फ़्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों: एक ट्रंप विरोधी?

  • 3 जून 2017
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फ़्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों को एक बेहद दुर्लभ गौरव हासिल हुआ है.

वो गौरव है ट्विटर के इतिहास में पहला ऐसा फ़्रांसीसी शख़्स होने का, जिसे सबसे ज़्यादा बार री-ट्वीट किया गया है.

यानी सोशल मीडिया पर 'पेरिस समझौते' को लेकर उनकी राय को लोगों का भारी समर्थन हासिल हुआ.

24 घंटे से भी कम वक़्त में उनके डोनल्ड ट्रंप के फ़ैसले को 'धता बताने वाले संदेश' को करीब डेढ़ लाख बार शेयर किया गया.

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Image caption फ़्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने कहा है कि पेरिस समझौते से 'पृथ्वी फिर से महान बन सकेगी.'

दिलचस्प बात यह रही कि मैक्रों के संदेश को जिन लोगों ने समर्थन दिया है या री-ट्वीट किया है, उनमें हर पांचवां शख़्स अमरीकी नागरिक है.

प्रशंसकों का बढ़ता क्लब

टीवी चैनल पर अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप को दी अपनी प्रतिक्रिया में फ़्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने बड़ी विनम्रता से अपनी बात रखी थी.

प्रतिक्रिया अंग्रेज़ी भाषा में दी गई थी, जो अपने आप में नया था.

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ऐसा कम ही देखने को मिला है कि फ़्रांसीसी प्रतिनिधि अंग्रेज़ी भाषा में सार्वजनिक रूप से बयान दें. लेकिन मैक्रों ने अमेरिकी नेता के व्यक्तिगत कैंपेन को जवाब देने के लिए यह दुस्साहस भी किया.

बड़े ही अनूठे तरीके से मैक्रों ने नारा दिया, "मेक आवर प्लेनेट ग्रेट अगेन" यानी 'पृथ्वी को एक बार फिर हरा भरा बनाने की कोशिश की जाए'.

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माना जा रहा है कि मैक्रों के इस ट्वीट ने उन्हें एक नई पहचान भी दी है और वह पहचान है 'ट्रंप विरोधी' मैक्रों की.

फ़्रांसीसी नेता की इस पहचान को लोगों ने पसंद किया है. फ़्रांस में, अमरीका में और तो और दुनिया भर में भी. इस वाकये के बाद मैक्रों को वैचारिक तौर पर 'व्हाइट हाउस में बैठे उनके समकक्ष' के पूर्ण विरोधी के तौर पर देखा जा रहा है.

मैक्रों के ट्रंप को दिए गए संदेश को देखकर स्पष्ट दिखता है कि ट्रंप के आदेश से कई समीकरण बदलेंगे.

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