इराक़ के बाहर कितनी मज़बूत है 'इस्लामिक स्टेट' की सल्तनत?

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पूरी दुनिया जहां एक ओर इराक़ और सीरिया में कथित इस्लामिक स्टेट के ख़िलाफ़ जंग लड़ने में लगी है, वहीं इससे जुड़े छोटे संगठन कई दूसरे देशों में अपने पांव पसार रहे हैं.

29 जून, 2014 को अपनी खिलाफ़त का झंडा बुलंद करने के बाद से कथित इस्लामिक स्टेट ने धीरे-धीरे दुनिया के कई हिस्सों में अपना नेटवर्क फैलाया है.

इनमें से कई स्थानीय चरमपंथी समूहों ने अबु बकर अल-बग़दादी के नेतृत्व के साथ अपनी वफादारी निभाने की कसमें खाई.

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कथित इस्लामिक स्टेट के एक सूत्र के मुताबिक, आधिकारिक रूप से 35 प्रांतों (विलायतों) में इस संगठन के नुमाइंदे नियुक्त हैं.

इनमें से 19 प्रांत इराक़ और सीरिया के हैं और 16 प्रांत सऊदी अरब, लीबिया और यमन के हैं. इसके अलावा कथित इस्लामिक स्टेट जिन दूसरी जगहों को अपना प्रांत बताता है, उनमें सिनाई (विलायत सना, अल्जीरिया (विलायत अल-जाज़ीर) और काकेथस (विलायत क़्वाक़ाज़) शामिल हैं.

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Image caption अफ़ग़ान सुरक्षा बल कथित इस्लामिक स्टेट के लड़ाकों से लड़ते रहे हैं, लेकिन उनका पूरी तरह से सफ़ाया नहीं कर पाए हैं.

जनवरी 2015 में कथित इस्लामिक स्टेट के खुरासान प्रांत की स्थापना अरब दुनिया के बाहर इस चरमपंथी संगठन का पहला आधिकारिक विस्तार था.

खुरासान, अफ़ग़ानिस्तान, पाकिस्तान, ईरान और मध्य एशिया से घिरे हुए हिस्से का प्राचीन नाम है.

कथित इस्लामिक स्टेट का विस्तृत क्षेत्र

कथित इस्लामिक स्टेट से जुड़े तमाम संगठन और क्षेत्र भले ही अलग-अलग स्वरूप और आकार में मौजूद हों, लेकिन उनमें आम बात यही है कि वो एक विशेष भू-भाग पर अपना अधिकार रखते हैं और उसे एक राज्य की तरह संचालित करते हैं.

इस चरमपंथी संगठन ने पिछले एक साल से ज्यादा वक़्त से अपने नए प्रांत के ऐलान से परहेज किया है. इसकी बड़ी वजह यह समझ में आती है कि इससे जुड़े समूहों को हुक़ूमत करने की अपनी क्षमता साबित करने की ज़रूरत होती है.

अलग-अलग देशों के कई संगठनों ने कथित इस्लामिक स्टेट के लिए वफ़ादारी की कसमें खाई हैं, इसके बावजूद यह संगठन उन्हें अपनी विलायत का दर्जा नहीं दे रहे हैं तो इसकी बड़ी वजह यह हो सकती है.

ट्यूनीशिया, इंडोनेशिया, सोमालिया और बांग्लादेश जैसे कई देश हैं जहां इस संगठन की मौजूदगी किसी ना किसी रूप में है और वह वहां होने वाली गतिविधियों पर भी दावा करता है, लेकिन आधिकारिक रूप से उसे अपना क्षेत्र नहीं मानता.

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खिलाफत की घोषणा के एक हफ़्ते बाद अल-बग़दादी ने पूरी दुनिया को पहली बार संबोधित किया था और उन जगहों की सूची जारी की थी जहां उनके मुताबिक़ मस्जिदों को अपवित्र किया जा रहा था और इस्लाम का पालन नहीं किया जा रहा था.

उन्होंने कई देशों का जिक्र किया था. इन देशों में अफ़ग़ानिस्तान, पाकिस्तान, ईरान के साथ अफ़्रीका, भारत, म्यांमार, चीन और फिलीपींस शामिल हैं.

इस तरह इस चरमपंथी संगठन ने ऐसा कहकर साफ किया कि उसका मक़सद विलायतों (प्रांत या क्षेत्र) के व्यापक प्रसार की मदद से अपनी हुकूमत का विस्तार करना है और ये विलायतें एक खिलाफत के नीचे होंगी.

इस संगठन ने इराक़ और सीरिया में अपनी ताकत बनाए रखते हुए हुए दूसरी जगहों पर अपने लिंक जोड़ने जारी रखे और उन्हें खिलाफत में शामिल होने को कहते रहे.

हालांकि अल-क़ायदा और तालिबान जैसे चरमपंथी समूहों की ओर से इस प्रस्ताव के ठुकराने के बावजूद कई दूसरे संगठनों ने इसे स्वीकार किया.

प्रभाव

कथित इस्लामिक स्टेट अपनी स्थापना के समय से ही पहले से चले आ रहे चरमपंथी समूहों से ख़ुद को अलग साबित करने की कोशिश करता रहा है.

उसने एक साथ वैचारिक और फ़ौजी दोनों मोर्चों पर हमला किया. हालांकि अफ़ग़ान तालिबान ने कथित इस्लामिक स्टेट को कड़ी टक्कर दी और अल-क़ायदा ने मध्य-पूर्व में उसका विरोध किया.

लेकिन इसके बावजूद कथित इस्लामिक स्टेट कई दूसरे देशों में अपना प्रभाव स्थापित करने में कामयाब रहा.

अपनी वैचारिक और प्रचार सामग्रियों में कथित इस्लामिक स्टेट अपने मानने वालों से कहता है कि काफिरों के बीच रहने के बजाए वो उनके प्रांतों में आकर रहें.

पिछले तीन सालों में पूरी दुनिया से कथित इस्लामिक स्टेट की विचारधारा मानने वाले लोग हज़ारों लोग सीरिया और इराक़ में उनकी सल्तनत में रहने गए हैं.

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नुकसान

लेकिन कथित इस्लामिक स्टेट को पिछले एक साल में बहुत नुकसान हुआ है और वो बहुत दबाव में है.

इराक़ और सीरिया के कई इलाके उनके नियंत्रण से बाहर हो गए हैं और इसके हज़ारों लड़ाके फ़ौजी कार्रवाई में मारे गए हैं.

पकड़ ढीली हो रही है इस्लामिक स्टेट की

सीमा पर सुरक्षा के कड़े इंतज़ाम होने की वजह से अब कथित इस्लामिक स्टेट में भर्ती होने के लिए जाने वाले लोगों की संख्या में कमी आई है.

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इराक़ से बाहर मजबूत

इसकी वजह से अब ये इराक़ और सीरिया के कथित इस्लामिक स्टेट में न जाकर, इस संगठन के दूसरे प्रांतों में जाकर स्थानीय समूहों से जुड़ रहे हैं.

ऐसी भी ख़बरें है कि इराक़ और सीरिया से भी निकलकर कथित इस्लामिक स्टेट के चरमपंथी इन स्थानीय समूहों में शामिल हो रहे हैं.

इससे इस्लामिक स्टेट के दूसरे प्रांतों में मौजूद समूह हर रोज मजबूत होते जा रहे हैं.

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