चीन के अख़बार का दावा, नोटबंदी के कारण चीन से पिछड़ रहा है भारत

  • 2 जून 2017
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चीन के एक अख़बार ग्लोबल टाइम्स के मुताबिक भारत की अर्थव्यवस्था की दर में गिरावट आने से 'हाथी बनाम ड्रैगन' की लड़ाई और दिलचस्प हो गई है.

ग्लोबल टाइम की रिपोर्ट के मुताबिक भारत की अर्थव्यवस्था में मौजूदा गिरावट नरेंद्र मोदी के नोटबंदी के फ़ैसले की वजह से आई है.

भारत की अर्थव्यवस्था की विकास दर इस साल की पहली तिमाही में 6.1 फ़ीसदी के दर पर पहुंच गई है.

इसकी वजह से चीन अब दुनिया में सबसे तेज़ी से बढ़ती हुई अर्थव्यवस्था बन चुका है.

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चीन सबसे तेज़

ग्लोबल टाइम्स के रिपोर्टर शियो शिन ने लिखा है, "ऐसा लगता है कि 'हाथी बनाम ड्रैगन' की लड़ाई में भारत को गहरा झटका लगा है. भारत की अर्थव्यवस्था उम्मीद के विपरीत नीचे की ओर चली गई है. इसने पहली तिमाही में चीन को सबसे ज्यादा तेज़ी से बढ़ती हुई अर्थव्यवस्था बनने में मदद की है."

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चीन और भारत दुनिया की तेज़ी से बढ़ती हुई अर्थव्यवस्थाएं हैं.

इस रिपोर्ट में नोटबंदी के फ़ैसले को भारत की अर्थव्यवस्था के लिए घातक बताया गया है.

रिपोर्ट के मुताबिक, "यह तथ्य दिखाता है कि नोटबंदी की वजह से कैसे अर्थव्यवस्था बर्बाद हुई है. भारत सरकार को नवंबर में जैसा फ़ैसला लिया गया, वैसा फ़ैसला लेने से पहले दो बार गंभीरता से इस पर विचार करना चाहिए."

जेटली की दलील

हालाँकि भारत के वित्त मंत्री अरुण जेटली ने इसके लिए दुनिया भर में जारी आर्थिक मंदी को जिम्मेदार ठहाराया है. अरुण जेटली ने कहा है कि देश की जीडीपी ग्रोथ पर वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों का असर पड़ा है और वैश्विक परिदृश्य के मद्देनजर देश की जीडीपी वृद्धि दर बहुत अच्छी है.

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जेटली ने कहा कि हमें विरासत में खराब अर्थव्यस्था मिली, जहां भ्रष्टाचार व्याप्त था. तीन साल पहले तक देश की अर्थव्यवस्था पर निवेशकों को भरोसा नहीं था, लेकिन एनडीए सरकार ने तीन सालों में अर्थव्यवस्था की विश्वसनीयता दोबारा बहाल करने में सफलता हासिल की. अब विदेशी निवेशक दोबारा भारत की ओर रुख कर रहे हैं.

उन्होंने कहा, इन तीन वर्षों में हमने सख्त निर्णय लिए, भ्रष्टाचार रोकने के प्रयास किए और इसमें नोटबंदी एक बड़ा कदम था. हमने विदेशी निवेश बढ़ाने का काम किया और देश की छवि बदलने से इसमें फायदा मिला.

वित्त मंत्री ने नोटबंदी का जिक्र करते हुए कहा कि इससे तीन फायदे हुए हैं. जेटली ने कहा, 'नोटबंदी की वजह से लोग कैश ट्रांजैक्शन से परहेज करने लगे हैं और डिजिटाइजेशन में इजाफा हुआ है. दूसरा, टैक्स देने वालों की तादाद लगातार बढ़ रही है और तीसरा, काले धन की सामानांतर अर्थव्यवस्था खत्म हुई है.'

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