क़तर पर नाकेबंदी में ढील दें खाड़ी देश: अमरीका

  • 10 जून 2017
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अमरीका विदेश मंत्री रेक्स टिलरसन ने कहा है कि खाड़ी देशों को क़तर के ख़िलाफ़ नाकेबंदी में ढिलाई देनी चाहिए.

सऊदी अरब की अगुवाई में छह खाड़ी देशों ने सोमवार को क़तर पर यात्रा प्रतिबंध लगाने के साथ-साथ कूटनीतिक संबंध तोड़ दिए थे.

इन देशों ने क़तर पर चरमपंथी गुटों को आर्थिक मदद देने का आरोप लगाया था.

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क्या नया हुआ

  • सऊदी अरब और उसके सहयोगियों ने 49 लोगों की सूची जारी की
  • सूची में मुस्लिम ब्रदरहुड के धार्मिक नेता यूसुफ़ अल क़ारादावी का नाम भी
  • क़तर ने कहा सूची में शामिल लोगों पर लगे आरोप निराधार
  • सऊदी अरब ने कहा- क़तर फलस्तीन के इस्लामी गुट हमास से संबंध तोड़े

टिलरसन ने कहा कि नाकेबंदी से लोगों को परेशानी हो रही है.

अमरीकी विदेश मंत्री ने क़तर के अमीर की चरमपंथी गुटों को आर्थिक मदद पर अंकुश लगाने के बयान की तारीफ़ तो की लेकिन कहा कि इस संबंध में और भी काफी कुछ करने की गुंजाइश है.

क़तर ने इस्लामिक गुटों को मदद करने के आरोपों से इनकार किया है.

परेशानियां

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Image caption क़तर के अमीर शेख तमीम बिन हम्माद अल थानी ने मई में राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप से मुलाकात की थी.

क़तर के अपने पड़ोसी देशों ख़ासकर सऊदी अरब से पिछले कई सालों से तनावपूर्ण रिश्ते हैं और सोमवार को अचानक सऊदी अरब की अगुवाई में छह देशों में क़तर को अलग-थलग करने के मक़सद से उससे रिश्ते तोड़ दिए थे. बहरीन, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात ने उनके देशों में रह रहे क़तर के नागरिकों को दो हफ्ते के अंदर देश छोड़कर चले जाने को कहा था. साथ ही अपने नागरिकों को भी हिदायत दी थी कि वे क़तर की यात्रा न करें.

टिलरसन ने वॉशिंगटन में कहा, "नाकेबंदी के कारण आम लोगों को परेशानी हो रही है. हम खाने की कमी देख रहे हैं, परिवारों को मजबूरन अलग होना पड़ रहा है और बच्चों को स्कूल छोड़ना पड़ रहा है."

टिलरसन ने कहा कि मौजूदा विवाद से आतंकवाद के ख़िलाफ़ लड़ने में क्षेत्रीय सहयोग पर असर पड़ेगा. अमरीका का क़तर में बड़ा एयरबेस है और यहाँ लगभग 10 हज़ार अमरीकी सैनिक हैं.

क़तर का तर्क

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क़तर, अपने मानवाधिकार परिषद के ज़रिए ये तर्क दे रहा है कि सऊदी अरब, बहरीन और संयुक्त अरब अमीरात उन सब लोगों के मानवाधिकारों का हनन कर रहे हैं जो उड़ानों पर प्रतिबंधों के कारण मुश्किलों का सामना कर रहे हैं.

क़तर का कहना है कि खाड़ी सहयोग परिषद के देशों के बीच सीमाएं कभी भी इस तरह से बंद नहीं रही हैं.

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