्स एंड रेफ़्लेक्शन' में लिखते हैं, "मैंने सरकारी कार इसलिए नहीं इस्तेमाल की क्योंकि इतने तड़के ड्राइवर को बुलाने का मतलब होता लोगों का ध्यान आकर्षित करना. मेरे बेटे रियाज़ ने रात को वो कार इस्तेमाल की थी. मुझे उसकी चाबी नहीं मिली तो मैं उसके पास गया. जब मैंने उसे जगाया तो उसका पहला सवाल था, माँ की तबीयत तो ठीक है. क्या आप इतनी सुबह डॉक्टर के पास जा रहे हैं? मैंने उसे संतुष्ट करने के लिए जवाब दिया, हम नथियागली जा रहे हैं. वो आँख मूंदते हुए बड़बड़ाया, सुबह के तीन बजे नथियागली? आपकी पीढ़ी मेरी समझ के बाहर है."

ठीक चार बजे पाकिस्तानी सेना के वाहन किसिंजर को इस्लामाबाद के चकलाता हवाई अड्डे ले गए. पाकिस्तान के विदेश सचिव सुल्तान ख़ाँ भी उनके साथ थे. पाकिस्तान में अमरीकी राजदूत फ़ारलैंड की सलाह पर किसिंजर ने सिर पर एक हैट लगा रखी थी और सुबह चार बजे उनकी आँखों पर धूप का चश्मा भी लगा हुआ था ताकि कोई उन्हें इस्लामाबाद हवाई अड्डे पर पहचान न ले. हवाई जहाज़ को याहिया ख़ाँ के निजी पायलट उड़ा रहे थे. किसिंजर का विमान चकलाटा हवाई अड्डे पर ही खुलेआम खड़ा था ताकि उस पर नज़र पड़ने वाले पत्रकारों को यही आभास हो कि किसिंजर अभी भी पाकिस्तान में हैं.

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Image caption राष्ट्रपति रिचर्ड निक्सन के साथ हेनरी किसिंजर

लेकिन इतनी एहतियात बरतने के बावजूद एक पाकिस्तानी पत्रकार एमएच बेग ने किसिंजर को इस्लामाबाद हवाई अड्डे पर कार से उतरते हुए देख लिया. बेग उस समय इस्लामाबाद में 'लंदन टेलिग्राफ़' के स्ट्रिंगर थे.

किसिंजर के जीवनीकार वाल्टर आइज़कसन लिखते हैं, "बेग ने हवाई अड्डे के एक अधिकारी से पूछा कि ये साहब जो अभी-अभी कार से उतरे हैं, क्या हेनरी किसिंजर हैं? जी हाँ, अधिकारी ने जवाब दिया. शायद उसे तब तक इस बात को गुप्त रखने के लिए ब्रीफ़ नहीं किया गया था. बेग ने उससे पूछा कि वो कहाँ जा रहे हैं ? जवाब मिला, चीन. बेग ने उखड़ी हुई सांसों के साथ तुरंत लंदन फ़ोन मिलाया. उनकी नज़र में उनके हाथ में साल का सबसे बड़ा स्कूप था. लेकिन जब टेलिग्राफ़ के संपादक तक ये बात पहुंची तो उन्होंने कहा कि शायद बेग ने शराब पी रखी है. उन्होंने उस कहानी को गंभीरता से नहीं लिया."

जहाज़ में घुसते ही किसिंजर की सबसे पहले नज़र चैंग वेन चेन पर पड़ी जो की चीनी विदेश मंत्रालय में यूरोपीय और अमरीकी मामलों के प्रमुख थे. उनको ख़ास तौर से चाई एन लाई ने इस्लामाबाद भेजा था ताकि वो अमरीकियों को दिखा सकें कि वो इस यात्रा को कितना अधिक महत्व दे रहे हैं. उनके साथ मशहूर दुभाषिया टैंग वेन शैंग भी थीं जो ब्रुकलिन, अमरीका में पैदा हुई थीं और झन्नाटेदार अंग्रेज़ी बोलती थीं. वो अपनेआप को दुभाषिया से थोड़ा बढ़ कर समझती थीं.

