ब्रितानी चुनाव से जुड़ी 10 रोचक बातें

चुनाव नतीजों के दिन सभी तथ्यों को जान लेना मुश्किल होता है. सुर्ख़ियों से परे ब्रितानी संसदीय चुनाव से जुड़े ये कुछ तथ्य हैं जो शायद आपसे छूट गए हों.

इमेज कॉपीरइट PA
Image caption चुनाव हारने के बाद निक क्लेग काफ़ी उदास दिखे.

1. स्कॉटिश नेशनल पार्टी को सबसे बड़े नुकसान हुए हैं. पूर्व नेता एलेक्स सैलमंड जो 2007-2014 तक स्कॉटलैंड के प्रधानमंत्री भी रहे हैं, स्कॉटिश कंज़रवेटिव पार्टी के हाथों अपनी सीट हार गए हैं. संसद में एसएनपी के नेता एंगल रॉबर्टसन भी अपनी सीट हार गए हैं. उनकी सीट पर लेबर पार्टी की जीत हुई है. लिबरल-डेमोक्रेटिक पार्टी के नेता निक क्लेग भी शेफ़ील्ड हेलम सीट हार गए हैं. वो 12 सालों से इस सीट से सांसद थे. हालांकि उनकी हार से सभी चौंक गए हों, ऐसा भी नहीं है. गूगल पर पूछा गया सवाल था- निक क्लेग कौन हैं?

2. इस चुनाव में सबसे ज़्यादा लोगों ने किया मतदान. ये 1997 के बाद से सबसे ज़्यादा वोट प्रतिशत था. कुल 69 प्रतिशत लोगों ने मतदान किया.

3. युवा वोटरों को बूथ तक ले आए लेबर पार्टी के नेता जेरेमी कॉर्बिन. ऐसा प्रतीत हो रहा है कि लेबर पार्टी युवा वोटरों को रिझाने और पोलिंग बूथ तक लाने में कामयाब रही है. राजनीति शास्त्र के प्रोफ़ेसर जॉन कर्टिस के मुताबिक ऐसी सीटें जहां 18-24 आयु वर्ग के मतदाता ज़्यादा हैं, वहां लेबर पार्टी ने अधिक वोट हासिल किए हैं. युवा मतदाताओं वाली सीटों पर वोट प्रतिशत भी ज़्यादा रहा है. ज़्यादा वोट प्रतिशत वाली सीटों पर लेबर पार्टी को अधिक वोट मिले हैं.

ब्रिटेन चुनावः रिकॉर्ड संख्या में जीते भारतीय मूल के उम्मीदवार

ब्रिटेन में त्रिशंकु संसद, उल्टा पड़ा मध्यावधि चुनाव का दाँव

इमेज कॉपीरइट PA
Image caption लेबर पार्टी के नेता जेरेमी कोर्बिन ने युवा मतदाताओं को रिझाने की कोशिशें की थीं.

4. इस बार चुनाव में अब तक की सबसे ज़्यादा महिला सांसद चुनी गई हैं. इस बार संसद में 200 से ज़्यादा महिलाएं होंगी. 2015 में 196 महिला उम्मीदवारों ने चुनाव जीता था. इस साल लगभग तीस प्रतिशत उम्मीदवार महिलाएं थीं.

5. रूथ डेविडसन ने कंज़रवेटिव पार्टी के लिए सबसे बड़ी जीत हासिल की है. प्रधानमंत्री टेरीज़ा मे के लिए भले ही चुनाव नतीजे मुश्किल रहे हों, लेकिन स्कॉटिश कंज़रवेटिव नेता रूथ डेविडसन ने ब्रितानी राजनीति में हाल के सालों की सबसे बड़ी जीत हासिल की है. 1997 में टोनी ब्लेयर के समय में लेबर पार्टी की आंधी में स्कॉटिश कंज़रवेटिव नेताओं का सूपड़ा साफ़ हो गया था. 2015 के चुनावों में भी स्कॉटिश कंज़रवेटिव सिर्फ़ एक ही सीट जीत सके थे, लेकिन इस बार स्कॉटलैंड में कंज़रवेटिव पार्टी ने कुल 13 सीटें जीत ली हैं जो 1983 के बाद से सबसे ज़्यादा है.

इमेज कॉपीरइट Getty Images
Image caption स्कॉटलैंड में कंज़रवेटिव पार्टी की नेता रुथ डेविडसन ने पार्टी को 13 सीटों पर जीत दिलाई है.

6. संडरलैंड सीट ने सबसे पहले नतीजे देने का अपना ख़िताब खो दिया है. इस बार सबसे पहले नतीजे न्यू कासल से आए हैं. स्थानीय समयानुसार रात 11.01 बजे न्यू कासल सेंट्रल सीट के नतीजे घोषित हो गए थे.

7. प्रीत कौर गिल ने बर्मिंघम के एजबेस्टन से लेबर पार्टी के लिए सीट जीती है. 44 वर्षीय प्रीत कौर ब्रिटेन की पहली महिला सिख सांसद बन गई हैं. बर्मिंघम एजबेस्टन सीट पर 1953 से महिलाएं ही जीत रही हैं.

प्लेबैक आपके उपकरण पर नहीं हो पा रहा
बर्मिंघम एजबेस्टन से जीतीं प्रीत गिल

8. लेबर पार्टी ने उन सीटों पर अच्छा प्रदर्शन किया है जिन्होंने जनमत संग्रह में यूरोपीय संघ के साथ रहने के लिए वोट किया था. कंज़रवेटिव पार्टी को उन सीटों पर ज़्यादा वोट मिले हैं जिन्होंने ब्रेक्ज़िट के लिए वोट किया था.

9. प्रधानमंत्री टेरीज़ा मे जिस सीट पर चुनाव लड़ रहीं थीं वहां लॉर्ड बकेटहेड नाम के उम्मीदवार भी थे जिन्होंने 249 वोट हासिल किए हैं. लॉर्ड बकेटहेड 1987 में मारग्रेट थैचर के ख़िलाफ़ भी चुनाव लड़ चुके हैं. तब उन्हें 131 वोट मिले थे. उन्होंने 1992 में तत्कालीन प्रधानमंत्री जॉन मेजर के ख़िलाफ़ चुनाव लड़ा था.

इमेज कॉपीरइट Getty Images
Image caption प्रधानमंत्री टेरीज़ा मे के ख़िलाफ़ लॉर्ड बकेटहेड नाम के व्यक्ति ने भी चुनाव लड़ा.

10. कंज़रवेटिव पार्टी के जैक गोल्डस्मिथ ने रिचमंड पार्क सीट सिर्फ़ पैंतालीस वोटों से जीती है. नतीजा सुनिश्चित करने के लिए यहां दो बार वोट गिने गए. लेकिन सबसे नज़दीकी नतीजा रहा स्कॉटलैंड की फ़ीफ़े नॉर्थ ईस्ट सीट का जहां एसएनपी ने सिर्फ़ दो वोटों से जीत हासिल की. यहां वोटों की गिनती तीन बार हुई.

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)

मिलते-जुलते मुद्दे