कौन है पाकिस्तान में पैदा हुआ लंदन का हमलावर ख़ुर्रम बट?

  • 6 जून 2017
ख़ुर्रम बट, रिचिड रेदुआन और योसेफ़ ज़ाग़बा
Image caption ख़ुर्रम बट, रिचिड रेदुआन और योसेफ़ ज़ाग़बा

ख़ुर्रम बट ने लंदन हमले के दौरान मशहूर फ़ुटबॉल क्लब आर्सेनल की जर्सी पहन रखी थी.

जिन्हें वो मारना चाहते थे, उन्होंने भी कुछ वैसी ही जर्सियां पहन रखी होंगी. उसी रंग की जर्सियां.

यह वही रंग है, जो पिछले चंद सालों के दौरान दहशतगर्दों ने अपनी तमाम कार्रवाइयों के दौरान बहाया है.

ब्रिटेन की पुलिस ने मंगलवार को चरमपंथी हमले में शामिल तीनों हमलावरों के नाम जारी कर दिए हैं. इनमें ख़ुर्रम बट, रिचिड रेदुआन और योसेफ़ ज़ाग़बा का नाम सामने आया है.

इनमें पहला नाम ख़ुर्रम बट का है. उनकी आयु 27 वर्ष थी. शादीशुदा ख़ुर्रम दो बच्चों के पिता थे और पूर्वी लंदन में कई वर्षों से रह रहे थे.

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ख़ुर्रम बट प्रतिबंधित संगठन अल-महाज़ुरून नेटवर्क का हिस्सा थे, जिसके प्रमुख अंजुम चौधरी हैं.

अंजुम चौधरी फ़िलहाल जेल में हैं.

ब्रिटेन की नागरिकता

27 साल के बट अप्रैल, 1990 में पाकिस्तान में पैदा हुए थे. बाद में वो पाकिस्तान से इंग्लैंड चले गए और वहां की नागरिकता हासिल कर ली.

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Image caption लंदन ब्रिज के दक्षिण में बरो हाई स्ट्रीट की तरफ़ भागते हुए लोग

इंटरनेट पर मौजूद ख़ुर्रम बट के सीवी के मुताबिक़, उन्होंने बिज़नेस मैनेजमेंट की पढ़ाई की है और साल 2012 में वो एक कंपनी के लिए काम भी कर चुके हैं.

लंदन के ट्रांसपोर्ट विभाग ने इस बात की पुष्टि की है कि उन्होंने 2016 में छह महीने तक कस्टमर सर्विस के ट्रेनी के रूप में काम किया था. लेकिन उसी साल अक्टूबर में उन्होंने काम छोड़ दिया.

कोल कॉस्मेटिक नामक एक कंपनी के वो डायरेक्टर थे. उनकी यह कंपनी बंद हो चुकी है.

अभी तक यह स्पष्ट नहीं हुआ है कि वो चरमपंथी गतिविधियों में कब और किस तरह शामिल हुए, लेकिन इस बात के सबूत ज़रूर हैं कि वो अल-महाज़ुरून नेटवर्क में 2015 में शामिल हो गए थे.

डॉक्यूमेंट्री में दिखे चरमपंथी

इसका सबसे बड़ा सबूत चैनल फोर की एक डॉक्यूमेंट्री फ़िल्म 'जिहादी नेक्स्ट डोर' में उनकी मौजूदगी है.

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Image caption बट ने 2016 में छह महीने तक कस्टमर सर्विस के ट्रेनी के रूप में काम किया

इस डॉक्यूमेंट्री को साल 2016 में रिलीज़ किया गया था.

इस डॉक्यूमेंट्री में एएलएम नेटवर्क को दिखाया गया था. डॉक्यूमेंट्री में एक किरदार अंजुम चौधरी भी था, जिसका दायां हाथ था सिद्धार्थ धर.

सिद्धार्थ धर बाद में सीरिया चले गए. एक बार वो काले नक़ाब में कथित इस्लामिक स्टेट के फांसी देने वाले वीडियो में देखे भी गए थे.

