कुलभूषण जाधव को जल्द फांसी के लिए पाक कोर्ट में अर्ज़ी

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पाकिस्तान के सुप्रीम कोर्ट में भारतीय नौसेना के पूर्व अधिकारी कुलभूषण जाधव को जल्द फांसी देने के लिए एक अर्ज़ी दायर की गई है.

समाचार एजेंसी पीटीआई की ख़बर के मुताबिक, अर्ज़ी में कहा गया है कि अगर कुलभूषण अपने ख़िलाफ़ सुनाई गई सज़ा को बदलवाने में नाकाम रहते हैं तो उन्हें जल्द फांसी दी जानी चाहिए.

इससे पहले अंतरराष्ट्रीय कोर्ट (आईसीजे) ने इस मामले में अंतरिम राहत देते हुए अंतिम फ़ैसला आने तक कुलभूषण की फांसी पर रोक लगा दी थी.

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Image caption कुलभूषण जाधव के भारतीय दोस्त उनकी तस्वीर के साथ

पाकिस्तानी वकील मुज़म्मिल अली ने शनिवार को विपक्षी दल पाकिस्तान पीपल्स पर्टी और पूर्व सीनेट अध्यक्ष एडवोकेट फ़ारूख़ नायक के ज़रिए अदालत में अर्ज़ी दायर की है.

अर्ज़ी में शीर्ष अदालत से गुहार लगाई गई है कि वो पाकिस्तान के क़ानूनों के तहत कुलभूषण की किसी भी पेंडिंग अपील पर जल्द फ़ैसला सुनिश्चित करने के लिए सरकार को निर्देश दे.

रविवार को पाकिस्तानी अख़बार डॉन ने ख़बर दी थी कि याचिकाकर्ता ने कोर्ट से गुज़ारिश की है कि कुलभूषण अगर अपनी सज़ा बदलवाने में नाकाम रहते हैं तो उनकी जल्द फ़ांसी के आदेश दिए जाएं.

पाकिस्तान का दावा है कि उन्होंने कुलभूषण को बीते साल 3 मार्च को बलूचिस्तान से गिरफ्तार किया था. पाकिस्तान के अनुसार कुलभूषण ईरान से यहां आए थे.

पाकिस्तान की सैन्य अदालत ने कुलभूषण जाधव को जासूसी और विध्वंसक गतिविधियों में शामिल होने के मामले में फांसी की सज़ा सुनाई थी.

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Image caption कुलभूषण जाधव मामले में आईसीजे का अंतरिम फ़ैसला आने के बाद पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर में संयुक्त राष्ट्र के ख़िलाफ़ प्रदर्शन हुए थे.

याचिकाकर्ता ने कोर्ट से कहा है वो इस बात की घोषणा करे कि जाधव की सुनवाई के दौरान समुचित कानूनी प्रक्रिया का पालन किया गया है. साथ ही, भारत की मांग के अनुसार उन्हें काउंसलर एक्सेस यानी राजनयिक मदद भी मुहैया कराई गई.

इस मामले में गृह और क़ानून मंत्रालय के ज़रिए सरकार, पकिस्तान आर्मी एक्ट, 1952 के तहत बने रावलपिंडी के सैन्य मुख्यालय को जवाबदेह बनाया गया है.

याचिका में कहा गया है कि कुलभूषण की मां ने पकिस्तान आर्मी एक्ट की धारा 131 और 133 (बी) के तहत 26 अप्रैल को अपील की है.

धारा 131 के अनुसार सैन्य अदालत के फ़ैसले से खुद को आहत मानने वाला व्यक्ति सरकार या संघीय सरकार के समक्ष याचिका दायर कर सकता है.

धारा 133(बी) के तहत सैन्य अदालत के फांसी या आजीवन कारावस की सज़ा सुनाए जाने के 40 दिनों के भीतर व्यक्ति उसके ख़िलाफ़ अपील कर सकता है.

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Image caption वरिष्ठ वकील हरीश साल्वे ने एक रुपये की फ़ीस लेकर कुलभूषण जाधव मामले में अंतरराष्ट्रीय कोर्ट में भारत का पक्ष रखा.

याचिका के अनुसार आईसीजे में भारत के व्यवहार, तर्क और प्रतिनिधित्व साल 2008 में हुए समझौते और राजनयिक संबंधों पर विएना कन्वेंशन का उल्लघंन है और पाकिस्तान इस कन्वेंशन की शर्तों को मानने के लिए बाध्य नहीं है.

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