किसिंजर लिखते हैं कि, "कई मौकों पर वो हमारी उपस्थिति में भी चाई एन लाई तक से भिड़ने में ज़रा भी नहीं झिझकती थीं."

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इस बीच नथियागली में रह रहे किसिंजर के 'डबल' का पेट ख़राब हो गया. हुआ ये कि उन्होंने दिन के खाने की जगह आधा दर्जन आम खा डाले. सुल्तान ख़ाँ के पास ख़बर पहुंची कि उन्हें डॉक्टर की तुरंत ज़रूरत है. एक डॉक्टर से संपर्क कर कहा गया कि एक ईपी शख़्स को देखने के लिए तैयार रहिए.

सुल्तान मोहम्मद ख़ाँ अपनी आत्मकथा में लिखते हैं, "जब मैंने उस डॉक्टर से पूछा कि क्या आपने डॉक्टर किसिंजर का नाम सुना है? उसने जवाब दिया कि उसने न सिर्फ़ किसिंजर का नाम सुन रखा था बल्कि उनकी एक किताब भी पढ़ रखी थी. हमने उस डॉक्टर को बुलाने का विचार त्याग दिया और एक दूसरे डॉक्टर को संपर्क किया जिसने किसिंजर का नाम तक नहीं सुना था. उसने किसिंजर के 'डबल' को दवाई दी और अगले दिन तक वो ठीक हो गए."

चीन में चाई एन लाई से मुलाक़ात

उधर जब किसिंजर के विमान ने दोपहर सवा बारह बजे बीजिंग के सैनिक हवाई अड्डे पर लैंड किया तो उनका स्वागत पोलित ब्यूरो के सबसे वरिष्ठ सदस्यों में से एक मार्शल येह चिएन यिंग ने किया. उनको एक लंबी गाड़ी में शहर ले जाया गया जिसकी खिड़कियों पर पर्दे लगे हुए थे. बाद में किंसिंजर ने लिखा, "पीछे के शीशे से मैं देख सकता था बीजिंग की सड़कें बहुत साफ़-सुथरी थीं. ट्रैफ़िक बहुत ही कम था और सड़कों पर साइकिलें ही साइकिलें दिखाई दे रही थीं. गेस्ट हाउस पहुंचने पर मार्शल ने हमें इतना ज़बरजस्त खाना खिलाया कि मुझे अपने मेज़बानों से कहना पड़ा- सालों पहले एक चीनी पर अपने ख़ास मेहमान को भूखा मारने का आरोप लगा था. लगता है आप मुझसे उसकी भरपाई कर रहे हैं."

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Image caption चाउ एन लाई के साथ हेनरी किसिंजर

ठीक साढ़े चार बजे चाउ एन लाई गेस्ट हाउस पहुंचे. उनके दुबले भावपूर्ण चेहरे से आत्मविश्वास टपक रहा था. उन्होंने बेहतरीन ढ़ंग से सिली माओ ट्यूनिक पहन रखी थी.

किसिंजर लिखते हैं, "उन्होंने अपनी मनमोहक मुस्कान से हमारा मन मोह लिया. मुझे ये भी अंदाज़ा हो गया कि वो बहुत अच्छी तरह से अंग्रेज़ी समझते हैं, हालांकि वो चीनी में बोल रहे थे. मैंने गेस्ट हाउस के दरवाज़े पर पहुंच कर अपना हाथ बढ़ाते हुए उनका स्वागत किया. मुझे और उन्हें दोनों को याद आया कि किस तरह 27 साल पहले अमरीकी विदेश मंत्री एलन फ़ोस्टर डलेस ने उनके बढ़े हुए हाथ को अपने हाथ में लेने से इंकार कर दिया था. थोड़ी देर में ही मुझे पता लग गया कि दर्शन, इतिहास के विश्लेषण और हास्यप्रद वाकपटुता में चाउ एन लाई का कोई सानी नहीं था. अमरीकी घटनाओं ओर मेरे ख़ुद के बारे में उनकी जानकारी ग़ज़ब की थी."

किसिंजर और चाउ एन लाई के बीच मुलाकातों का दौर कई घंटों तक चला. किसिंजर ने एक चीज़ और नोट की कि इन लंबी बातचीतों के दौरान न तो कभी किसी फ़ोन ने व्यवधान उत्पन्न किया और न ही उनका कोई सहायक उनसे बात करने आया.