चैनल फ़ोर की इस डॉक्यूमेंट्री में ख़ुर्रम बट को एक अहम दृश्य में देखा जा सकता है, जिसमें वो लंदन पार्क में इस्लामिक स्टेट के झंडे की नुमाइश पर एक ग्रुप के साथ खड़े हैं और पुलिस अधिकारी के साथ गुस्से से बात कर रहे हैं.

डॉक्यूमेंट्री में दिख रहा दूसरा अहम शख़्स अबू हलीमा है, जिस पर लंदन की पुलिस कड़ी नज़र रख रही है.

ख़ासतौर से इस बात की जानकारी मिलने के बाद कि उसका संबंध उस नौजवान से था, जो ब्रिटेन में दहशतगर्दी के जुर्म में सज़ा पाने वाला सबसे कम उम्र का नौजवान था.

ख़ुर्रम बट का रिश्ता और आगे जाता है

मैनचेस्टर में चरमपंथ विरोधी एक संगठन रमज़ान फ़ाउंडेशन के मोहम्मद शफ़ीक़ कहते हैं कि उन्हें याद है कि ख़ुर्रम बट ने साल 2013 में उस दिन उनसे बेअदबी से बात की थी, जिस दिन एएलएम के एक समर्थक ने लंदन के एक इलाक़े में ब्रितानी सैनिक ली रग्बी की हत्या कर दी थी.

मोहम्मद शफ़ीक़ कहते हैं, "जब मैंने अजुम चौधरी को दहशतगर्दी के समर्थन पर टोका, तो उन्होंने मुझे काफ़िर और हुकूमत का चमचा कहा. पुलिस आई और वो वहां से अंजुम चौधरी, ख़ुर्रम बट्ट और दूसरे लोगों को ले गई. मुझे कोई हैरत नहीं है कि ख़ुर्रम बट ने यह दहशतगर्दाना हमला किया होगा."

ख़ुर्रम निशाने पर

पूर्वी लंदन के निवासी एर्का गैसप्री ने बीबीसी को बताया है कि ख़ुर्रम बट अपने तीन साथियों के साथ मिलकर उनके बच्चों को भी चरमपंथी बनाने की कोशिश कर रहे थे.

उन्होंने बीबीसी टीम को बताया, "मैं करीब डेढ़ साल पहले ख़ुर्रम बट और उनके साथियों की तस्वीर लेकर पुलिस स्टेशन गई थीं और वहां अपनी शिकायत दर्ज कराई थी."

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एक व्यक्ति ने अपना नाम न ज़ाहिर करने की शर्त पर कहा है कि ख़ुर्रम बट जब लंदन ट्रांसपोर्ट में काम कर रहे थे, तब वो कम कपड़े पहनने वाली लड़कियों और महिलाओं के प्रति नफ़रत की भावना दिखाते थे.

उस व्यक्ति ने कहा कि वो ख़ुर्रम बट के इस रवैये से इतने परेशान हो गए थे कि उन्होंने चरमपंथ विरोधी हॉटलाइन पर फ़ोन कर दिया था.

तो क्या लंदन पुलिस और ब्रिटेन की ख़ुफिया एजेंसी एमआई 5 से कुछ छूट गया?

लंदन पुलिस के मुताबिक़, उसे 2015 में ख़ुर्रम बट के बारे में पता चला था, लेकिन उसके किसी चरमपंथी योजना में शामिल होने की बात सामने नहीं आई थी.

हालांकि चरमपंथ विरोधी हॉटलाइन पर ख़ुर्रम के बारे में फ़ोन आने के बाद उन्हें उन 500 लोगों की सूची में रखा गया था, जिनसे पुलिस कभी भी पूछताछ कर सकती है.

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लेकिन इसके बावजूद भी ख़ुर्रम के बारे में कोई ठोस बात पता नहीं चल सकी.

हमले के दौरान इन दोनों लोगों को और एक अन्य व्यक्ति को पुलिस ने गोली मार दी थी.

इस हमले में सात लोग मारे गए थे और 48 अन्य घायल हुए थे.

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