12 साल बाद 'गांजा क्वीन' अपने देश लौटी

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ऑस्ट्रेलिया की शेपेल कोर्बी को जब इंडोनेशिया में गिरफ़्तार किया गया था तब उनकी उम्र 28 साल थी. अब वो 40 साल की हो चुकी हैं. पूरे 12 साल बाद वो अपने वतन लौट रही हैं.

शनिवार को इंडोनेशिया में गांजे की तस्करी के आरोप में सज़ा भुगत रही पूर्व ब्यूटी थेरेपिस्ट ऑस्ट्रेलिया की शेपेल कोर्बी को 9 साल जेल की सज़ा और तीन साल पेरोल के बाद बाली से ऑस्ट्रेलिया प्रत्यर्पित कर दिया गया.

शेपेल को बाली एयरपोर्ट से 2004 में गिरफ़्तार किया गया था. उनके सामान में से 4 किलो से ज़्यादा गांजा बरामद किया गया था. 2005 में उन्हें 20 साल की सज़ा सुनाई गई थी.

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'गांजा क्वीन' के नाम से मशहूर

ये मामला उस वक़्त सुर्ख़ियों में रहा था. ऑस्ट्रेलिया के लोग शेपेल को मिली सज़ा पर काफ़ी नाराज़ हुए थे. कुछ लोगों का मानना था कि ये शेपेल के ख़िलाफ़ बेहद सख़्त फ़ैसला है और इस मामले का असर ऑस्ट्रेलिया और इंडोनेशिया की विदेश नीति पर भी पड़ा था.

शेपेल कोर्बी इस मामले में लगातार ख़ुद को बेक़सूर बताती रहीं.

2007 में शेपेल कोर्बी पर एक डॉक्यूमेंट्री 'गांजा क्वीन' भी बनी थी, जिसके निर्माता जेनिन हॉस्किन थे. तभी से उन्हें गांजा क्वीन के नाम से भी जाना जाता है.

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कम कर दी गई थी सज़ा

हालांकि शेपेल 2014 में जेल से रिहा हो गईं थीं लेकिन तीन साल से वो पेरोल पर थीं. वो पेरोल के नियमों के चलते ही तीन साल तक बाली से बाहर नहीं जा सकी थीं.

जेल में अच्छे व्यवहार के चलते इंडोनेशिया के राष्ट्रपति से की गई अपील के बाद उनकी सज़ा 5 साल कम कर दी गई थी.

जब शेपेल को ब्रिसबेन प्रत्यर्पित किया जा रहा था तो सैकड़ों पुलिसकर्मियों को तैनात किया था. उनकी बहन मर्सिडीज़ कोर्बी जो इंडोनेशिया में ही रहती हैं पत्रकारों और उनके कैमरों से शेपेल को बचा रही थीं.

गाड़ी में बैठने के बाद कोर्बी ने मीडिया वालों की तस्वीर खींच कर इंस्टाग्राम पर पोस्ट की थी.

उन्होनें अपने कुत्तों की तस्वीर भी पोस्ट की. साथ ही उन दोस्तों की भी जो उन्होनें इंडोनेशिया में बनाए थे. उन्होनें लिखा कि वो इन सबको याद करेंगी.

दरअसल इंडोनेशिया में ड्रग्स के क़ानून ऑस्ट्रेलिया के मुक़ाबले काफ़ी सख़्त हैं.

इसलिए जब शेपेल को सज़ा सुनाई गई थी तो ऑस्ट्रेलिया के लोगों में इसे लेकर तीखी प्रतिक्रिया हुई थी.

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इंडोनेशिया के स्थानीय मीडिया में जब जेल में शेपेल की मानसिक बीमारी ख़बरें आईं तो वहां भी उनके लिए सहानुभूति का माहौल बन गया था. हालांकि इसके बावजूद इंडोनेशिया में उन्हें अभियुक्त की तरह ही देखा गया.

बाली जेल के प्रमुख सुरुंग पसारीबू का कहना है 'हम उनके लिए प्रर्थना करेंगे कि वो पश्चाताप करें. भगवान चाहता है कि इंसान सही रास्ते पर लौट आए.'

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