कैसे बुझाई जाती है ऊंची इमारतों की आग?

इमेज कॉपीरइट Getty Images

ब्रिटेन की राजधानी लंदन की आग की लपटों में घिरी बहुमंज़िला इमारत की तस्वीरों से ब्रिटेन और समूची दुनिया सकते में हैं.

दुनिया भर में अग्निशमन दल बहुमंज़िला इमारतों में लगी आग से जूझते हैं. ऐसे में अब तक क्या सबक सीखे गए हैं?

पूर्व फ़ायरफ़ाइटर और सुरक्षा सलाहकार बॉब पार्किन कहते हैं, "मौक़े पर पहुंचनेवाले अग्निशमन दल जितना जल्दी हो सके आग से दो तल नीचे अपना बेस बनाने की कोशिश करते हैं."

इससे अग्निशमन दल आग प्रभावित इमारत में एंट्री कंट्रोल पाइंट बना लेते हैं जहां से ऊपर जा रहे फ़ायरफ़ाइटरों की संख्या दर्ज की जाती है और वो अपने उपकरण की भी जांच कर लेते हैं. फ़ायरफ़ाइटर ऊपर धुआं भरे प्रभावित क्षेत्र में कितना सुरक्षित समय बिता सकते हैं इसकी भी गणना कर ली जाती है.

अग्निशमन कर्मी कितनी देर में आग बुझा सकते हैं ये मौजूद हवा पर निर्भर करता है. ऐसे में उपकरणों के साथ इमारत में ऊपर चढ़ते हुए ख़र्च हुआ समय दरअसल आग से लड़ने में इस्तेमाल हो सकने वाला बेशक़ीमती समय होता है जो बर्बाद हो जाता है.

लंदन की आग: अब तक क्या-क्या हुआ?

लंदन में आग- 'लोग खिड़की से बच्चों को फेंक रहे थे'

प्लेबैक आपके उपकरण पर नहीं हो पा रहा
लंदन की बहुमंज़िला इमारत आग के आगोश में!

पार्किन कहते है, "दस मंज़िलों तक चढ़ने में काफ़ी हवा ख़र्च हो सकती है, इसी वजह से जहां आग लगी है उससे दो तल नीचे कंट्रोल पाइंट बनाया जाता है."

इमारत में घुसते ही अग्निशमन कर्मियों का पहला उद्देश्य जीवित लोगों की तलाश और उन्हें सुरक्षित निकालना होता है. ऐसे में कर्मी पहले कम से कम उपकरण लेकर ऊपर चढ़ते हैं.

पार्किन कहते हैं, "कई बार इमारत में घुसने में दिक्कतें आती हैं लेकिन जब लोगों की जान दांव पर लगी हो तो वो ख़तरे भी उठाते हैं."

लेकिन लंदन की आग में अग्निशमन कर्मियों के सामने बेहद मुश्किल चुनौती थी क्योंकि आग बेहद तेज़ी पूरी इमारत में फैल गई थी.

पार्किन कहते हैं, "ऐसी परिस्थिति में बीस मंज़िलें चढ़ कर लोगों को बचाने के बारे में सोचना भी मुश्किल है. बचाए गए व्यक्ति के लिए अतिरिक्त ऑक्सीजन ले जाए बिना इमारत से सुरक्षित निकलना बहुत ही मुश्किल होगा."

इमेज कॉपीरइट Getty Images
Image caption 2015 में दुबई की 79 मंज़िला इमारत में आग फैलने की वजह बाहरी सज़ावट को माना गया था.

दुबई में 2015 में एक 79 मंज़िला रिहायशी इमारत टॉर्च स्काईस्क्रेपर में आग लग गई थी. फ़ायर इंजीनियरिंग कंसलटेंसी टेनेबल दुबई के मुताबिक ये आग इमारत की बाहरी सजावट की वजह से तेज़ी से फैली थी.

लेकिन इस आग में कोई हताहत या घायल नहीं हुआ था क्योंकि अग्निशमन दल इमारत के डिज़ाइन की वजह से ऊपर तक पहुंच पाये थे और लोगों को निकालने के लिए धुआं रहित सुरक्षित रास्ता मौजूद था.

टेनेबल दुबई के निदेशक सैम अलकॉक के मुताबिक, "दुबई में लगी सभी आगों को छह सात घंटे के भीतर बुझा दिया गया और अंदर फंसे सभी लोग सुरक्षित बाहर आने में कामयाब रहे."

वो कहते हैं, "जान बचाने में सबसे बड़ी भूमिका इमारत के डिज़ाइन और निर्माण की होती है."

लंदन की इमारत में रह रहे लोगों को आग लगने की स्थिति में भीतर ही रहने की सलाह दी गई थी. सैम मानते हैं कि ऐसी सलाह तब दी जाती है जब आग को रोकने और बुझाने के पर्याप्त इंतज़ाम इमारत में मौजूद हों.

वो कहते हैं, "इस मामले में ये सलाह ग़लत लगती है."

इमेज कॉपीरइट Getty Images

हाल के सालों की बड़ी आग लगने की घटनाएं

जनवरी 2017, प्लास्को बिल्डिंग तेहरान, ईरानः 17 मंज़िला वाणिज्यिक इमारत में आग लगने से दर्जनों लोग मारे गए जिनमें 18 फ़ायरफ़ाइटर थे. घटना से पहले इमारत को असुरक्षित माना गया था. आग लगने के दौरान ही इमारत धराशाई हो गई थी.

मई 2015 बाकू, अज़रबाइजानः रिहायशी इमारत में लगी आग से 16 लोगों की मौत हो गई जिनमें पांच बच्चे थे. इमारत की बाहरी सजावट को आग फैलने के लिए ज़िम्मेदार माना गया.

फ़रवरी 2015, द टॉर्च, दुबईः दुनिया की सबसे ऊंची रिहायशी इमारतों में से एक मे तेज़ी से आग फैली. 79 मंज़िला इमारत से सौकड़ों लोगों को सुरक्षित निकाल लिया गया.

सितंबर 2014, क्रास्नोयार्स्क, रूसः एक 25 मंज़िला इमारत आग लगने से बर्बाद हो गई. सभी 115 लोग इमारत से सुरक्षित निकलने में कामयाब रहे.

नवंबर 2010, शंघाई, चीनः 28 मंज़िला इमारत में आग लगने से 53 लोग मारे गए और कम से कम 90 घायल हो गए. चीनी मीडिया के मुताबिक इमारत में काम कर रहे वेल्डर आग के लिए ज़िम्मेदार थे. इन वेल्डरों के पास लाइसेंस नहीं था.

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)

मिलते-जुलते मुद्दे