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Image caption चाउ एन लाई के साथ मुलाक़ात के दौरान हेनरी किसिंजर

पूरी बातचीत के दौरान चाउ एन लाई के सामने सिर्फ़ एक छोटा-सा कागज़ रखा था जिस पर उन्होंने टेलिग्राफ़िक भाषा में इक्के-दुक्के शब्द लिख रखे थे. बाद में किसिंजर ने टिप्पणी की कि 'हम दोनों के बीच बातचीत इस अंदाज़ में हो रही थी जैसे राजनीतिक दर्शन के दो प्रोफ़ेसर आपस में संवाद कर रहे हों'.

इस दौरान चाउ एन लाई ने निजी शालीनता दिखाने का भी कोई मौका हाथ से जाने नहीं दिया. जब किसिंजर के दल के एक व्यक्ति की तबीयत थोड़ी नासाज़ हुई तो चाई एन लाई उसे देखने उसके कमरे में जा पहुंचे. दोनों के प्रोटोकॉल दर्जे में काफ़ी बड़ा अंतर होने के बावजूद चाउ ने ज़ोर दिया कि उनकी मुलाकातें एक बार ग्रेट हॉल ऑफ़ पीपुल में होगी तो दूसरी बार किसिंजर के गेस्ट हाउस में. किसिंजर ने इस यात्रा के दौरान दो दिनों के अंदर सत्रह घंटे चाउ एन लाई के साथ बिताए. एक बार तो बातचीत का एक सत्र सात घंटे तक चला. बीच में खाने के अलावा कोई व्यवधान नहीं हुआ.

इस्लामाबाद में ही छूटी कमीज

किसिंजर ने अपने सहायक डेव हेल्पेरिन को निर्देश दे रखे थे कि इस लंबे दौरे के दौरान, ख़ास तौर से चीन की यात्रा के लिए, उनके लिए दो साफ़ कमीज़ें अलग से रख दी जाएं. लेकिन जब वो किसिंजर को छोड़ कर नथियावाली जा रहे थे तब उन्हें पता चला कि वो कमीज़ें तो किसिंजर इस्लामाबाद में ही छोड़ गए हैं. किसिंजर को इसका पता हवाई जहाज़ में ही चल गया था. जब उन्होंने बीजिंग में लैंड करने से पहले अपनी कमीज़ बदलनी चाही तो उन्हें पता चला कि वो कमीज़ें उनके सूट केस में हैं ही नहीं.

किसिंजर लिखते हैं, "मजबूरी में मुझे छह फ़िट दो इंच लंबे जॉन हाल्ड्रिज से एक कमीज़ उधार लेनी पड़ी. अगर आप उस दौरान खींची गई तस्वीरों को ग़ौर से देखेंगे तो पाएंगे कि उन में मेरी गर्दन ही नहीं दिख रही है, क्योंकि जॉन की गर्दन मुझसे कम से कम एक इंच छोटी थी."

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Image caption व्हाइट हाउस में राष्ट्रपति रिचर्ड निक्सन के साथ हेनरी किसिंजर

निक्सन की चीन यात्रा की तैयारी कर किसिंजर 11 जुलाई को इस्लामाबाद वापस पहुंचे. हवाई अड्डे से पहले उन्हें नथियागली ले जाया गया ताकि ये लगे कि वो नथियागली से वापस आ रहे हैं. शाम को छह बजे किसिंजर अमरीका वापस जाने के लिए अपने विमान पर सवार हुए. अमरीका में निक्सन उनका बेसब्री से इंतज़ार कर रहे थे.

उन्हें ये पता था कि यात्रा सफल रही है क्योंकि विमान में बैठते ही किसिंजर ने पहले से तय कोड 'यूरेका' उन तक भिजवा दिया था. बाद में सब कुछ हो जाने के बाद टाइम पत्रिका ने एक दिलचस्प टिप्पणी की, "किसी ने नोट ही नहीं किया कि इस यात्रा के दौरान एक शख़्स का वज़न, पाँच पाउंड बढ़ गया, जबकि वो प्रकट रूप से पेट के दर्द से जूझ रहा था."

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