धरती मां के लिए पेरिस समझौता मंज़ूर: मोदी

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भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2015 के 'पेरिस समझौते' का पुरज़ोर समर्थन किया है.

उन्होंने कहा है कि जलवायु परिवर्तन से मुक़ाबला करने के लिए 2015 के पेरिस समझौते के तहत जो भी लक्ष्य तय हैं, वो उनसे भी आगे जाकर जलवायु परिवर्तन से लड़ने को तैयार हैं.

रविवार को पेरिस पहुंचे पीएम नरेंद्र मोदी ने ऐसा करने की कसम खाई है.

फ़्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के साथ एक साझा प्रेस वार्ता में बोलते हुए पीएम मोदी ने पेरिस समझौते का महत्व बताया और बोले कि धरती माता के लिए सभी का कुछ न कुछ योगदान ज़रूरी है.

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अब तक कई वैश्विक नेताओं ने अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप के अमरीका को पेरिस समझौते से बाहर ले जाने के फ़ैसले की आलोचना की है.

डोनल्ड ट्रंप का कहना है कि इस समझौते से अमरीका को नुकसान पहुंचेगा और लोगों की नौकरियों पर इसका असर होगा.

पेरिस समझौता अमरीका और 194 अन्य देशों से वैश्विक तापमान को कंट्रोल करने का आह्वान करता है.

इसका लक्ष्य वैश्विक तापमान को 2 डिग्री से नीचे रखना है. साथ ही यह कोशिश करना है कि वैश्विक तापमान को 1.5 डिग्री तक सीमित किया जाए.

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चीन और यूरोपीय संघ ने पेरिस समझौते के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई है, जबकि फ़्रांसीसी राष्ट्रपति ने ट्रंप के फ़ैसले को पृथ्वी और ख़ुद अमरीका के लिए भी 'एक बड़ी गलती' कहा है.

पेरिस में इमैनुएल मैक्रों के साथ हुई बैठक के बाद पीएम मोदी ने कहा कि फ़्रांस और भारत ने पेरिस समझौते पर 'कंधे से कंधा मिलाकर' काम किया है.

मोदी ने आगे कहा, "पेरिस समझौता पूरी दुनिया के लिए एक विरासत है. यह सभी के लिए एक समान है. यह एक उपहार है, जिसे यह पीढ़ी अपनी आने वाली पीढ़ियों को दे सकती है."

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चीन, अमरीका और यूरोपीय संघ के बाद भारत विश्व का चौथा सबसे बड़ा कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन करने वाला देश है.

राष्ट्रपति ट्रंप ने पेरिस समझौते पर होने वाले ख़र्च का हवाला देते हुए कहा था कि भारत और चीन जैसी प्रतिद्वंद्वी अर्थव्यवस्थाओं को इस समझौते के तहत अनुकूल व्यवहार मिला, जबकि अमरीका ने इस समझौते के लिए अपने सकल घरेलू उत्पाद में से तीन ट्रिलियन अमरीकी डॉलर (300 अरब अमरीकी डॉलर) खोए हैं.

हालांकि, ट्रंप के इस फ़ैसले के बाद भी अमरीका के कई राज्यपालों और महापौरों ने पेरिस समझौते का सम्मान करने और शर्तें निभाने का वचन दिया है.

पेरिस समझौते में क्या हुआ था

जलवायु परिवर्तन और ग्लोबल वॉर्मिंग का मतलब है उद्योगों और कृषि कार्यों से उत्सर्जित होने वाली गैसों से पर्यावरण पर होने वाले नकारात्मक और नुक़सानदेह असर.

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पेरिस समझौते का मक़सद गैसों का उत्सर्जन कम कर दुनियाभर में बढ़ रहे तापमान को रोकना था.

देशों ने निम्न बिंदुओं पर समझौता किया था:

  • वैश्विक तापमान को दो डिग्री सेल्सियस से नीचे रखना और कोशिश करना कि वो 1.5 डिग्री सेल्सियस से अधिक न बढ़े.
  • मानवीय कार्यों से होने वाले ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन को इस स्तर पर लाना की पेड़, मिट्टी और समुद्र उसे प्राकृतिक रूप से सोख लें. इसकी शुरुआत 2050 से 2100 के बीच करना.
  • हर पांच साल में गैस उत्सर्जन में कटौती में प्रत्येक देश की भूमिका की प्रगति की समीक्षा करना.
  • विकासशील देशों के लिए जलवायु वित्तीय सहायता के लिए 100 अरब डॉलर प्रति वर्ष देना और भविष्य में इसे बढ़ाने के प्रति प्रतिबद्धता.

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