अलेप्पो में वापसी: युद्ध के दौर में चमेली के फूलों वाले घर की कहानी

  • 13 जून 2017
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सीरिया के गृह युद्ध ने जब 2012 में अलेप्पो शहर को चपेट में लिया तो ज़ाहिद ताजेद्दीन को अपना 450 साल पुराना घर छोड़ना पड़ा. घर से दूर घर की फ़िक्र उन्हें सताती रही, लेकिन बाद में उन्हें पता चला कि उनका घर अब बमबारी से घायल शहर में एक मेडिकल सेंटर में तब्दील हो गया है और वहां लोगों की जानें बचाई जा रही हैं.

ज़ाहिद ताजेद्दीन हमेशा इस ऐतिहासिक शहर के अपने पुराने घर में रहना चाहते थे. जिसके दरवाज़े के सामने फव्वारा था और दीवारों पर चमेली के फूल लटकते थे.

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Image caption घर के आंगन में ज़ाहिद की दादी और पिता

हालांकि ताजेद्दीन का बचपन आधुनिक अलेप्पो के एक आधुनिक फ़्लैट में बीता था. लेकिन वह हमेशा एक पुराना घर ख़रीदने का सपना देखते थे. फिर उन्हे जूदएदा में एक घर मिल गया.

स्कल्पटर और आर्कियोलॉजिस्ट के तौर पर करियर बनाने के बाद 2004 में उन्होंने यह पुराना घर ख़रीद लिया. यह घर 15वीं सदी में बनना शुरू हुआ था, लेकिन एक ऐसे शहर में जहां लोग 6 हज़ार साल से बसे हों, यह अपेक्षाकृत तौर पर नया घर था.

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Image caption ज़ाहिद ऐसा प्राचीन घर ख़रीदने का सपना देखते थे. फिर उन्हे जूदएदा में एक घर मिल गया.

ज़ाहिद कहते हैं, 'आपको हमेशा चमेली की ख़ुशबू आती है. ये अलेप्पो की सड़कों पर आम बात है. जादुई माहौल होता है.'

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Image caption जूदएदा की सड़कें ऐसे दरवाज़ों से सजी हुई हैं

जब सीरिया में लड़ाई शुरू हुई तो ताजेद्दीन लंदन में अपनी पत्नी और बच्चों के साथ रह रहे थे. 2012 में जब अलेप्पो और जूदएदा चरमपंथी लड़ाकों और सरकारी सैनिकों के बीच लड़ाई के मैदान में तब्दील हो गए तो वह दूर से देख रहे थे.

इस दौरान वह इंटरनेट पर लड़ाई से जुड़ी ख़बरें और वीडियोज देखा करते थे. वह बताते हैं, 'एक वीडियो में मेरे घर के सामने लड़ाई होती दिखी. मेरी छोटी सी सड़क पर लोग लड़ रहे थे और चिल्ला रहे थे.'

इससे भी ज़्यादा तक़लीफदेह यह था, जब 84 साल के उनके पिता सरकारी क्षेत्र के अपने घर से इस पुराने घर जाने के रास्ते में स्नाइपर गोली की चपेट में आ गए.

ताजेद्दीन कहते हैं, 'दो घंटे तक वो सड़क के किनारे ज़मीन पर लेटे रहे और उनके ऊपर से गोलियां गुज़रती रहीं.'

इसके बाद वह कभी वहां नहीं गए.

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Image caption 2013 में जूदएदा का एक पारंपरिक घर

ताजेद्दीन 2015 में अलेप्पो लौटे. वह याद करते हैं, 'सब बर्बाद हो चुका था. यह देखना बड़ा भावुक करने वाला था.'

वह अलेप्पो की एक ऊंची इमारत पर चढ़ गए. वहां से उन्हें धूल में मिल चुकी इमारतें और मलबे का ढेर दिखाई दिया.

यह दृश्य उन्हें रुलाने के लिए काफ़ी था.

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वह जूदएदा की ओर बढ़े, लेकिन अपने घर से 150 मीटर दूर सरकारी सैनिकों ने उन्हें लौटा दिया.

ताजेद्दीन कहते हैं, 'अफ़सर अच्छा आदमी था. उसने कहा कि तुम लकी हो. वरना हमें देखते ही गोली मारने के आदेश मिले हैं. ये युद्ध क्षेत्र है.'

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Image caption जूदएदा में चरमपंथी लड़ाकों की तोप

उधर, जब लड़ाई शुरू हुई तो अलेप्पो के एक फ़ार्मेसिस्ट अबू अहमद ने घायलों की मदद का काम शुरू कर दिया था. वह घर-घर जाकर लोगों को प्राथमिक उपचार दिया करते थे.

कुछ महीनों बाद वह गोदाम वाले ऐसे घर की तलाश में थे, जहां दवाइयां रखी जा सकें और तसल्ली से घायलों का इलाज किया जा सके. जूदएदा में उन्हें एक घर मिल गया. तब उन्हें नहीं पता था कि ये किसी ताजेद्दीन का घर है.

उन्होंने लिविंग रूम को रिसेप्शन बना लिया और कुछ कुर्सियां ले आए. एक कमरे में एक्स-रे होने लगा. नौ मरीज़ों के लिए बिस्तर का इंतजाम हो गया.

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Image caption कई बार मरीज़ों को आंगन में इंतज़ार करना पड़ता था

कुछ संस्थाओं की मदद से सारी दवाइयां मुफ़्त थीं.

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Image caption ताजेद्दीन के पड़ोसी घरों का मलबा

दिसंबर 2016 में जब सरकार ने पूर्वी अलेप्पो को वापस पा लिया तो ज़ाहिद अपने घर लौट आए. उनकी जानी पहचानी दुकानें, पास का स्कूल और मस्जिद- सब तबाह हो चुके थे.

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Image caption बेघर लोग अब भी मलबे में सोते हैं

ताजेद्दीन को अपने घर में मलबे से परिवार की तस्वीरें और बचपन में बनाई पेंटिंग मिलीं.

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अबू अब सीरिया के दूसरे शहर में एक और फार्मेसी खोलने की योजना बना रहे हैं.

ताजेद्दीन आख़िरी बार जब जूदएदा के अपने घर में ताला लगाकर निकले तो आंगन में चमेली का पेड़ बचा हुआ था.

उन्होंने कहा, 'वह अब भी हरा था और मैंने एक फूल खिलते हुए देखा. शायद वो पहला फूल था.'

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Image caption ज़ाहिद ऐसा प्राचीन घर ख़रीदने का सपना देखते थे. फिर उन्हे जूदएदा में एक घर मिल गया.

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