बांग्लादेश: 'न्याय की देवी' लौट आई

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Image caption दोबारा लगाए जाने के बाद न्याय की देवी की मूर्ति

ढाका में बांग्लादेशी सुप्रीम कोर्ट के बाहर 'न्याय की देवी' की प्रतीकात्मक मूर्ति दोबारा लगा दी गई है.

दो दिन पहले यह मूर्ति इस्लामी संगठनों के विरोध के बाद हटा ली गई थी. उन्होंने 'गैर-इस्लामी' कहकर इस मूर्ति का विरोध किया था.

लेकिन जब मूर्ति हटा दी गई तो धर्मनिरपेक्ष संगठन सड़कों पर उतर आए.

पुलिस और धर्मनिरपेक्ष समूहों के कार्यकर्ताओं के बीच हिंसक झड़पें भी हुईं. इसके बाद कोर्ट परिसर में ही दूसरी जगह ये मूर्ति लगाने के आदेश दे दिए गए.

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Image caption मूर्ति हटाने का वामपंथी छात्र संगठनों ने कड़ा विरोध किया था.

मूर्ति की जगह क़ुरान चाहते थे विरोधी

यह मूर्ति साड़ी पहने हुए एक महिला की है, जिसकी आंखों पर पट्टी, एक हाथ में तलवार और एक में तराजू है. पिछले साल दिसंबर में यह मूर्ति बांग्लादेश के ढाका स्थित सुप्रीम कोर्ट के बाहर लगाई गई थी.

इसका सबसे मुखर विरोध हिफाज़त-ए-इस्लाम संगठन की ओर से किया जा रहा था.

इसके अलावा जो दूसरे संगठन थे उनमें अवामी उलामा लीग, बांग्लादेश खिलाफत मजलिस, इस्लामी आंदोलन बांग्लादेश और जमात-शिविर शामिल थे. उनकी मांग थी कि मूर्ति को नष्ट करके उसकी जगह क़ुरान स्थापित की जानी चाहिए.

पढ़ें: जब न्याय की देवी हटाई गई

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Image caption पहले सुप्रीम कोर्ट के ठीक सामने लगी थी मूर्ति. मूर्ति हटाए जाने के बाद की तस्वीर.

बदल दी गई मूर्ति की जगह

मूर्ति बनाने वाले मृणाल हक ने प्रशासन पर कट्टरपंथियों के आगे झुकने का आरोप लगाया था. रविवार को उन्होंने बताया कि प्रशासन ने उनसे कहा है कि वह कोर्ट परिसर में किसी और जगह पर मूर्ति लगा दें.

समाचार एजेंसी एएफपी के मुताबिक, उन्होंने कहा, 'हमने सुप्रीम कोर्ट से सटी दूसरी इमारत के सामने मूर्ति लगा दी है. मुझे इस बारे में कोई सफ़ाई नहीं दी गई, बस मूर्ति को दूसरी जगह लगाने को कहा गया.'

उनका कहना है कि मूर्ति अब कोर्ट के पिछली तरफ लगाई गई है, जहां उस पर बहुत कम लोगों की नज़र पड़ेगी.

विरोधियों ने दोबारा किया प्रदर्शन

मूर्ति को दोबारा स्थापित किए जाने के बाद मूर्तिविरोधी भी रविवार को कोर्ट परिसर में जमा हो गए और इसकी वापसी के ख़िलाफ प्रदर्शन किया.

पुलिस ने इस्लामी शासनतंत्र छात्र आंदोलन के कुछ लोगों को गिरफ़्तार किया है.

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Image caption इस्लामी संगठनों ने फिर किया विरोध प्रदर्शन

हालांकि इस विवाद पर प्रधानमंत्री शेख हसीना ने इस्लामवादियों का समर्थन किया था और कहा है, "सच बोलूं तो मुझे भी यह पसंद नहीं है. यह एक ग्रीक मूर्ति है और एक ग्रीक मूर्ति का यहां क्या काम? इसके अलावा ग्रीक मूर्ति को साड़ी भी पहना दी गई. यह तो और भी हास्यास्पद है."

यह पहली बार नहीं है जब बांग्लादेश में किसी मूर्ति को हटाना पड़ा है. साल 2008 में इस्लामी कट्टरपंथियों ने सूफ़ी कवि लालोन शाह की मूर्ति भी ढाका एयरपोर्ट के सामने से गिरा दी थी.

इसी साल उन्होंने राष्ट्रीय एयरलाइन बालाका की प्रतीकात्मक मूर्ति के साथ भी तोड़-फोड़ की थी.

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